अरुणाचल स्कैम: कॉन्ट्रैक्टर ने विजिलेंस ऑफिसर से बातचीत में रिजिजू को 17 बार ‘भैया’ बताया, कहा- मदद चाहिए तो बताएं

अरुणाचल स्कैम: कॉन्ट्रैक्टर ने विजिलेंस ऑफिसर से बातचीत में रिजिजू को 17 बार ‘भैया’ बताया, कहा- मदद चाहिए तो बताएं

नई दिल्ली. अरुणाचल प्रदेश के हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में 450 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के मामले में एक ऑडियो टेप सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस का दावा है कि उसके पास केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के रिश्तेदार और कॉन्ट्रैक्टर गोबोई रिजिजू की विजिलेंस अफसर सतीश वर्मा के साथ हुई बातचीत का 29 मिनट का ऑडियो टेप है। दावा है कि इस बातचीत में गोबोई ने 17 बार ‘भैया’ कहकर रिजिजू का जिक्र किया है। गोबोई ने अफसर से ये भी कहा है, “हम तो सुने हैं सर कि आपका प्रमोशन होने वाला है। भैया के लायक कुछ भी हो तो आप बोलिए सर।” ढाई साल में मोदी सरकार के किसी मंत्री पर करप्शन में शामिल होने का पहला बड़ा आरोप

– बता दें कि मई 2014 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि मोदी सरकार के किसी मंत्री पर करप्शन में शामिल होने का ऐसा बड़ा आरोप लगा है।

– रिजिजू पर आरोप है कि उन्होंने कजिन को जल्दी पेमेंट दिलवाने के लिए पावर मिनिस्ट्री को लेटर लिखा था।

– यह मामला सेंट्रल विजिलेंस अफसर सतीश वर्मा की 129 पेज की एक रिपोर्ट के जरिए सामने आया था।

– इस बीच, रिजिजू ने कहा कि प्रोजेक्ट के सभी काम और उसकी पेमेन्ट कांग्रेस के शासन में हुए। जो आरोप लगे हैं, वो गलत हैं। आरोप लगाने वालों को देश से माफी मांगनी चाहिए।

रिजिजू ने पूछाक्या गरीबों की मदद करना करप्शन है?

– रिजिजू ने ट्विटर पर पावर मिनिस्ट्री को लिखा लेटर पोस्ट करते हुए लिखा, “ये वाकई शर्मनाक हरकत है। मैं लेटर पोस्ट कर रहा हूं। क्या गरीबों की मदद करना करप्शन है?”

– “प्रोजेक्ट के सभी काम और पेमेन्ट कांग्रेस के शासन में हुए। इसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। सांसद होने के नाते स्थानीय लोग मेरे पास मदद मांगने आए थे।”
– “कांग्रेस में हिम्मत है तो मुझे चैलेंज करे। वे मामले को तूल नहीं दे सकते। मुझ पर कोई दाग नहीं है। कांग्रेस के आरोप आधारहीन हैं, उनमें कोई सच्चाई नहीं है।”
– “कांग्रेस ने मुझ पर आरोप लगाकर बड़ी भूल की है। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। कुछ लोग गलत स्टोरी छाप रहे हैं। लेकिन सच की ही जीत होगी।”

ऐसे सामने आया रिजिजू का नाम
– द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चीफ विजिलेंस अफसर सतीश वर्मा ने 129 पेज की रिपोर्ट बनाई थी।

– इसमें नॉर्थ-ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NEEPCO) के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) समेत टॉप पोस्ट पर बैठे कई अफसरों को करप्शन के लिए जिम्मेदार बताया गया था।

– रिपोर्ट 600 मेगावॉट के कामेंग हाइड्रो प्रोजेक्ट के दो डैम के कंस्ट्रक्शन में गड़बड़ी और करप्शन के चलते 450 करोड़ रुपए के घोटाले की बात कही गई है।
– रिपोर्ट में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें रिजिजू के कजिन बताए जा रहे कॉन्ट्रैक्टर गोबोई रिजिजू भी शामिल हैं।
– कामेंग को अरुणाचल के सबसे बड़े हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है। प्रोजेक्ट, अरुणाचल वेस्ट इलाके में आता है जो रिजिजू का संसदीय क्षेत्र है।
– रिपोर्ट आने के बाद वर्मा का त्रिपुरा सीआरपीएफ में ट्रांसफर कर दिया गया था।

किसे भेजी गई थी रिपोर्ट?
– वर्मा ने जुलाई में ये रिपोर्ट सीबीआई, सीवीसी (चीफ विजिलेंस कमिश्नर) और पावर मिनिस्ट्री को भेजी थी।
– रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्टर्स, नीपको ऑफिशियल्स और वेस्ट कामेंग डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की मदद से करोड़ों का हेर-फेर किया गया। सीबीआई ने दो बार चेकिंग की, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं किया।

रिजिजू ने कहा थाखबरें प्लान्ट करने वालों को जूते पड़ेंगे
– रिजिजू पर आरोप है कि उन्होंने पावर मिनिस्ट्री को गोबोई को फंड रिलीज करने के लिए लेटर लिखा था।
– रिजिजू ने कहा, “जो लोग मेरे खिलाफ खबरें प्लान्ट कर रहे हैं, वे उनके यहां आएंगे तो उन्हें जूते पड़ेंगे। क्या लोगों की मदद करना करप्शन है?”
– सफाई में रिजिजू ने कहा, “ये खबर किसी ने बदमाशी करके प्लान्ट की है। मैं अपने क्षेत्र के लोगों को रिप्रेजेंट करता हूं। पेंडिंग बिलों को लेकर मैंने लेटर लिखा था। इसमें ना तो कुछ गलत है और ना ही करप्शन है।”

Courtesy: Bhaskar

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