सुरक्षा एजेंसियां अब आतंकियों के हाईटेक डिवाइस अनलॉक कर पाएंगी

सुरक्षा एजेंसियां अब आतंकियों के हाईटेक डिवाइस अनलॉक कर पाएंगी

नई दिल्ली.देश की सुरक्षा एजेंसियां दुनिया के हर मोबाइल व इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस को आसानी से अनलॉक कर पाएंगी। भारत इसके लिए इजलाइल से एक माह में मॉडर्न टेक्नोलॉजी हासिल करेगा। फिलहाल ऐसे मोबाइल को निर्माता कंपनी के बिना अनलॉक नहीं किया जा सकता है।
डाटा निकालना हो जाएगा अासान
दरअसल, ऐसी डिवाइस को अक्सर ऊंचे दर्जे के इनक्रिप्शन से लॉक किया जाता है। ऐसे में इनका लॉक तोडऩा बेहद मुश्किल हो पाता है। बहरहाल, गांधीनगर की फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफएसएल) यह टेक्नोलॉजी इजलाइली कंपनी सेलेब्राइट से खरीदेगी। सेलेब्राइट एक इजरायली डिजिटल फोरेंसिक कंपनी है। लैबोरेटरी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे आतंकवादी जैसे घटनाओं में मदद मिलेगी। उनके डिवाइस व उपकरणों से डाटा आसानी से निकाला जा सकेगा।
एफएसएल गांधीनगर को मिलेगी तकनीक
बता दें कि देश में केवल एफएसएल गांधीनगर के पास यह तकनीक होगी। इसके बाद अगर देश की दूसरी फोरेंसिक लैब अगर इनक्रिप्टेड डिवाइसेज को अनलॉक करने का अनुरोध करेंगे तो उनकी मदद की जाएगी लेकिन एफएसएल इसके लिए फीस लेगा। लैब की मदद से सुरक्षा एजेंसियां इस तकनीक का प्रयोग करेंगी।
अनलॉक करना क्यों है चुनौती
एप्पल जैसे मोबाइल फोन को अनलॉक कर उसका डाटा लेना बेहद मुश्किल है। इसे बनाने वाली कंपनी एप्पल के बिना लॉक तोडऩा संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में, दुनियाभर में कई आतंकी घटनाओं व जुर्म के मामलों में हर देश की पुलिस को फोन या डिवाइस अनलॉक करने में दिक्कतें होती रही हैं। फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम विंडो 8 या एंड्रायड का लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम होने पर पर डाटा निकालना असंभव होता है। पासवर्ड का अनुमान लगाने में बार-बार विफल रहने पर डेटा डिलीट हो जाने या डेटा के बेकार हो जाने का खतरा बना रहता है।
...जब अमरीका और एप्पल कंपनी के बीच ठनी थी
हाल में आरोपी सैयद फारूक का आईफोन अनलॉक करने के मुद्दे पर एफबीआई और एप्पल कंपनी के बीच सार्वजनिक रूप से विवाद हुआ था। फारूक ने पिछले साल दिसंबर में कैलिफोर्निया के सैन बर्नार्डिनो में 14 लोगों का कत्ल कर दिया था। एप्पल ने उसका फोन अनलॉक करने से मना कर दिया था। इसके बाद एफबीआई ने सेलेब्राइट कंपनी की मदद से फोन अनलॉक किया था। इस काम के लिए एफबीआई ने कंपनी को 10 लाख डॉलर से ज्यादा की फीस दी थी। अमरीका ने सबसे पहले इजराइल से यह तकनीक ली है।

Courtesy: patrika

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