सपा की महाभारत से क्या मिलेगा कॉंग्रेस और बसपा को फायदा ?

सपा की महाभारत से क्या मिलेगा कॉंग्रेस और बसपा को फायदा ?

यू पी की चुनावी महाभारत के बीच एक अलग महाभारत सपा के बीच मे चल रही है जो अब तेज़ होती दिख रही है l मुलायम ने दो दिन पहले शिवपाल यादव से कह कर अखिलेश यादव के करीबी मंत्री पवन पांडे को पार्टी से बर्खास्त करवा दिया l बदले में पलट कर पवन पांडे ने शिवपाल पर हल्का हमला करते हुए कहा कि केवल काग़ज़ पर बर्खास्त होने से वह बर्खास्त नहीं हो जाते l

ऊधर अखिलेश ने अपने बंगले पर अपने युवा साथियों के साथ लंबी बैठक की और तीन तारीक़ को होने वाली रथ यात्रा के लिए एक बड़े शक्ति प्रदर्शन की रणनीति बनाई l इन सब घटनाओं के बीच मुलायम सबसे ज़्यादा परेशानी मे दिख रहें हैं l उनके लिए यह नज़ारा बिलकुल नया है! उनको ऐसा लग रहा है कि उन्ही के बेटे के साथी उन्हे ललकार रहें हैं l दूसरी तरफ अखिलेश को लग रहा है की उनके चाचा शिवपाल, अमर सिंग के साथ मिलकर उनके खिलाफ साज़िश कर रहे हैं l यह सब इतना बड़ गया है कि जब अखिलेश यू .पी. के गवर्नेर से मिलने गये तो यह हवा उड़ी की वह परेशन होकर विधान सभा भंग करवाने गये हैं l बाद में खबर आई कि वह केवल दीवाली की शुभकामनाए देने गये थे l

इसके बाद यह खबर आई कि अखिलेश ने अपने युवा साथियों से कहा कि वह केवल सकारात्मक राजनीति करें और शिवपाल यादव की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जो लोग नकारात्मक राजनीति करते हैं उनसे बच कर रहें l इन युवा साथियों में वह लोग भी शामिल थे जिन्हें शिवपाल बर्खास्त कर चुके हैं l

शिवपाल यादव ने दो दिन पहले एक सकारात्मक बात भी कही, वह बोले कि सारे लोहियवादियों, चराणसिंग वादियों, राजनरायण वादियों और जीतने भी वादी हैं इन सभी समाजवादी  को एक साथ आकर और मिलकर सांप्रदायक शक्तियों से लड़ने की ज़रूरत है l पर इन सब के बीच एक सवाल मन मे उठता है कि सभी वादी को साथ लाने की बात तो हो रही है पर क्या पहले यह परिवार वादी साथ आ पाएँगे ? क्या यह समाज वाद है भी या केवल परिवारवाद बन कर रह गया है ?

राजनीतिक सलाहकारों का यह मानना है कि यदि मुलायम अमर सिंह से अपना पीछा छुड़वा लें तो पार्टी की आधी समस्या ख़तम हो जयगी ओर अखिलेश भी खुश हो जाएँगे, पर यह बात समझ के बाहर है की अपने बेटे की कीमत पर भी वह अमर सिंह से अलग क्यों नहीं हो रहे? यू पी की राजनीति में एक नारा चलता था ‘यू पी की मजबूरी है मुलायम सिंह ज़रूरी है’, पर अब ऐसा लगता है की नया नारा है, “मुलायम की मजबूरी है अमर सिंह ज़रूरी है l”

अभी इस परिवार की महाभारत संभली भी नहीं थी कि इन सब के बीच यू पी के बड़े नेता आज़म ख़ान ने एक ख़त के ज़रिए बयान जारी कर के इस महाभारत को नया मोड़ दे दिया है l इस बयान को देख कर लगता है कि यू पी का मूसलमान एक भ्रम की स्तिथि में है, परेशान है, हैरान है l आज़म ख़ान ने कहा कि इस समय यू पी मे सबसे ज़्यादा परेशान मुस्लिम समाज है, उन्हे अपना भविष्य अंधेरे मे लग रहा है l उनका टूटता- बिखरता सपना सबके सामने है l बिना कुछ किए भी सभी ने मुस्लिम वोटों को अपनी जागीर समझ रखा है l इन सब पर वह नज़र रखे हुए हैं और फ़ैसला लेने में अभी वक्त है, और फ़ैसला ऐसा ही लिया जाएगा कि भाजपा की सरकार ना बन सके l

मायावती ने अपनी पिछली रैली मे कहा भी था कि मुस्लिम अपना वोट सपा को देकर खराब ना करें क्योंकि इस चुनाव में अखिलेश का गुट शिवपाल के गुट को हराने की कोशिश करेगा और शिवपाल का गुट अखिलेश के गुट को हराने का प्रयास करेगा l कहीं ना कहीं मायावती की यह बात अब और मज़बूत होते हुए दिख रही है l मुस्लिम वोट अगर यहाँ हिलता है तो यह बात पक्की है की वही वोट हार- जीत निश्चित करेगा l किसी पार्टी का अगर मूल वोट अगर मज़बूत है और अगर उसके साथ उस पार्टी को सपा से टूटा हुआ मुस्लिम वोट भी मिल जाता है तो यह मान लेना चाहिए की उस पार्टी की जीत पक्की है l देखना यह होगा की इसका लाभ कितना कॉंग्रेस को मिलता है और कितना बसपा को l साथ ही में अगर चुनाव से पहले कोई गठबंधन देखने को मिल गया तो मामला और दिलचस्प हो जायगा l

 

 

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