क्या इस ‘खास’ इंक के कारण छापे में पकड़े जा रहे हैं 500 और 2000 के नए नोटों के बंडल

क्या इस ‘खास’ इंक के कारण छापे में पकड़े जा रहे हैं 500 और 2000 के नए नोटों के बंडल

नोटबंदी के मोदी सरकार का फैसले और 500, 2000 के नए नोटों को लेकर लगातार इंटरनेट अफवाहों का दौर जारी है। सबसे पहले खबर उड़ी थी कि नए नोटों में जीपीएस चिप लगाई गई है। हालांकि सरकार की ओर से बाद में इसे खारिज कर दिया गया है। फिर बाद में फेक करेंसी के सामने आने पर खबर आई कई मोबाइल एप है जिनपर नोटों को स्कैन करके यह पता किया जा सकता है कि नोट असली है या नकली। यह खबर भी गलत साबित हुई। अब फिर से एक नई अफवाह से इंटरनेट का बाजार गर्म है। इंटरनेट और वाट्सएप पर लगाातार ऐसे मैसेज शेयर किए जा रहे हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि 500 और 2000 रुपए के नए नोटों में रेडियोएक्टिव इंक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके चलते नोटों को ट्रैक किया जा रहा है।

कुछ मीडिया वेबसाइट्सों और वॉट्सएप मैसेज के मुताबिक नए नोटों की प्रिंटिंग में फॉस्फोरस के रेडियोएक्टिव आइसोटोप का इस्तेमाल किया गया है। जिसमें 15 प्रोटॉन और 17 न्यूट्रॉन होते हैं। यह रेडियोएक्टिव वार्निंग टेप की तरह प्रयोग होता है जिससे एक ही जगह पर मौजूद लिमिट से अधिक नोट होने पर रेडियोएक्टिव पदार्थ इंडिकेटर के तौर पर नोटों की मौजूदगी को सूचित करता है। इसी के चलते भारी मात्रा में नगदी का संग्रह करने वाले आईटी के रडार में आ रहे हैं। इस तरह के मैसेज इसलिए वायरल हो रहे हैं क्योंकि देशभर में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में कई जगह रेड की है। दिल्ली, चेन्नई, वेल्लोर, बेंगलुरु और पुणे में की गई रेड सही साबित हुई। यहां बड़ी मात्रा में नए नोटो को छिपाकर रखा गया था।

इन रे़डियो एक्टिव इंक अफवाहों के मुताबिक नोट में इस्तेमाल किया गया रेडियोएक्टिव आइसोटोप स्वास्थय के लिए हानिकारक नहीं है। हालांकि क्षयांक यानि टी हाफ के कारण उसकी सक्रियता एक समय के बाद कम हो जायेगी। जिसके कारण आने वाले वक़्त में नई करेंसी भी बंद हो जाएगी। यह इंक इंडिकेटर के रूप में काम में लिया जा रहा है जिसके कारण अब नोट खुद ही अपना पता बता रहे हैं।

Courtesy:jansatta

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