शहीदों के गांवों में नहीं जले चूल्हे, दूर-दूर तक फैला हुआ है मातम

शहीदों के गांवों में नहीं जले चूल्हे, दूर-दूर तक फैला हुआ है मातम

नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर के राजौरी में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में और श्रीनगर के जकुरा आतंकियों के हमले में शहीद हुए जवानों के गावों में मातम पसरा है. गांव के घरों में चूल्हें नहीं जले और घर वालों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. दिवाली से पहले वे सपूतों का चेहरा देखना चाहते थे लेकिन, वे तिरंगे में लिपटे पहुंचे.

गौरतलब है कि पाकिस्तान की तरफ से की गई फायरिंग में सिपाही सुधीश कुमार शहीद हुए थे. यूपी के संभल पंसुखा गांव में शहीद के घर ही नहीं बल्कि पूरे गांव में मातम पसरा है. शहीद सुधीश अपने पीछे पत्नी और चार महीने की मासूम बेटी और माता पिता और भाई को छोड़ गए हैं.

परिवार को बेटे की शहादत का दुख तो है लेकिन गर्व भी है कि वो देश के लिए कुर्बान हुआ है. सुधीश के परिवार वाले पाकिस्तान से बदला चाहते हैं. सुदेश कुमार के परिवार में पत्नी और चार माह की बेटी के अलावा माता पिता और भाई हैं. परिवार वालों का कहना है की उन्हें सुदेश कुमार की शहादत पर फक्र है वो देश के लिए लड़ता हुआ शहीद हुआ है.

देश घनश्याम गुर्जर की शहादत भी नहीं भूल पाएगा. श्रीनगर के जकूरा में शुक्रवार को हुए आतंकी हमले में एसएसबी के जवान घनश्याम शहीद हो गए थे. राजस्थान के दौसा में घनश्याम का सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. शहीद घनश्याम गुर्जर का पार्थिव शरीर जैसे ही रविवार दोपहर को दौसा में उनके गांव खवाराव में पहुंचा, तो पूरा गांव चीख पुकार से भर गया.

Courtesy: ABPNews

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