मोदी सरकार ने घटाया सैन्य अफसरों की रैंक का स्टेटस

मोदी सरकार ने घटाया सैन्य अफसरों की रैंक का स्टेटस

केंद्र सरकार ने सैन्य अधिकारियों की रैंक का स्‍टेटस कम कर दिया है। उनका स्टेटस अब तक समकक्ष माने जाते सिविल सेवा पदों से कम रहेगा। वन रैंक वन पेंशन और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर सेना पहले ही असंतुष्ट है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री कई बार सेना की पीठ थपथपा चुके हैं। लेकिन इस ताजा फैसले पर भी सैन्य अधिकारियों ने निराशा जताई है। इस फैसले पर रक्षा मंत्रालय ने 18 अक्‍टूबर को पत्र जारी किया। इसमें रक्षा अधिकारियों और सशस्त्र सेना मुख्यालय के सिविल सेवा अधिकारियों के रैंक में बराबरी की बात कही गई है। शेष| पेज 10

पत्रके अनुसार रैंक बराबरी के मुद्दे पर गहन अध्‍ययन के बाद यह फैसला लिया गया। ज्‍वाइंट सेक्रेटरी के दस्तखत वाली चिट्ठी में साल 2003-08 में थलसेना, वायुसेना और नौसेना की ओर से आए प्रशासनिक आदेशों का हवाला दिया गया है।

सेना के कैप्टन को बनाया ग्रुप बी सेक्शन ऑफिसर के बराबर:

– सिविल सेवा के ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर को अब थलसेना के कर्नल, नौसेना के कैप्टन और वायुसेना के ग्रुप कैप्टन के बराबर माना गया है। पहले मेजर जनरल, एयर वाइस मार्शल और रियर एडमिरल, ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर के बराबर थे।

– प्रिंसिपल डायरेक्टर अब मेजर जनरल, रियर एडमिरल और एयर वाइस मार्शल के बराबर होगा। पहले यह पद ब्रिगेडियर, कोमोडोर और एयर कोमोडर के बराबर था।

– डायरेक्टर रैंक का अधिकारी अब ब्रिगेडियर, कोमोडोर, एयर कोमोडर के बराबर होगा। जबकि अब तक कर्नल, कैप्टन, ग्रुप कैप्टन का रैंक डायरेक्‍टर के बराबर था।

– अधिकारियों का दावा है कि अब सेना का एक कैप्‍टन सिविल सेवा के ग्रुप बी के सेक्‍शन ऑफिसर के बराबर होगा।

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पर्रिकर बोले- पहले जैसा ही रहेगा स्टेटस, खुद देखेंगे मामला

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि कुछ लोग गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। यह मुद्दा काम संबंधी जिम्मेदारियों से जुड़ा है। इनका सैन्य अधिकारियों और सिविल सेवा अधिकारियों के स्टेटस से कोई लेना देना नहीं है। सैन्य अधिकारी अपने पहले वाले स्टेटस पर ही रहेंगे। पर्रिकर खुद इस मामले को देखेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मुद्दों पर बेहद संवेदनशील है।

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