नहीं रहे जंग-ए-आजादी का एलान करने वाले गांधीजी के करीबी ख्वाजा

नहीं रहे जंग-ए-आजादी का एलान करने वाले गांधीजी के करीबी ख्वाजा

अलीगढ़ एएमयू से जंग-ए-आजादी का एलान करने वाले गांधीवादी नेता रविंद्र ख्वाजा (88) नहीं रहे। 29 अक्टूबर को इग्लैंड के नौरिच शहर में उनका निधन हो गया। जेल रोड, समी मंजिल निवासी रविंद्र ख्वाजा के पिता अब्दुल मजीद ख्वाजा गांधीजी के बेहद करीबी थे। 1945 में रविंद्र ख्वाजा एएमयू में पढ़ाई कर रहे थे। अंग्रेजों भारत छोड़ो का आंदोलन तेज हुआ तो रविंद्र ख्वाजा ने 1946 में पढ़ाई छोड़ दी। स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों के साथ आंदोलन में कूद पड़े।

रविंद्र ख्वाजा के भांजे व वरिष्ठ पत्रकार तारिक हसन ने बताया कि पिता के साथ ही रविंद्र ख्वाजा गांधी जी के साथ रहे। गांधीजी की जब हत्या हुई तो रविंद्र ख्वाजा के पिता ने अन्य धर्म गुरुओं के साथ उनकी अंतिम विदाई में कुरान ख्वानी की थी। रविंद्र ख्वाजा ने ऑल इंडिया सिटीजन फोरम का भी गठन किया, जिसका उद्देश्य सभी पार्टियों को एक साथ लाना था। 1967 में उन्होंने शहर विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 1974 में भी इंदिरा गांधी ने उन्हें टिकट दिया लेकिन वोटर लिस्ट में नाम न होने के चलते चुनाव नहीं लड़ सके।एएमयू के तिब्बिया कॉलेज में वे लेक्चर भी रहे। 1974 में वे इग्लैंड चले गए। राजा महेंद्र प्रताप के भी वे काफी करीबी थे, जब भी भारत आते उनसे मिलने देहरादून जरूर जाते।
अपना खुद रखा नाम : उनके नाम को लेकर लोग अक्सर अचंभे में पड़ जाते थे। उनका असली नाम रशीद बिल ख्वाजा था। उनका मानना था कि नाम से कुछ नहीं होता। इसलिए उन्होंने अपना नाम रविंद्र ख्वाजा रख लिया। सरोजनी नायडु से प्रभावित होकर एक बेटी का नाम सरोजनी, दूसरी का माला, तीसरी का नाम रश्मि और बेटे का नाम अमर रखा।

Courtesy: Jagran.com

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