नोटबंदी: सैलरी मिलते ही मचा ‘कोहराम’, काम नहीं आए इंतजाम

नोटबंदी: सैलरी मिलते ही मचा ‘कोहराम’, काम नहीं आए इंतजाम

नई दिल्ली
एक विज्ञापन की पंक्तियां हैं, खुश है जमाना आज पहली तारीख है। गुरुवार को दिसंबर की पहली तारीख को लोग सैलरी मिलने के बाद भी खुश होने की बजाय हलकान दिख रहे हैं। सुबह से ही एटीएम के बाहर एक बार फिर से लाइनें लंबी हो गईं और बैंकों में भीड़ बढ़ गई।

लोगों के अकाउंट में तो सैलरी आने के कारण पैसा आ गया है लेकिन वॉलिट अब भी खाली है। आरबीआई और बैंकों की ओर से किए गए तैयारी के दावे जमीन पर उतरते नहीं दिखे। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के ज्यादातर बड़े शहरों में लोग कतारों में लगे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कतार में लगने के बाद भी लोगों को पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है।

आरबीआई ने एक सप्ताह में 24 हजार रुपये कैश निकालने की सीमा तय की है, लेकिन बैंक इतने भी नहीं दे पा रहे हैं। एनसीआर के कई बैंकों में कैश की किल्लत बताकर खाताधारकों को कहीं 4,000 रुपये दिए गए तो कहीं 10,000 रुपये। इस बीच आरबीआई ने जनधन खातों से निकासी को लेकर भी नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

नए आदेशों के मुताबिक विशेष परिस्थिति में बैंक मैनेजर की अनुमति से जनधन खाते से महीने में 20 हजार तक निकाले जा सकते हैं। इसके अलावा 10 हजार की निकासी की सुविधा सिर्फ KYC लिंक खातों के लिए है। बिना KYC वाले खातों से 5 हजार रुपये ही निकाले जा सकते हैं।

कम होगी कैश की सप्लाइ
पीएम मोदी के कैशलेस सोसायटी के ऐलान के बाद यह साफ है कि मार्केट में कैश का फ्लो नोटबंदी की घोषणा से पहले जैसा नहीं रहेगा। एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अब आरबीआई पहले जितना कैश बैंकों को सप्लाइ नहीं करेगा। जिस कारण लोगों को कैश का विकल्प यानी कार्ड ट्रांजैक्शन या मोबाइल पेमेंट पर निर्भर होना पड़ेगा।

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विशेषज्ञों के मुताबिक अब सेंट्रल बैंक पहले जितना कैश नहीं सप्लाइ करेगा। सेंट्रल बैंक करंसी नोट की सप्लाई कम करेगा और आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा देगा।

अकाउंट में सैलरी पाने वाले परेशान
देश में लगभग 1 करोड़ 75 लाख केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी अकाउंट में आती है। वहीं 52 लाख पेंशनर्स को भी पेंशन के लिए बैंक और एटीएम पर निर्भर होना पड़ता है। राज्य सरकारों के कर्मचारियों की भी सैलरी उनके अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है। इसके अलावा 1 करोड़ 14 संगठित निजी क्षेत्र के एंप्लॉयीज को कैश में सैलरी नहीं मिलती। इतनी बड़ी संख्या में लोग अपनी सैलरी निकालने बैंक या एटीएम जाएंगे तो बैंकों पर भार बढ़ना स्वाभाविक है।

कैश सैलरी पाने वाले भी परेशान
नई करंसी की इतनी सप्लाइ नहीं हो पाई है कि लोग सैलरी में नए नोट दे पाएं। कई जगह अभी भी सैलरी में पुराने नोट दिए जा रहे हैं। वहीं कई जगह सैलरी देर से मिलने की पूरी संभावना है।

 

Courtesy: NBT

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