मैंने कभी नहीं कहा, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के काबिल नहीं: अन्ना हजारे

मैंने कभी नहीं कहा, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के काबिल नहीं: अन्ना हजारे

भोपाल/नई दिल्ली.रामलीला मैदान में 2011 में मंच पर खड़े अन्ना हजारे का कद भले ही केंद्र सरकार से भी ऊंचा हो, बातचीत में यह व्यक्तित्व सरल और बेबाक है। दैनिक भास्कर से दो घंटे की बातचीत के दौरान 79 वर्ष के अन्ना की जिंदगी के कितने ही दौर जीवंत हुए। विवाह के सवाल पर हास-परिहास से लेकर उनके जीवन पर बनी फिल्म ‘अन्ना’ और नरेंद्र मोदी तक हर मुद्दे पर उन्होंने अपने विचार रखे। उन्होंने दैनिक भास्कर के लिव नो निगेटिव कैंपेन की भी सराहना भी की।मैंने नहीं कहा मोदी पीएम लायक नहीं…

सवाल: 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले आपने कहा था कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के काबिल नहीं…

जवाब: मैंने ऐसा कभी नहीं कहा था। मुझसे पत्रकारों ने पूछा था कि पीएम के तौर पर राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी में से आपकी पसंद कौन? मैंने सिर्फ इतना कहा था कि दोनों के ही मन में कारोबार और उससे जुड़े इंडस्ट्रियलिस्ट हैं। इनकी जगह किसान और समाज होना चाहिए।

सवाल: तो अब क्या लगता है, मोदी का काम-काज कैसा है?
जवाब: वे किसानों और समाज के हित की बात कर रहे हैं। काम भी हो रहा है।

सवाल: उड़ी हमला और उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक से भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ रहा है। आपका क्या कहना है?
जवाब: जंग दोनों ही देशों के लिए नुकसानदेह है। जान-माल की क्षति तो दोनों तरफ ही होगी। फिर दोनों ही देश कर्जे में हैं, ऐसे में जंग किसी के भी हित में नहीं है।

सवाल:तो भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक जैसे कदम सही नहीं?
जवाब: हमने पहला कदम कहां उठाया, हमने तो जवाब दिया। पहले उड़ी पर आतंकी हमला हुआ। बातचीत से अगर बात नहीं बने तो एक बार तो जवाब देना ही होगा।

सवाल: आप कहते हैं अरविंद केजरीवाल ने निराश किया। अब प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने भी पार्टी बनाई है, क्या उम्मीद है?

जवाब:अरविंद अच्छे व्यक्ति हैं। मैंने उनसे जो कहा था, वही प्रशांतजी से भी कहूंगा। आपका स्वयं का अच्छा होना काफी नहीं। जरूरी है कि पार्टी बनाएं तो उसमें शामिल हर व्यक्ति चरित्र से मजबूत हो। परंतु अक्सर ऐसा संभव नहीं हो पाता। व्यक्ति ईमानदार हो सकता है, लेकिन पार्टी का ईमानदार बने रहना कठिन है।

सवाल:लोग सोचते हैं कि मैं अकेला क्या कर सकता हूं?
जवाब:आज की स्थिति देखकर लोग परेशान होते हैं, लेकिन सोचते हैं कि मैं अकेला क्या कर सकता हूं। एेसा सोचना ठीक नहीं है। यह सोच गलत है। मुझे देखिए। क्या है मेरे पास? धन-दौलत, सत्ता कुछ भी तो नहीं है। इसके बावजूद मैंने आठ कानून बनवाए। सूचना का अधिकार दिलाने वाला कानून बनवाया। मेरे अनशन की वजह से भ्रष्ट मंत्रियों अौर नेताओं को पद से हटना पड़ा। मैंने विवाह नहीं किया, लेकिन मेरा परिवार बहुत बड़ा है। मैंने समाज को, देश को अपना परिवार बना लिया।

सवाल: सराहनीय है भास्कर का लिव नो निगेटिव कैंपेन
जवाब:दैनिक भास्कर के लिव नो निगेटिव कैंपेन की सराहना करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि ये एक अनुपम पहल है। लगातार हिंसा और अपराधों की खबरें पढ़कर आम आदमी के मन में भी नकारात्मकता भर जाती है। ऐसे में हफ्ते की शुरुआत सिर्फ सकारात्मक खबरों से करना एक अच्छी आदत है।

Courtesy: bhaskar.com

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