नकदी संकट : कड़ाके की ठंड में भी सुबह से बैंकों के बाहर जमा हो गये लोग

लखनऊ   कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग नकदी की उम्मीद में एटीएम की तरफ देर शाम तक दौड़ते नजर आ रहे हैं। सुबह से ही बैंकों के बाहर लाइन लगना शुरू हो गया है। लेकिन कैश न होने से खाली हाथ घर लौटना पड़ा। सूबे में नाम मात्र के एटीएम ही कुछ देर तक नोट उगल पाए। राजधानी में भी एटीएम सेवा चौपट रही। लगातार 28वें दिन भी परेशानी का सामना करना पड़ा। इक्का-दुक्का को छोड़ अधिकांश एटीएम खाली रहे। बलरामपुर, लखीमपुर में शहर के सभी एटीएम के शटर डाउन रहे। बाराबंकी में प्रधान डाकघर में पैसा नहीं पहुंचने से खाताधारक परेशान रहे। सीतापुर, बहराइच और फैजाबाद में अधिकांश एटीएम दगा दे गए। सुलतानपुर और रायबरेली में तकरीबन सभी एटीएम में ताले लटके रहे। अमेठी और श्रावस्ती में सभी एटीएम बंद रहे जो खुले रहे उसमें नगदी का अकाल रहा। इलाहाबाद में नोटबंदी के बाद से 85 फीसद एटीएम कैश का इंतजार कर रहे हैं। बैंकों के दावों के बावजूद महज 15 फीसद एटीएम ही चले। प्रतापगढ़ में नकदी संकट बना रहा। कौशांबी में भी इक्का दुक्का एटीएम ही चले। गोरखपुर-बस्ती मंडल के अधिकांश एटीएम कैश की कमी के कारण बंद चल रहे हैं। जहां कैश था वह भी दोपहर ढाई बजे तक खाली हो गया। मध्य यूपी व बुंदेलखंड में बैंकिंग व्यवस्था लगभग ठप रही। मंगलवार को कानपुर ,कानपुर देहात, उन्नाव, फर्रुखाबाद, फतेहपुर,कन्नौज, औरैया, इटावा, हरदोई, बांदा, महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर तथा उरई में अधिकांश एटीएम शोपीस बने रहे। आगरा और आसपास के जिलों में एटीएम पर पर्याप्त कैश न होने के कारण लोग परेशान रहे। तमाम एटीएम या तो बंद थे तो या नो कैश के संदेश चस्पा थे। आगरा शहर में मात्र भारतीय स्टेट बैंक के ही दो एटीएम में दोपहर तक करेंसी रही। बैंकों पर निर्भर डाक विभाग में तो पांच दिन से सन्नाटा है। मेरठ, सहारनपुर मंडल में भी ज्यादातर खाताधारक एटीएम से मायूस लौटे। मुजफ्फरनगर में एसबीआइ के कुछ गिने-चुने एटीएम चले। ग्राम वाजिदपुर में कैश न मिलने से उपचार कराने में नाकाम 62 वर्षीय विक्रम की मौत हो गई। बिजनौर में एटीएम खाली थे। बुलंदशहर, बागपत और शामली में भी एटीएम लोगों को मायूसी ही दे पाए। मुरादाबाद मंडल में भी एटीएम बूथों पर ताले लटके रहे। बरेली में मात्र छह एटीएम से ही नोट निकले।

मुजफ्फरनगर में मिली नोटों की कतरन मुजफ्फरनगर : मुजफ्फरनगर में पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों की कतरन मिली है। दो दिन पूर्व भोपा रोड स्थित एक पेपर मिल में रद्दी का ट्रक आया था। ट्रक में अन्य कागजी रद्दी के साथ पुराने 500 और एक हजार के नोटों की कतरनें मिलीं। एक से दूसरे हाथ से होती हुई ये कतरनें बाजार में पहुंच गयीं तो लोग हैरत में पड़ गए। नोटों को मशीनों से काटकर इतना बारीक किया हुआ है तो इनकी पहचान खत्म सी हो रही है।

सदमे में मौत  डायबिटीज की चपेट में आए एक शख्स के खाते में एक लाख रुपये से ज्यादा जमा थे, लेकिन दवा के लिए मोहताज हो गया। दो दिन तक कतार में लगने पर हिम्मत न बची तो कई बार पत्नी को बैंक भेजा। सोमवार को भी जब पत्नी सुधा खाली हाथ लौटी तो पति गांव सैदपुर निवासी महेश सिंह (42) को गहरा सदमा लगा। मंगलवार सुबह हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई।

जारी हों छोटे नोट : श्याम बिहारी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्याम बिहारी मिश्र ने कहा कि मंडी शुल्क सहित व्यापारी समस्याओं के मुद्दे पर व्यापार मंडल की लखनऊ में नौ दिसंबर को प्रस्तावित युवा व्यापारी रैली नोटबंदी के बाद मची अफरातफरी के चलते टाल दी गई है। अब नौ दिसंबर को पूरे प्रदेश में जिला इकाइयों की अगुवाई में जुलूस निकाल कर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी तो अच्छा कदम है किंतु इसके बाद से कारोबार बंद की स्थिति होने से व्यापारी नाराज हैं। इन महीनों के रिटर्न में बिक्री स्वाभाविक रूप से कम होगी जिससे राजस्व गिरेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से भेंट में आग्र्रह किया कि पांच सौ, सौ, पचास, बीस और दस के नोट जारी किए जाएं ताकि कारोबार ठीक से चलना शुरू हो।

Courtesy: Jagran.com

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