नोटबंदी इफेक्‍ट: ताजमहल पर आधे रह गए टूरिस्‍ट, खाली पड़े होटल-निकाले जा रहे कर्मचारी

आगरा.सर्दी के मौसम में पर्यटकों से गुलजार रहने वाले ताजमहल के टिकट काउंटर पर नोटबंदी की वजह से सन्‍नाटा है। पर्यटकों की संख्‍या आधी रह गई है। विदेशी टूरिस्‍ट टूर कैंसिल कर नेपाल व अन्‍य देश जा रहे हैं। होटलों के कमरे खाली पड़े हैं। अब यहां से कर्मचारी भी निकले जा रहे हैं। टूरिस्‍ट इंडस्‍ट्री चौपट होने के कगार पर है। इससे 5 लाख लोग जुड़े हैं।

लगातार कम हो रहे हैं पर्यटक

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (एएसआई) के रिकॉर्ड के अनुसार, ताजमहल पर्यटक लगातार कम हो रहे हैं। इससे संरक्षण के लिए टिकटों से होने वाली इनकम भी आधी रह गई है।

21 से 30 नवंबर 2015 तक ताजमहल में 2.4 लाख पर्यट‍क पहुंचे थे, जबकि 21 से 30 नवंबर 2016 तक यह संख्‍या घटकर 1.6 लाख रह गई।
एक से 10 दिसंबर 2015 तक पर्यटकों की संख्‍या तीन लाख थी, जबकि वर्ष 2016 में इस दौरान डेढ़ लाख पर्यटक आए हैं।
अक्‍सर रविवार को ताजमहल पर ज्‍यादा भीड़ होती थी और बाहर का परिसर खचाखच भरा रहता था, लेकिन बीते रविवार को यहां के टिकट काउंटर पर सन्‍नाटा सा था। सोमवार को भी यही हाल है।

पांच लाख लोगों के रोजगार पर संकट

आगरा होटल एंड रेस्‍टोरेंट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष राकेश चौहान का कहना है कि आगरा में टूरिज्‍म इंडस्‍ट्री से पांच लाख लोग जुड़े हैं। चार सौ से ज्‍यादा होटल व रेस्‍टोरेंट हैं। दर्जनों ट्रैवल एजेंसियां हैं। मार्बल के छोटे-छोटे ताजमहल व अन्‍य सामान बनाने वाले हजारों कुटीर उद्योग हैं।
नोटबंदी की वजह से ताजमहल में पर्यटक कम होने का सीधा असर यहां के पांच लाख लोगों के रोजगार पर पड़ रहा है।
होटलों के अधिकतर कमरे खाली पड़े हैं। जबकि हर साल होटलों में जगह नहीं बचती थी।

विदेशी पर्यटक टूर रद कर जा रहे नेपाल, श्रीलंका भूटान
टूर ऑपरेटर हितेश तिवारी का कहना है कि विदेशी सैलानी के लिए ताजमहल का टिकट 1000 रुपया है और आगरा किला का 750 रुपया और फतेहपुर सीकरी का 500 रुपया। केवल टिकट में 2500 रुपए खर्च हो जाते हैं।
इसके बाद स्‍थानीय खाना खाने और घूमने के लिए कैश रकम की भी जरूरत पड़ती है, जो पर्यटकों को बहुत मुश्किल से मिल पा रहा है।
ऐसे में विदेशी पर्यटक अपना टूर कैंसिल करके नेपाल, भूटान व श्रीलंका की ओर रुख कर रहे हैं। रविवार को ताजमहल पर मात्र एक हजार विदेशी टूरिस्‍ट पहुंचे। यह पिछले चार सालों में सबसे कम आंकड़ा है।

अगले साल भी सर्दी में विदेशी पर्यटक कम आने की आशंका
होटल संचालक सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि विदेशी पर्यटक आठ से 10 महीने पहले ही अपने टूर का प्‍लान बनाते हैं।
ऐसे में अब अगले साल आने वाले पर्यटक भी कम हो जाएंगे। इसी चिंता में होटल एंड रेस्‍टोरेंट एसोसिएशन की 15 दिसंबर को बैठक होने वाली है।

ताज के पास होटलों में रोजाना बुक हो रहे मात्र 3-4 कमरे
ताजमहल के पास विदेशी पर्यटकों के लिए कम बजट के अच्‍छे होटल हैं। होटल कमल के मालिक ने बताया कि रविवार को एक वकमरा और सोमवार को दो कमरे बुक हुए हैं।
यही शहर के अन्‍य होटलों का भी है। होटल के कमरे खाली पड़े हैं और रेस्टोरेंट में खाने वाले टूरिस्‍ट नहीं हैं।
होटल चलाने में बिजली का बिल, नगर निगम का टैक्‍स सहित कई ऐसे खर्च हैं, जो खाली रहने पर भी भरना ही पड़ता है।
इन खर्च को कम करने के लिए अब होटल स्‍टाफ कम किए जा रहे हैं।

मुगलकालीन कारीगरी मार्बल उद्योग को लगा कड़ा झटका

मार्बल से बने खूबसूरत सामान बेचने वाले इंपोरियम के मालिक ताहिरउद्दीन ताहिर ने बताया कि पर्यटन उद्योग को सर्दी के मौसम का इंतजार रहता है।
नवंबर से फरवरी तक में ही सालभर की 70 फीसदी कमाई होती थी। लेकिन इस बार नोटबंदी के मारे देशी व विदेशी पर्यटक नहीं आ रहे हैं। इससे कमाई ठप हो गई है।
करीब दो लाख से ज्‍यादा लोग मार्बल का सामान बनाने और बेचने की प्रक्रिया में हैं। उनका काम ठप होने लगा है।

Courtesy: Bhaskar.com

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