बनारस हादसे के बाद दो एसपी समेत 5 अफसर सस्पेंड, 24 लोगों की हुई थी मौत

बनारस हादसे के बाद दो एसपी समेत 5 अफसर सस्पेंड, 24 लोगों की हुई थी मौत

वाराणसी. यहां के राजघाट पुल पर भगदड़ के बाद शनिवार को 24 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने पांच अफसरों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें दो एसपी शामिल हैं। घटनाजय गुरुदेव संगठन के प्रोग्राम के लिए निकाली गई शोभायात्रा के दौरान हुई थी। हादसे के वक्त वहां 80 हजार से 1 लाख लोग मौजूद थे। जबकि इजाजत 3 हजार लोगों की थी। समागम की इसी जगह पर फरवरी, 1996 में जय गुरुदेव ने भी सत्संग किया था। उस वक्त 10 लाख अनुयायी पहुंचे थे।किन अफसरों को सस्पेंड किया गया…

– वाराणसी के एसपी सिटी सुधाकर यादव, एसपी ट्रैफिक कमल किशोर, सीओ कोतवाली, एसओ राम नगर अनिल कुमार सिंह और चंदौली जनपद के मुगल सराय थाने के इंचार्ज को सस्पेंड किया गया है।

दो दिन शाकाहारी जागरूक सत्संग समागम

जय गुरुदेव की गद्दी पर फिलहाल बाबा पंकज दास बैठते हैं। पंकज का रविवार को डुमरिया में दो दिवसीय शाकाहारी जागरूक सत्संग समागम होना है, जिसके चलते लाखों की तादाद में अनुयायी कई शहरों से वाराणसी पहुंचे हैं।

शनिवार को इस वजह से पूरे शहर में जाम लगा था। अचानक पड़ाव के पास भगदड़ मच गई थी।

वाराणसी रेंज के आईजी एसके भगत ने कहा था, “3 हजार लोगों को आने की परमिशन दी गई थी, लेकिन 50 हजार लोग पहुंच गए।”

80 हजार से तीन लाख तक लोगों के पहुंचने की खबर

बताया जा रहा है कि जय गुरुदेव के प्रोग्राम के लिए 80 हजार से 3 लाख लोग तक पहुंच गए थे।

यह भी बताया गया था पुल से किसी शख्स के नीचे गिरने के बाद भगदड़ मची।
लोगों का कहना है कि क्राइसिस से निपटने के लिए कोई मैनेजमेंट नहीं था।
कुछ घायलों का ये भी कहना है कि भगदड़ के बाद पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया। इसके बाद लोग और भागे।

मोदी ने जताया दुख

नरेंद्र मोदी ने अफसरों से बात की थी। प्रधानमंत्री राहत कोष से मरने वालों के परिजन को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रु. देने का एलान किया गया है।

अखिलेश सरकार ने भी मरने वालों के फैमिली मैंबर्स को 2-2 लाख रु. और घायलों को 50 हजार देने की बात कही है।

कौन थे जयगुरुदेव?

जयगुरुदेव का बचपन का नाम तुलसीदास था। जन्म यूपी के इटावा जिले के पास भरथना के खितौरा में हुआ था।

जयदाद की वजह से इनके चाचा लोगो से इन्हें मारने की कोशिश की। जिसके बाद इन्हे संसार से वैराग्य हो गया।

अलीगढ़ में घूरेलाल जी के संपर्क में आए। अपना गुरु मान लिया। इसके बाद इन्होंने घूरेलाल से ही दीक्षा ली जिन्होने इनके जयगुरुदेव का नाम दिया।

1953 में मथुरा के कृष्णा नगर के चिरौली में आश्रम की स्थापना की।

इमरजेंसी के दौरान सरकार की खिलाफत की, जिसकी वजह से जयगुरुदेव जेल भी गए।

जय गुरुदेव ने 1962 में मथुरा में ही आगरा-दिल्ली राजमार्ग पर स्थित मधुवन क्षेत्र में डेढ़ सौ एकड़ भूमि खरीदकर एक आश्रम बनाया जो मुख्य आश्रम बना।

अनुयायियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए एक दूरदर्शी पार्टी भी बनाई। जिससे एक बार मथुरा के खूनी खेल का मास्टर माइंड रामवृक्ष भी लड़ा।

इनकी मुख्य अपील लोगों से मांसाहार छोडकर शाकाहारी बनने की होती थी । हालाकि इनके शिष्य साइकिल से चलते थे और टाट के कपड़े पहनते थे । इसके साथ वो चोरी मत करो और झूठ मत बोलो का भी उपदेश देते थे।

जयगुरुदेव की दौलत को लेकर है विवाद

2002 में जब जयगुरुदेव का निधन हुआ तो उनका उत्तराधिकारी बनने के लिए टकराव हो गया।

इस टकराव की वजह थी जयगुरुदेव के ट्रस्ट की अकूत दौलत जो करीब दस हजार करोड रुपए बताई गई ।

उत्तराधिकारी बनने के लिए तीन लोग सामने आए जिनमें उमाकांत तिवारी पकंजयादव और रामवृक्ष यादव। हांलाकि पकंज यादव ने जयगुरुदेव की अर्थी को मुखाग्नि दी थी ।

इसलिए पकंज यादव को ही उत्तराधिकारी बना दिया गया । उमाकांत तिवारी और रामवृक्ष ने इसका विरोध किया था।

Courtesy: bhaskar.com

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