AIADMK का दावा: जयललिता के निधन से तमिलनाडु में कई लोग दुखी; बीमारी और सदमे की वजह से 77 की मौत

AIADMK का दावा: जयललिता के निधन से तमिलनाडु में कई लोग दुखी; बीमारी और सदमे की वजह से 77 की मौत

चेन्नई.AIADMK ने दावा किया है कि जयललिता की बीमारी और फिर निधन की खबर सुनकर दुख और सदमे की वजह से 77 लोगों की मौत हो गई। अम्मा की मौत के बाद ही मीडिया में 3 लोगों की सदमे से मौत होने और 2 लोगों ने खुदकुशी की कोशिश करने की खबरें आई थीं। लेकिन उस वक्त किसी ने पुष्टि नहीं की थी। पार्टी ने मरने वालों के परिवार को 3 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया है। दुख और सदमे से मरने वालों की तादाद तो बताई गई है, पर यह नहीं बताया है कि इनमें पुरुष और महिलाएं कितनी हैं। साथ ही, ये भी कि ये लोग प्रदेश में कहां के रहने वाले थे। बता दें सोमवार की रात को 11:30 बजे जयललिता का निधन हो गया था। अपोलो के बाहर लगी रही समर्थकों की भीड़…

जयललिता 75 दिन तक चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती रहीं। इस दौरान उनके समर्थक 24 घंटे हॉस्पिटल के बाहर खड़े रहे।

बता दें कि इसके पहले जब जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सजा होने पर जेल जाना पड़ा था। तब भी कथित तौर पर दुखी हो कर उनके कई समर्थकों ने अपनी जान देने की कोशिश की थी। उस वक्त भी कई लोगों के मरने की खबरें आई थीं।

# MGR के निधन के बाद हिंसा में 29 लोग मारे गए थे

मुरुथुर गोपालन रामचंद्रन (MGR) ने डीएमके से अलग होकर 1972 में एआईएडीएमके पार्टी बनाई और 5 साल बाद ही सीएम भी बन गए।

फॉलोअर्स MGR को भगवान से कम नहीं मानते थे। MGR के निधन के वक्त पूरे तमिलनाडु में दंगे शुरू हो गए थे।

उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं, “भीड़ ने दुकानों, सिनेमाघरों, पब्लिक और प्राइवेट प्रॉपर्टी को निशाना बनाना शुरू कर दिया था।”

MGR के फ्यूनरल को अब तक के सबसे ज्यादा वॉयलेंट फ्यूनरल में से एक माना जाता है।
इस अंतिम संस्कार में 10 लाख लोग शामिल हुए थे, जिन्हें संभालना पुलिस के लिए नामुमकिन साबित हो रहा था।
इसी दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें 29 लोगों की जान चली गई और 47 पुलिसवाले बुरी तरह घायल हो गए।

बता दें एमजीआर जयललिता के मेंटर थे। वे ही अम्मा को राजनीति में लाए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, MGR की मौत के बाद दुखी होकर 30 लोगों ने खुदकुशी भी कर ली थी।

# 1987 ना दोहराया जाए इसलिए अलर्ट थी केंद्र सरकार
लगातार दूसरी बार 2016 में सरकार बनाने के बाद MGR और जयललिता की लोकप्रियता की तुलना की जाने लगी।
इसकी एक झलक तब देखने को मिली, जब बेंगलुरु कोर्ट ने उन्हें दोषी बताया था।
इस दौरान AIADMK के वर्कर्स बेकाबू हो गए थे और उन्होंने पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया था।
इसके बाद जब जयललिता की सेहत बिगड़ी और हालात गंभीर हो गए तो केंद्र ने पूरे मामले पर नजर बनाए रखी।
गृहमंत्री खुद हालात पर नजर रख रहे थे, ताकि 1987 जैसी घटनाएं दोहराई ना जा सकें।

Courtesy: Bhaskar.com

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