मोसुल में चल रही है दुनिया के इतिहास की सबसे ‘खूनी’ जंग!

मोसुल में चल रही है दुनिया के इतिहास की सबसे ‘खूनी’ जंग!

बगदाद
इराक में ISIS के आखिरी मजबूत ठिकाने को कब्जे में लेने के लिए इराकी सेना व अमेरिकी गठबंधन की फौज सोमवार को अपना सैन्य अभियान शुरू कर चुकी है। जिस समय आप यह खबर पढ़ रहे हैं, उस समय इराक के इस दूसरे सबसे बड़े शहर में भयंकर गोलीबारी, हवाई बमबारी और फिदायीन हमलों का खौफनाक सिलसिला चालू है।

डेली मेल में छपी एक खबर के मुताबि, जब से मोसुल पर हमले की संभावना बनी, तब से ही ISIS यहां अपनी तैयारियां कर रहा था। उसने शहर के बाहरी हिस्सों में खाइयां खोदीं और उन्हें तेल से भर दिया। इनमें आग लगाकर ना केवल वे पैदल सेना का रास्ता रोक रहे हैं, बल्कि इनसे निकलने वाला घना काला धुआं आसमान से बमबारी करना भी काफी मुश्किल बना रहा है। ISIS ने यहां कंक्रीट के बाड़े और दीवारें बनाई हैं। कई खबरों में बताया जा रहा है कि टिगरिस नदी पर बने पुल, जो कि मोसुल के दोनों हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं, उनमें भी बारूदी सुरंगी बिछा दी गई हैं। हवाई बमबारी से बचने के लिए ISIS ने मासूम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को ऊंची इमारतों के ऊपर खड़ा कर दिया है। लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल करने की अमानवीय कोशिशें शुरू हो गई हैं।

मासूमों को कवच बनाकर खुद को बचाने की रणनीति
इस पूरी कवायद का मकसद दुश्मन सेना को मोसुल में घुसने से रोकना है। साथ ही, निर्दोष नागरिकों को भागने से रोकने के लिए यह रास्ता कारगर साबित होगा। संयुक्त राष्ट्र ने लड़ाई के मद्देनजर यहां के लोगों से बचकर भागने की अपील की थी। हाल के हफ्तों में कुछ लोग यहां से भागने में कामयाब रहे। शायद इसी को भाग्य कहते हैं। लेकिन ऐसे भाग्यवालों की संख्या बहुत मामूली है। लाखों की संख्या में लोग अभी अंदर ही फंसे हुए हैं और नृशंस अत्याचार झेलने को मजबूर हैं। अगर उन्होंने भागने की कोशिश की और पकड़े गए, तो उन्हें तुरंत गोली मार दी जाएगी।

युद्ध के और आगे बढ़ने पर ISIS की योजना नागरिकों के बीच मिलकर बचाव करने की है। बमों और मिसाइलों से बचने के लिए जैसे योद्धा शरीर पर कवच पहनते हैं, उसी तरह ये आतंकवादी लोगों को अपना कवच बनाने की फिराक में हैं। खबरों के मुताबिक, बहुत बड़ी संख्या में लोगों को बंधक बनाया गया है। एकबार मकसद पूरा होने पर इन्हें काटने-मारने में जरा भी कोताही नहीं बरती जाएगी। आप कहेंगे कि पिछले कुछ सालों से इराक में लगातार मारकाट हो रही है और लोगों का मरना यहां नई बात नहीं है। लेकिन अगर इराक में हिंसा के तमाम पिछले रेकॉर्ड को भी देखें, तब भी मोसुल की यह लड़ाई अकेले ही सारे रेकॉर्ड तोड़ सकती है।

मोसुल में रहने वाले आम लोग खो चुके हैं सारी उम्मीदें
डेली मेल ने मोसुल के अंदर रह रहे एक शख्स से बात की। यह शख्स एक समय में काफी संपन्न कारोबारी हुआ करता था, लेकिन पिछले 2 साल से मोसुल में आतंकियों के चंगुल में फंसा हुआ वह हर दिन ISIS के खात्मे की प्रार्थना कर रहा है। अब जबकि अमेरिका के नेतृत्व में सेना मोसुल के बाहर तक पहुंच चुकी है, उसे लगता है कि इस लड़ाई का अंत देखने के लिए वह शायद जिंदा ना बचे।

इस शख्स ने बताया, ‘ISIS ने पूरे मोसुल को बम धमाकों से बर्बाद कर दिया है। शहर के छोर पर रहने वाले लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अंदर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।’ इस शख्स को डर है कि मोसुल में रहने वाले हर आम आदमी को ये आतंकवादी अपने बचान के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल करेंगे। 2 साल की अमानवीय तकलीफों, खौफनाक ज्यादतियों और क्रूर हत्याओं को देखते-देखते उसका हाल कुछ ऐसा हो चला है, ‘एक बात जानते हैं आप? हम लोगों को अब कोई फर्क नहीं पड़ता है। अब तो हम बस इन आतंकवादियों से हमेशा-हमेशा के लिए छुटकारा चाहते हैं।’

आपकी कल्पना से भी ज्यादा खून बहेगा मोसुल में
ISIS के खात्मे के लिए लड़ रहे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए मोसुल की लड़ाई एक ‘परीक्षा’ की तरह है। मोसुल से खात्मे को ISIS के अंत की शुरुआत बताया जा रहा है। यह लड़ाई काफी निर्णायक साबित होने वाली है, लेकिन शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि किसी जगह को आजाद कराने का मिशन अपने साथ इतने बड़े ‘हत्याकांड’ का जोखिम लेकर आए। आने वाले दिनों में दुनिया को मोसुल के अंदर ISIS के खिलाफ विश्व की सबसे बड़ी लड़ाई देखने को मिलेगी। अमेरिका, ब्रिटेन और विशेष दस्तों की हवाई क्षमताओं से लैस 30,000 से ज्यादा इराकी सैनिक मोसुल से ISIS को खदेड़ने में जुट गए हैं।

यह काम एक-दो हफ्तों का नहीं, बल्कि महीनों तक चलने वाला है। खून से लथपथ सड़कों की तस्वीरें आने वाले दिनों में दुनिया के सामने आएंगी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान स्तालिनग्राद के ऊपर कब्जा करने को लेकर जब रूस और जर्मन फौजें एक-दूसरे से लड़ रहीं थीं, तब जैसे स्तालिनग्राद एक श्मशान में तब्दील हो गया था। मोसुल की हालत भी शायद ऐसी ही हो। ISIS के लिए मोसुल को अपने कब्जे में बनाए रखना बहुत जरूरी है। यह शहर ना केवल उनका आखिरी मजबूत ठिकाना है, बल्कि रसद, हथियारों और लड़ाकों की सप्लाइ और पैसा उगलने वाले तेल के कुओं पर गिरफ्त बनाए रखने के लिए भी मोसुल काफी अहम है। बमों, बंदूकों, मोर्टार्स और केमिकल हथियारों के अलावा और शायद किसी भी और हथियार से ज्यादा ISIS को भरोसा है मोसुल में बची हुई आम लोगों की आबादी पर। इस समय शहर में करीब 10 लाख लोगों के होने का अनुमान है। ISIS की नजर में ये लोग उनके बचाव का सबसे बड़ा हथियार हैं।

इंसान के हाथों लाई गई अब तक की सबसे बड़ी तबाही?
इराक में शरणार्थियों के UN उच्चायुक्त ब्रूनो गेडो की चेतावनी कि ‘यह ऑपरेशन आगे आने वाले कई-कई सालों तक इंसान के हाथों लाई गई सबसे बड़ी तबाही साबित होगा’ शायद सही साबित होगी। ब्रूनो ने कहा कि उनकी एजेंसी हाल के हफ्तों में भागकर आए करीब 7 लाख शरणार्थियों को तंबू, खाना और चिकित्सा सुविधाएं देने की पूरी कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि इस ऑपरेशन के नतीजे ‘सर्वनाश’ जैसे होंगे।

सीरिया की सीमा से मोसुल की दूरी महज 100 मील है। ऐसे में सीरिया और इराक दोनों देशों में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ISIS को मोसुल की बहुत जरूरत है। 2003 में यहीं पर सद्दाम हुसैन के दोनों बेटों को अमेरिकी फौज ने मुठभेड़ में मार गिराया था। उस दौर के मोसुल की तस्वीर देखकर आप शायद विश्वास नहीं कर सकेंगे कि बारूद के गुबार और खून की मोटी लकीरों व मांस के चिथड़ों से भरा हुआ आज जो दिखता है, वह वही मोसुल शहर है। तब रेस्तरां देर रात तक खुले रहते थे, शराब पीने और बिकने पर कोई पाबंदी नहीं थी। लोगों की जीवनशैली लचीली और काफी हद तक पाश्चात्य तौर-तरीकों से भरी हुई थी। वे यादें अब यहां रहने वालों को किसी और ही जन्म की बातें लगती हैं।

मोसुल को जीतकर दुनिया का सबसे नृशंस आतंकी संगठन बना IS
2014 में ISIS ने इस शहर को जीता था। काले मास्क और काले कपड़े पहने आतंकवादियों का काफिला सीरिया की सीमा पार कर यहां बेखौफ घूम रहा था। कुछ हजार ISIS लड़ाकों ने 75,000 इराकी सैनिकों को हरा दिया था। 10 साल तक अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा कड़ा प्रशिक्षण दिए जाने के बाद भी इराकी सेना पलक झपकते ही ताश के पत्तों की तरह गिर गई थी। आतंकवादियों ने मोसुल के सेंट्रल बैंक से करीब 50 मिलियन डॉलर लूट लिए। इन पैसों को हासिल कर ISIS अबतक के इतिहास का सबसे अमीर आतंकवादी संगठन बन गया। यह मोसुल ही था जिसे हासिल करने के बाद ISIS दिनोंदिन और खौफनाक बन होता गया। इस शहर पर कब्जे से पहले वह सीरिया के गृहयुद्ध में शामिल एक मामूली आतंकवादी समूह था। मोसुल में काबिज होने के बाद वही ISIS आज दुनिया का सबसे खौफनाक और नृशंस आतंकवादी संगठन बन गया है।

ISIS के अमानवीय जुल्मों की लिस्ट बहुत लंबी है
मोसुल पर कब्जा करने के एक महीने बाद अबू बकर बगदादी ने खुद को नया खलीफा और मोसुल को अपनी राजधानी घोषित किया। यहां रहने वाले ईसाई समुदाय के लोगों को 3 विकल्प दिए गए- इस्लाम स्वीकार करो, शहर छोड़कर चले जाओ या फिर तीसरा विकल्प कि मारे जाओ। पुरुषों को दाढ़ी लंबी करने का हुक्म दिया गया। व्यभिचार की सजा के तौर पर कोड़े या पत्थर मार-मारकर लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। चोरी करने वालों के हाथ काट दिए गए। ‘इस्लामिक’ तौर-तरीकों को ना मानने वालों को भयंकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। जिस तरह हम सब्जियां काटते हैं, उसी तरह उनके गले काट दिए गए। जिन महिलाओं का शरीर बुर्के से जरा भी बाहर नजर आ जाता था, उन्हें बीच सड़क पर भयंकर तरीकों से मारा जाता था। महिलाओं के चाल-चलन पर नजर रखने के लिए एक विशेष महिला पुलिस बनाई गई, जो कि सजा के तौर पर दोषी महिलाओं के शरीर से मांस के टुकड़े नोच लेतीं थीं। ऐसी यातना के बाद कौन जिंदा बच पाता है?

Courtesy: NBT

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