गैरकानूनी ढंग से ब्रिटेन में मौजूद भारतीयों की वापसी पर निर्भर करेगा वीसा नियमों में लचीलापन : थेरेसा मे

गैरकानूनी ढंग से ब्रिटेन में मौजूद भारतीयों की वापसी पर निर्भर करेगा वीसा नियमों में लचीलापन : थेरेसा मे

नई दिल्ली: भारतीयों को वीसा देने की प्रक्रिया में लचीलेपन का वादा करते हुए ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने सोमवार को स्पष्ट किया कि इस वादे का पूरा होना ‘उन भारतीयों की ब्रिटेन से वापसी की गति तथा संख्या पर निर्भर करेगा, जिन्हें वहां रहने का अधिकार नहीं है…’

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी संयुक्त प्रेस वार्ता में थेरेसा मे ने घोषणा की कि दोनों देशों ने एक स्ट्रेट्जिक वर्कग्रुप गठित किया है, जो वीसा नियमों पर काम करेगा.

थेरेसा मे ‘ब्रेक्ज़िट’ (ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने) के बाद के वक्त में दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था भारत से होने वाले संभावित समझौते का आधार तैयार करने दो-दिवसीय भारत यात्रा पर आई हैं.

हालांकि जब तक ब्रिटेन पूरी तरह यूरोपीय यूनियन से बाहर नहीं निकल जाता, जो वर्ष 2019 में संभावित है, वह किसी भी देश के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता नहीं कर सकता है, लेकिन थेरेसा मे ने संकेत दिए कि वह ईयू से बाहर निकलते ही देरी करने के पक्ष में नहीं हैं. सोमवार को उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “(साझा हितों वाले इलाकों की) पहचान के लिए हमारे यूरोपियन यूनियन से बाहर निकल आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है…”

जुलाई में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद यूरोप से बाहर अपने पहले द्विपक्षीय दौरे में थेरेसा मे लगभग 40 व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ रविवार रात दिल्ली पहुंची थीं, और मंगलवार को वह आईटी हब कहलाने वाले बेंगलुरू शहर जाएंगी.
लेकिन दोनों देशों के बीच अधिकतर व्यापारिक वार्ताएं भारतीय कुशल कामगारों तथा विद्यार्थियों को वीसा जदारी किए जाने के मुद्दे पर निर्भर करेंगी.

भारत में खासतौर से उन विद्यार्थियों के लिए वीसा पाबंदियों को लेकर नाराज़गी है, जो यूनिवर्सिटी कोर्स खत्म होने के बाद भी ब्रिटेन में रहना चाहते हैं, और इसी वजह से वहां जाने वाले भारतीय विद्यार्थियों में 50 फीसदी की कमी आई है. पिछले सप्ताह यूके द्वारा घोषित नए तथा पहले से कड़े वीसा नियमों से भारतीयों, विशेषकर सॉफ्टवेयर प्रोफेशनलों, की संख्या में कमी आएगी.

यूरोप के भीतर और बाहर इमिग्रेशन को लेकर लोगों में मौजूद गुस्से को ही जून में ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह के परिणाम की प्रमुख वजह माना जा रह है, जब ब्रिटिश नागरिकों ने ईयू से बाहर निकलने के पक्ष में वोटिंग की थी.

ब्रिटेन कह चुका है कि वह भारतीयों के लिए व्यापारिक यात्राएं आसान करने के लिए कदम उठाएगा, जिनमें यूके बॉर्डर कंट्रोल की ओर से जल्दी क्लियरेंस दिया जाना शामिल है, लेकिन थेरेसा मे के एक सहायक ने कहा कि यह प्रक्रिया को तेज़ करने के बारे में है, संख्या बढ़ाने के बारे में नहीं.

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