गजब का है ये कप्तान, फिर नई भूमिका में उतरा मैदान पर

गजब का है ये कप्तान, फिर नई भूमिका में उतरा मैदान पर

अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली। महेंद्र सिंह धौनी को चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए जाना जाता है। जब वह अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए मैदान में उतरे थे तो अपनी पांचवीं पारी में ही सबको चौंका दिया था। जब वह कप्तानी करने लगे तो उन्होंने अपने कई फैसलों से सबको चौंकाया। अधिकतर उनके फैसले सही साबित हुए. लेकिन कुछ निर्णय गलत भी रहे।

धौनी कभी अपनी तो कभी टीम की जरूरत के हिसाब बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करते रहे। ये वही धौनी थे जिन्होंने वीरेंद्र सहवाग को बाहर करके रोहित शर्मा से ओपनिंग कराई, लेकिन जब ऑस्ट्रेलिया में रोहित को चौथे नंबर पर उतारकर अजिंक्य रहाणे से ओपनिंग कराने के निर्णय को भी उन्होंने सही साबित करने की कोशिश की। कई बार ऐसा लगा कि वह कुछ खास खिलाड़ियों पर विशेष प्यार लुटाते हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में टीम ज्यादातर जीतती रही इसलिए उन पर उठे सवाल भी दब जाते थे। अब धौनी अपने करियर के अंतिम पड़ाव में हैं और मोहाली वनडे में उन्होंने चौथे नंबर पर उतरकर एक बार फिर सभी को चौंका दिया। एक बार फिर उनका दांव सफल रहा और पिछले 13 मैचों से अर्धशतक की तलाश कर रहे धौनी मोहाली में 80 रन की पारी खेलकर भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत दिलाने में सफल रहे।

टीम की भी दरकार

धौनी अपने पूरे करियर में छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे। सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ सहित कई खिलाड़ियों ने कहा कि धौनी के अंदर बल्लेबाजी की अद्भुत क्षमता है और उन्हें ऊपरी क्रम में उतरना चाहिए, लेकिन धौनी कहां किसी की सुनने वाले थे। वह अपने हिसाब से ही बल्लेबाजी क्रम चुनते थे। न्यूजीलैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में कुछ सीनियर खिलाड़ियों के न होने की वजह से वह पहले दो मैचों में पांचवें नंबर पर उतरे, लेकिन यह नंबर उनको फब नहीं रहा था। जब वह वनडे में छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं तो उन्हें 40 से 50वें ओवर में उतरना होता है। ऐसे में वह मैच को फिनिशिंग टच देने में सफल रहते हैं। पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के समय उन्हें 30 से 35वें ओवर के बीच क्रीज पर उतरना होता है। ऐसे में वह जब तक पारी को संवारते हैं और फिनिशिंग टच देने से पहले ही उनका विकेट गिर जाता है। ऐसे में वह मैच फिनिशर की भूमिका भी नहीं निभा पाते और पांचवें नंबर पर धीमे रन बनाने की वजह से भारत को लक्ष्य का पीछा करते समय रन रेट बढ़ जाता है। ऐसे में युवा खिलाड़ियों को उस रन रेट का पीछा करने में दिक्कत होती है। कोटला में दूसरे वनडे में ऐसा ही देखा गया।

धौनी की चपलता हुई कम

धौनी ने मोहाली में तीसरे वनडे को जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि उनकी बल्लेबाजी में पहले जैसी चपलता नहीं है और स्ट्राइक रोटेट करने में उनकी फुर्ती कम हुई है। उन्होंने कहा कि मैंने लंबे समय तक निचले क्रम में बल्लेबाजी की। करीब 200 पारियां मैंने निचले क्रम में खेली हैं, लेकिन अब मैं महसूस कर रहा हूं कि पिच के बीच दौड़ने में मेरी क्षमता कम हो रही है इसीलिए मैंने ऊपरी क्रम में उतरने और दूसरे खिलाड़ियों को मैच खत्म करने देने का फैसला किया। धौनी के बयान से लगता है कि वह अपने घर रांची में होने वाले चौथे वनडे में भी ऊपरी क्रम में उतरेंगे। खास बात ये है कि धौनी इस समय टीम के सबसे सीनियर खिलाड़ी और कप्तान हैं। उन्हें पता है कि मनीष पांडेय, हार्दिक पांड्या और केदार जाधव जैसे नए खिलाड़ियों का कैसे उपयोग करना है। धौनी ने अभी तक ये किया भी है। उन्होंने पांड्या को बुमराह से पहले गेंदबाजी पर लगाया। उन्होंने इसी सीरीज में जाधव जैसे पार्टटाइम स्पिनर से गेंदबाजी कराई जिन्होंने तीन मैच में छह विकेट झटक लिए। मनीष को भी उन्होंने पहले दो मैच में चौथे नंबर पर उतारा तो मोहाली में पांचवें नंबर पर भेजा। मनीष ने पांचवें नंबर पर उतारकर विराट के साथ अच्छी साझेदारी कर भारत को जीत दिलाई। कुल मिलाकर अभी भी धौनी का दिमाग कंप्यूटर की तरह चल रहा है और इसका फायदा टीम इंडिया को मिल रहा है।

Courtesy: Jagran.com

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