इराक में ISIS को उसके गढ़ मोसुल से खदेड़ने की जंग हुई शुरू

इराक में ISIS को उसके गढ़ मोसुल से खदेड़ने की जंग हुई शुरू

बगदाद
इराक में इस्लामिक स्टेट (ISIS) पर सबसे बड़ा हमला शुरू हो गया है। इराकी और गठबंधन सेनाएं ISIS के गढ़ मोसुल शहर से को खदेड़ने के अपने अभियान पर आगे बढ़ रही हैं। ISIS के खिलाफ निर्णायक मानी जा रही इस जंग में इराकी व गठबंधन सेनाओं के करीब 94 हजार जवान और 90 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इराक में ISIS के खिलाफ चल रही लड़ाई में मोसुल सबसे अहम पड़ाव साबित होगा। इस शहर को ISIS के कब्जे से छुड़ाने का संघर्ष ना केवल लंबा चलने की उम्मीद है, बल्कि इसमें काफी नुकसान और खूनखराबा होने की भी संभावना है।

तिकरित और रमादी शहरों को गंवाने के बाद अब ISIS मोसुल को कब्जे में रखने की हर मुमकिन कोशिश करेगा। इराक में यह शहर ISIS की ताकत का आखिरी गढ़ है। इसका सीधा मतलब यह है कि मोसुल में मिली हार इराक से ISIS के खात्मे की शुरुआत होगी।

राजधानी बगदाद के बाद मोसुल इराक का सबसे बड़ा शहर है। इस शहर पर कब्जा करने में मिली कामयाबी ISIS को मिली सबसे अहम जीतों में से एक थी। जून 2014 में जब ISIS ने मोसुल को अपने अधिकार में लिया, तब शहर के साथ-साथ यहां रहने वाली विशाल आबादी भी उसके कब्जे में आ गई। 2014 में यहां की आबादी करीब 25 लाख थी। ISIS ने यहां के लोगों को अमानवीय यातनाएं दीं।

बीच सड़क पर सिर काटना, इमारतों की छत से गिराकर लोगों को मौत के घाट उतारना यह सब ISIS के चंगुल में फंसे इस शहर के लिए रोजमर्रा की घटनाएं बन गईं हैं। शरीया कानून के मुताबिक ना चलने वालों और ‘इस्लामिक’ कपड़े ना पहनने वालों पर खूब अत्याचार किए गए और बड़ी संख्या में लोगों को मारा गया।

पिछले 2 साल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने यहां से पलायन किया। भागने की कोशिश करते हुए पकड़े जाने वालों पर भी बहुत अत्याचार किया जाता है। आज की तारीख में शहर की आबादी घटकर करीब 10 लाख रह गई है। इन लोगों को ISIS के अत्याचार से मुक्ति दिलाना भी काफी अहम होगा। हालांकि एक संभावना यह भी है कि युद्ध में ISIS इन लोगों को अपनी ढाल बना सकता है।bagdad

मोसुल की भौगोलिक स्थिति भी उसे काफी अहम बनाती है। सीरिया और तुर्की की सीमा के पास बसा यह शहर कारोबार और व्यापार के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इराक के तेल कुओं में से कुछ सबसे बड़े कुएं मोसुल के पास हैं। इतना ही नहीं, तुर्की की ओर जाने वाली एक तेल पाइपलाइन भी मोसुल के पास है।

ISIS को मोसुल से खदेड़ने का असर यह भी होगा कि सीरिया और तुर्की में उनकी सक्रियता कम होगी। तेल के कुएं हाथ से निकलने पर उनकी फंडिंग का एक बेहद खास जरिया भी बंद हो जाएगा। मोसुल पर अगर ISIS का नियंत्रण खत्म हो गया, तो हथियारों की सप्लाइ, रसद और बाकी सामानों की खेप पाने के उनके रास्ते भी बेहद तंग हो जाएंगे।

ISIS के कब्जे से पहले मोसुल की सांस्कृतिक विरासत काफी मजबूत थी। इतने समय तक नृशंस यातनाएं झेलकर अब इस शहर का क्या हाल हुआ है, इसकी ठीक-ठीक तस्वीर तो तभी मालूम चलेगी, जब मोसुल से ISIS को खदेड़ दिया जाएगा।

मोसुल को वापस हासिल करने के इस अभियान को अमेरिका ने महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया है। वाइट हाउस के प्रेस सचिव जॉन अर्नेस्ट ने सोमवार को संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ‘मेरे ख्याल से मोसुल की आबादी और विशाल भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।’ उन्होंने कहा कि मोसुल से IS को बाहर निकालना काफी अहम होगा क्योंकि यहां IS की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है।mosul-is

इराक में चल रही सामरिक कार्रवाई को देखते हुए मोसुल का यह संघर्ष काफी महत्व रखता है। अर्नेस्ट ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मोसुल के महत्व को समझते हुए ही अमेरिका और उसके सहयोगी देश पिछले कई महीनों से मिलकर इस अभियान की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी माना कि मोसुल की लड़ाई अमेरिका और उसके सहयोगियों की अगली परीक्षा साबित होगी। इराक में जमीन पर पहले ही बढ़त हासिल कर ली गई है और रमादी और तिकरित शहरों को IS के कब्जे से वापस ले लिया गया है। अर्नेस्ट ने बताया कि ये दोनों शहर भी अपनी आबादी के लिहाज से महत्वपूर्ण थे और यहां से भी IS को बाहर भगाने में कामयाबी मिली।

एक अन्य सवाल के जवाब में अर्नेस्ट ने कहा कि उन्हें इस अभियान को पूरा करने के लिए तय की गई किसी समयसीमा की जानकारी नहीं है। मोसुल में ही IS के आतंकी सरगनाओं ने खिलाफत का ऐलान किया था। इराकी सरकार ने ऐलान किया है कि उसके सुरक्षा बलों ने IS विरोधी गठबंधन के सहयोग से मोसुल को आजाद कराने का अभियान शुरू कर दिया है। इराक की इस घोषणा के बाद ही अमेरिकी ने यह प्रतिक्रिया दी है।

Courtesy: NBT

 

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