मोदी के दशशीष वाले पुतले काेे जला फ‍िर सुर्खियों में आया JNU, VC ने बैठाई जांच

मोदी के दशशीष वाले पुतले काेे जला फ‍िर सुर्खियों में आया JNU, VC ने बैठाई जांच

नई दिल्ली  इसी साल 9 फरवरी को भारत विरोधी नारा लगाने को लेकर चर्चा में आया जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में है। 11 अक्टूबर को जहां विजयदशमी पर देशभर में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ व हाफिज सईद के चेहरों को रावण के पुतलों पर लगाकर जलाया गया, वहीं जेएनयू में अखिल भारतीय छात्र संघ (NSUI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, योग गुरु बाबा रामदेव, नत्थूराम गोडसे, योगी आदित्य नाथ, जेएनयू वीसी, साध्वी प्रज्ञा और आसाराम बापू के चेहरे पुतले पर लगाकर जलाए।

यह पुतला जेएनयू कैंपस के पास स्थित सरस्वती ढाबे के नजदीक जलाया गया। छात्रों का कहना है कि इन्हें बुराइयों के प्रतीक के रूप में मानकर ऐसा किया गया। पुतला दहन से पहले एनएसयूआइ के नेता सनी धीमान ने छात्रों को संबोधित किया था।

वहीं, इस मामले को लेकर सियासी घमासान भी मच गया है. बीजेपी ने मांग की है कि सोनिया गांधी इसके लिए माफी मांगे। इसके साथ ही बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने केस दर्ज करने की मांग की है। भाजपा नेता नलिन कोहनी से इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसा काम समाज में दरार पैदा करने वाला है। बवाल के बाद जेएनयू कुलपति प्रो. एम जगदीश ने ट्वीट कर बताया है कि मामले में जांच बैठा दी है।

वहीं, दशहरा पर रावण की जगह प्रधानमंत्री का पुतला जलाने को लेकर एनएसयूआइ ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। छात्र संगठन ने जेएनयू विंग को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है। जेएनयू में पीएम का पुतला जलाए जाने को एनएसयूआइ ने छात्र संगठन द्वारा नैतिक संहिता का उल्लंघन बताया है।

इससे पहले अपने फेसुबक अकाउंट पर वीडियो अपलोड करने के दौरान अनिल मीणा ने इस बारे में टिप्पणी भी की है। उन्होंने लिखा है कि ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विजयदशमी अवसर पर कलयुग के बुराई के प्रतिक मोदीजी का पुतला इसलिए जलाया है कि इस दिन अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय, पाप पर पुण्य की विजय, अत्याचार पर सदाचार की विजय, क्रोध पर दया, क्षमा की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की विजय के अवसर आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

जलाने से पहले अपने भाषण में सनी धीमन ने कारण बताएं है जलाने के वे निम्न हैं :

पीएम और बाकी नेताओं का पुतला मंगलवार रात को जेएनयू कैंपस में सरस्वती ढाबा के पास जलाया गया।

जेएनयू में NSUI के प्रेसिडेंट कैंडिडेट रह चुके सनी धीमान ने से कहा, ‘हमने जुमलों, झूठ और फरेब के रावण का पुतला फूंका है।

आगे कहा कि ‘हम बीजेपी की तरह नहीं जो मनमोहन सिंह को गालियां देते थे, पीएम पद का सम्मान करते हैं इसलिए उन्हें मोदीजी बुलाते हैैं।

‘लेकिन मोदी लगातार झूठ बोल रहे हैं। कहते हैं कि दलितों को मत मारो, मुझे मारो। क्या देश में कानून का राज नहीं है?’

धीमान ने कहा, ‘वीसी के जरिए जेएनयू में मुस्लिम स्टूडेंट्स को निशाना बनाया जा रहा है. हमने विरोध के लिए विजयादशमी का दिन चुना, क्योंकि इसी दिन बाबा साहब अंबेडकर ने नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया था।

हमारे लिए संविधान राम है।

एनसयूआई के मेंबर मसूद ने कहा कि हां, हमने ऐसा किया, ये मोदी सरकार से हमारा असंतोष दिखाता है। हमारी मांग है कि सरकार से बुराई को बाहर किया जाए और एक ऐसा सिस्टम लाया जाए जो प्रो-स्टूडेंट और प्रो-पीपल हो।

पुतला सभी मोर्चो पर सरकार की विफलता को दर्शाने के लिए जलाया गया। यह प्रदर्शन गोरक्षा के नाम पर मुस्लिमों और दलितों पर अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे यूथ फोरम फॉर डिस्कशंस एंड वेलफेयर एक्टिविटीज को नोटिस जारी करने के जेएनयू प्रशासन के फैसले के खिलाफ था। कुछ छात्रों ने गुजरात सरकार और गोरक्षकों का पुतला जलाया।

विश्वविद्यालय बहस की जगह है, भजन गाने की जगह नहींः सनी

सनी धीमान ने कहा कि विश्वविद्यालय बहस की जगह है, भजन गाने की जगह नहीं है। यहां पूर्व में भी पुतले जलाए गए, लेकिन किसी छात्र को नोटिस नहीं दिया गया। विजयदशमी के दिन बाबा साहब अंबेडकर ने बौद्ध धर्म को स्वीकारा था। प्रधानमंत्री ने अंबेडकर के चेहरे का तो खूब प्रचार किया, लेकिन उनके विचारों को आगे नहीं बढ़ाया।

एबीवीपी ने की एनएसयूआइ के खिलाफ नारेबाजी

साबरमती ढाबा के निकट आयोजित इस पुतला दहन कार्यक्रम से थोड़ी दूर पर एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के कार्यकर्ता एनएसयूआइ के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। जेएनयू में एबीवीपी के नेता सौरभ कुमार शर्मा ने कहा कि कांग्रेस और एनएसयूआइ अपने पतन की ओर हैं, ऐसे में उनके नेता चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह की ओछी हरकत कर रहे हैं।

Courtesy: Jagran.com

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