रीता बहुगुणा जी, क्‍या सच में आपके भाजपा में जाने के कारण वही हैंं, जो आपने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में गिनाए

रीता बहुगुणा जी, क्‍या सच में आपके भाजपा में जाने के कारण वही हैंं, जो आपने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में गिनाए

यूपी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और विधायक रीता बहुगुणा जोशी गुरुवार (20 अक्टूबर) को अपनी पुरानी पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गईं। माना जा रहा है कि जोशी शीला दीक्षित को यूपी के सीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही पार्टी से असंतुष्ट थीं। राज बब्बर को यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद उनके सब्र का बांध टूट गया। जोशी 2007 से 2012 तक यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष रही थीं। बीजेपी में शामिल होने से पहले जोशी समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी के सीएम अखिलेश यादव से भी मिली थीं। तब उनके सपा में शामिल होने की अटकल लगाई जा रही थी। लेकिन शायद वहां उनकी बात नहीं बनी। उनके बीजेपी में जाने की खबर सूत्रों के हवाले से तीन-चार पहले ही मीडिया में आ गई थी जिसकी आज आधिकारिक पुष्टि भी हो गई।

67 वर्षीय जोशी तीन दशकों से अधिक समय से राजनीति में हैं इसलिए उनके लिए उसी पार्टी में शामिल होने में ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी जिसका वो इतने लंबे समय से विरोध करती रही हैं। लेकिन हैरत की बात ये है कि जोशी ने गुरुवार को बीजेपी में शामिल होने के लिए जो तर्क दिए उन पर शायद कोई काठ का उल्लू ही यकीन करेगा। जोशी ने कहा कि वो राहुल गांधी के “खून के दलाली” वाले बयान से आहत थीं। जोशी ने कहा, “खून की दलाली जैसे शब्द का उपयोग किया गया, उससे मैं काफी दुखी हो गयी।” जोशी ने कहा कि जब पूरी दुनिया भारत की सर्जिकल स्ट्राइक पर यकीन कर रही थी तब कांग्रेस और दूसरी पार्टियों द्वारा इस पर सवाए उठाए जाना उन्हें पसंद नहीं आया।

जोशी ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में नई दिल्ली में पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। लेकिन अभी तक ये नहीं पता चला है कि बीजेपी में उन्हें क्या पद दिया जाएगा?

गौरतलब है कि उनके भाई विजय बहुगुणा जिन्हें कांग्रेस ने उत्तराखंड का सीएम बनाया था, पद से हटाए जाने के बाद कुछ समय तक रुष्ट रहे उसके बाद उन्हें कांग्रेस की सरकार गिराने की विफल कोशिश के बाद बीजेपी का दामन थाम लिया। जोशी के पिता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने भी अस्सी के दशक में कांग्रेस पार्टी छोड़कर उसके धुरविरोधियों से हाथ मिला लिया था। अगर पद का लालच न भी हो तो जोशी अपनी परिवार की परंपरा तो निभा ही रही हैं।

Courtesy:Jansatta

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