ट्रांजैक्शन के लिए कैश के इस्तेमाल पर देना पड़ जाएगा चार्ज!

ट्रांजैक्शन के लिए कैश के इस्तेमाल पर देना पड़ जाएगा चार्ज!

नई दिल्ली
आने वाले समय में आपको ट्रांजैक्शंस के लिए कैश का इस्तेमाल करने पर चार्ज देना पड़ सकता है। डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के तरीकों पर सुझाव देने के लिए बनाई गई एक कमिटी ने यह सिफारिश सामने रखी है। इसके साथ ही कमिटी ने मोबाइल और आधार बेस्ड सिस्टम्स के जरिए पेमेंट्स को आसान बनाने की भी सलाह दी है।

पूर्व फाइनैंस सेक्रटरी रतन वट्टल की अगुवाई वाली इस कमिटी ने कुछ उपायों को लागू करने के लिए 30-90 दिनों की टाइमलाइन का सुझाव दिया है। कमिटी का मानना है कि इन उपायों से देश में कैश के इस्तेमाल में आधी कमी हो सकती है।

कमिटी ने सेंट्रल बैंकिंग स्ट्रक्चर के अंदर एक इंडिपेंडेंट मेकनिजम बनाने के साथ ही पेमेंट और सेटलमेंट कानूनों में संशोधन करने का भी सुझाव दिया है। कैशलेस सोसायटी की ओर बढ़ने के लिए कमिटी ने कैश के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने की सिफारिश दी है।

पिछले महीने की शुरुआत में 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने के बाद से सरकार कम कैश वाली इकॉनमी पर जोर दे रही है। कमिटी ने कैश के इस्तेमाल के लिए चार्ज लगाने और कैश की कॉस्ट को लेकर जागरूकता फैलाने की सलाह दी है। कमिटी का कहना है, ‘एक आम भारतीय के नजरिए से स्थिति की समीक्षा करने की जरूरत है। इसके लिए यह देखना होगा कि डिजिटल होने का क्या कारण है। कई कमियों के बावजूद कैश के इस्तेमाल से तुरंत सेटलमेंट होता है और इसके साथ जीरो ट्रांजैक्शन कॉस्ट का भ्रम रहता है।’

कमिटी ने डिजिटल पेमेंट्स को कैश की तरह आसान बनाने के लिए आधार और मोबाइल नंबर्स के अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया है। कमिटी के मुताबिक, ‘मोबाइल नंबर और आधार बेस्ड फुली इंटर-ऑपरेबल पेमेंट्स को प्रायॉरिटी दी जानी चाहिए।’ इसके अलावा कमिटी ने पेमेंट्स के रेग्युलेशन को सेंट्रल बैंकिंग से अलग करने से जुड़ा एक सबसे महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। कमिटी का कहना है कि बोर्ड फॉर रेग्युलेशन ऐंड सेटलमेंट सिस्टम्स (BPSS) को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ओवरऑल स्ट्रक्चर के अंदर स्वतंत्र कानूनी दर्जा दिया जा सकता है और इसका नाम पेमेंट्स रेग्युलेट्री बोर्ड किया जा सकता है। अभी यह RBI के सेंट्रल बोर्ड की एक सब-कमेटी के तौर पर काम करता है।

कमिटी ने पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम्स ऐक्ट, 2007 में संशोधन करने की भी जरूरत बताई है। इसने एक ‘दीपायन’ फंड का प्रपोजल दिया है, जो कैशलेस ट्रांजैक्शंस से होने वाली बचत से तैयार किया जाएगा। इसका इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट्स का दायरा बढ़ाने के साथ ही डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन देने के लिए राज्यों, सरकारी विभागों, जिलों और पंचायतों की रैंकिंग में किया जा सकता है। रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) और नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) को कॉस्ट बेनेफिट अनैलेसिस करने के बाद आउटसोर्स करने का भी सुझाव दिया गया है।

Courtesy: NBT

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