RBI जानबूझकर कम करना चाहता है रुपये की वैल्यू!

RBI जानबूझकर कम करना चाहता है रुपये की वैल्यू!

फॉरन करेंसी नॉन रेजिडेंट-बैंक डिपॉजिट्स (एफसीएनआर-बी) रिडेम्पशंस का समय करीब आ गया है। इस बीच भारतीय बैंकिंग सिस्टम करीब 10 अरब डॉलर के बिना हेजिंग वाले फॉरन एक्सचेंज पोजिशन पर बैठा है, इससे भारतीय करेंसी की वैल्यू कुछ महीनों में तेजी से कम हो सकती है। रुपये की वैल्यू कम होने पर भारत से विदेश जाने वाले सामान सस्ते होंगे जिससे एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिलेगी। दिसंबर 2014 के बाद से देश का एक्सपोर्ट लगातार कम हो रहा है। हालांकि रुपये की वैल्यू कम होने से ऑयल और दूसरी कमोडिटी का इंपोर्ट महंगा हो जाएगा।

टॉप 3 प्राइवेट सेक्टर बैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक, एफसीएनआर-बी को भुनाए जाने पर देश से 22.4 अरब डॉलर की रकम बाहर जाएगी। बैंकों ने इसमें से 12.9 अरब डॉलर के लिए अक्टूबर और नवंबर में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स यानी हेजिंग की हैं। इस तरह से 9.5 अरब डॉलर की हेजिंग नहीं की गई है। एक सीनियर बैंक एग्जिक्यूटिव ने बताया कि इस कमी के चलते डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा जो इस साल जनवरी के बाद से एक रेंज में ट्रेड कर रहा है। मैकलॉय फाइनैंशल के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर केएन डे ने कहा, ‘एफसीएनआर-बी रिडेम्पशंस के चलते आने वाले महीनों में रुपये में गिरावट की काफी संभावना है। रुपया पिछले 10 महीनों से स्टेबल रहा है। ऐसे में रुपये में गिरावट आने से एक्सपोर्ट बढ़ेगा, जिससे ट्रेड डेफिसिट में कमी आएगी।’

रुपया पिछले शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 66.88 पर रहा। डीलरों का कहना है कि दिसंबर तक यह 67.50-68 के लेवल तक आ सकता है। अगस्त अंत तक के रिजर्व बैंक के डेटा का हवाला देते हुए बैंकों ने रिपोर्ट में कहा है कि सितंबर में एफसीएनआर-बी के तहत 2.1 अरब डॉलर का भुगतान किया जाना था, जबकि हेजिंग वाली पोजीशन 2.9 अरब डॉलर की थी। अक्टूबर-नवंबर में 22.4 अरब डॉलर का पेमेंट किया जाना है, जबकि बैंकों ने सिर्फ 12.9 अरब डॉलर की हेजिंग की है। दिसंबर और उसके बाद 2.3 अरब डॉलर का पेमेंट किया जाना है, जबकि फॉरवर्ड लॉन्ग पोजिशंस 13.3 अरब डॉलर की हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यह पता नहीं है कि आरबीआई ने अक्टूबर और नवंबर की पोजिशंस क्यों मैच नहीं की हैं। ऐसा हो सकता है कि डिपॉजिट के मैच्योर होने पर ही लोग पैसा निकालें। अगर ऐसा नहीं होता है तो आने वाले महीनों में आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ सकती है।’ बैंकों ने इस रिपोर्ट को कॉन्फिडेंशियल बताया है और इसे विदेशी करेंसी में लोन लेने वाले कुछ कॉर्पोरेट क्लाइंट्स के बीच बांटा गया है। आरबीआई ने एफसीएनआर-बी रिडेम्पशंस की प्लानिंग सोच-समझकर की थी। उसने इसे देखते हुए फॉरवर्ड पोजिशंस की डिलीवरी ली है। इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट में गैप कई एक्सपर्ट्स को हैरान कर रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि रिजर्व बैंक ने रुपये की वैल्यू कम करने के लिए जानबूझकर ऐसा किया है। वह शायद इस तरह से एक्सपोर्ट को बढ़ाना चाहता है जिसमें कई महीनों से लगातार गिरावट आ रही है।

Courtesy: NBT

 

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