JNU: बंधक संकट खत्म, 24 घंटे बाद दफ्तर से बाहर निकले वीसी

JNU: बंधक संकट खत्म, 24 घंटे बाद दफ्तर से बाहर निकले वीसी

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) का बंधक संकट खत्म हो गया है. 24 घंटे बाद वीसी अपने दफ्तर से निकल पाए हैं.

याद रहे कि जेएनयू एक बार फिर विवादों में है. एक छात्र के लापता होने के बाद कल से वहां हंगामा हो रहा है.

वीसी समेत दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों को छात्रों ने दफ्तर में कल से कथित तौरपर बंधक बना रखा है. अब 17 घंटे से भी ज्यादा वक्त से वीसी ‘बंधक’ बने हुए हैं. जबकि, छात्रों का दावा है कि उन्होंने किसी को बंधक नहीं बनाया.

पुलिस के भी आधिकारिक सूचना देने पर विचार किया जा रहा है. इसबीच लापता छात्र को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को दिल्ली के पुलिस से रिपोर्ट तलब की. गृह मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ ने दिल्ली पुलिस के आयुक्त आलोक कुमार वर्मा से मामले की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है.

वीसी एम. जगदीश कुमार ने आरोप लगाया है कि उनको और उनके सहकर्मियों को बंधक बना कर रखा गया है. उन्हें डायबटीज की बीमारी है लेकिन, इसके बावजूद उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने एबीपी न्यूज से कहा कि इस मसले को लेकर एकेडमिक काउंसिल की एक उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है और यदि उसमें उन्हें जाने से रोका जाएगा तो पुलिस को भी सूचना देंगे. अभी तक इस मामले की आधिकारिक सूचना पुलिस को नहीं दी गई है.

उन्होंने सुबह करीब 11 बजे पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि वे रातभर बंधक बने रहे और सभी को जमीन पर सोने के  लिए मजबूर होना पड़ा. लापता छात्र से उन्होंने अपील की कि वह जहां कहीं हो वापस आ जाए. साथ ही उन्होंने कहा कि उसे डरने की कोई जरूरत नहीं. वीसी के अनुसार प्रदर्शन कर रहे छात्र बात मानने को तैयार नहीं हैं.

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इसके उलट धरना दे रहे छात्रों ने बंधक बनाए जाने के आरोपों का खंडन किया है. पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अकबर ने कहा है कि छात्र वहां पर सिर्फ अपनी मांग लेकर बैठे हुए हैं. उन्होंने सभी से अनुरोध किया है कि कोई भी यहां से जा सकता है. अकबर ने दावा किया कि जेएनयू प्रशासन ने छात्र के लापता होने के मामले में लापरवाही की है और अब अपने बचाव में ‘बंधक’ बनने की बातें कह रहे हैं.

गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी का एक छात्र नजीब अहमद 15 अक्टूबर से लापता है. उसी की गुमशुदगी को लेकर बीती रात छात्रों ने हंगामा खड़ा कर दिया. यूनिवर्सिटी के एक छात्र संगठन का आरोप है कि प्रशासन नजीब के मामले में चुप्पी साधे हुए है. नजीब अहमद जेएनयू में बायोटेक्नोलॉजी का छात्र है. आरोपों के मुताबिक 14 अक्टूबर को माही मांडवी हॉस्टल में एबीवीपी के एक छात्र के साथ उसकी झड़प हुई, जिसके अगले दिन से वो लापता है.

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बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) का छात्र संगठन एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने लापता छात्र पर ही मारपीट का आरोप लगाया था. लेकिन, उसके गायब होने के बाद से जेएनयूएसयू (जवाहर लाल यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन) इस मुद्दे पर एबीवीपी को ही घेरने में लगा हुआ है. उस पूरी घटना की जांच और नजीब अहमद के गायब होने के मुद्दे को लेकर इन छात्रों ने करीब 8 घंटे तक वीसी के दफ्तर का घेराव किया.

देर रात जैसे ही वीसी के बाहर आने की खबर मिली तो प्रदर्शनकारी छात्र उनसे मिलने के लिए दौड़ पड़े. वीसी के आश्वासन के बाद भी छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वो नारेबाजी करते रहे. वहीं पुलिस ने नजीब अहमद का पता लगाने के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं और उसकी ख़बर देने वाले को 50 हजार रुपए का इनाम देने का एलान किया है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से जेएनयू के हालात की पूरी जानकारी ली है

Courtesy: ABP

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