ट्रम्प ने तेल कंपनी के CEO को US का विदेश मंत्री चुना: फॉरेन पॉलिसी में तजुर्बा नहीं, लेकिन रशियन प्रेसिडेंट दे चुके हैं अवॉर्ड

वॉशिंगटन. अमेरिका के प्रेसिडेंट-इलेक्ट डोनाल्ड ट्रम्प ने एक्सॉन मोबिल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन और सीईओ रेक्स टिलरसन को विदेश मंत्री चुना है। मंगलवार को इस फैसले का एलान किया गया। एक्सॉन दुनिया की सबसे बड़ी पब्लिकली ट्रेडेड ऑयल-गैस कंपनी है। ट्रम्प की तरह टिलरसन को भी विदेश नीति का कोई अनुभव नहीं है। उनके रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से करीबी संबंध हैं। पुतिन ने 2012 में उन्हें ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप अवॉर्ड दिया था।ट्रम्प बोले- टिलरसन का करियर अमेरिकी ख्वाब का अवतार…

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ट्रम्प ने अपने बयान में कहा, ‘रेक्स टिलरसन का करियर अमेरिकी ख्वाब का अवतार है। कठिन मेहनत, लगन और सौदेबाजी में माहिर होने के चलते ही वे एक्सॉन मोबिल की सीईओ पोस्ट तक पहुंचे।’

‘एक्सॉन मोबिल दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा सम्मानित कंपनियों में से एक है।’
ट्रम्प की ट्रांजिशन टीम ने कहा, ’64 साल के टिलरसन दुनिया के सबसे माहिर बिजनेस लीडर्स में से एक हैं, उन्होंने 70 हजार से ज्यादा अपने इम्प्लॉइज के जॉब की सुरक्षा में अपना ज्यादातर वक्त खर्च किया है।’
वर्ल्ड क्लास प्लेयर हैं टिलरसन : ट्रम्प
ट्रम्प की ट्रांजिशन टीम ने कहा, टिलरसन दुनियाभर में फैले कंपनी के 200 से ज्यादा दफ्तरों को गाइड करते हैं, उन्हें ऑपरेट करते हैं।
टिलरसन जानते हैं कि एक ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशन को कैसे मैनेज किया जाता है। उन्होंने कई जटिल मामलों को सफलता से सुलझाया है
विदेश मंत्री के तौर पर टिलरसन अमेरिका के राष्ट्रीय हितों पर पूरी नजर रखेंगे और जिन गुमराह विदेश नीतियों से दुनिया में हमारी साख कमजोर हुई, उसे बदलने में मदद करेंगे।

ट्रम्प ने कहा, ‘लंबे अनुभव और राजनीति की अपनी गहरी समझ के चलते टिलरसन विदेश मंत्री की पोस्ट के लिए सबसे अच्छी च्वॉइस हैं। वे रीजनल स्टेबिलिटी पर जोर देंगे और अमेरिका के प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर फोकस करेंगे।’

‘टिलरसन बिजनेस एग्‍जीक्‍यूटिव्स से कहीं आगे हैं, मेरा मतलब कि वे वर्ल्‍ड क्‍लास प्‍लेयर हैं।’

टिलरसन ने क्या कहा?
रेक्स टिलरसन ने कहा, मैं अमेरिका के विदेश संबंधों को लेकर ट्रम्प के विजन की क्रेडिबिलिटी को बहाल करने के साथ ही नेशनल सिक्युरिटी को एडवांस करूंगा।
‘हमारा फोकस अमेरिका के सहयोगी देशों को मजबूत बनाने पर भी होगा।’

प्रोडक्शन मैनेजर से सीईओ तक का सफर
टिलरसन ने एक्सॉन में 1975 में प्रोडक्शन मैनेजर के तौर पर काम शुरू किया था। 2006 में वे कंपनी के सीईओ बन गए।

ट्रम्प की तरह टिलरसन को भी विदेश नीति का कोई अनुभव नहीं है, लेकिन दुनिया के कई नेताओं से उनके करीबी संबंध हैं।
टिलरसन पूरे यूरेशिया और मिडिल ईस्ट में अपनी कंपनी की तरफ से कई अहम डील्स को अंजाम दे चुके हैं।

टिलरसन को इसलिए मिला था रूसी अवॉर्ड
टिलरसन के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बड़े अच्छे संबंध हैं। पुतिन ने उन्हें 2012 में ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप अवॉर्ड दिया था।

ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप रूस की तरफ से फॉरेन सिटिजंस को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।

टिलरसन को यह अवॉर्ड रूस की सरकारी तेल कंपनी रॉसनेफ्ट से डील साइन करने के बाद मिला था।

रॉसनेफ्ट के चीफ आईगोर सेचिन को राष्ट्रपति पुतिन का वफादार लेफ्टिनेंट कहा जाता है।

ट्रम्प के लिए टिलरसन को पाना नहीं होगा आसान
पुतिन से करीबी संबंध होने से टिलरसन के नॉमिनेशन को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है।
यूएस में हर मिनिस्टर की नियुक्ति को सीनेट की मंजूरी मिलनी जरूरी होती है। टिलरसन के नाम को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों ने चिंता जताई है।
ऐसे में ट्रम्प के लिए खुद उनकी पार्टी यानी रिपब्लिकन के सीनेटर्स ही दिक्कत पैदा कर सकते हैं।
पिछले दिनों मीडिया में यह रिपोर्ट सामने आई थी कि सीआईए ने दावा किया है कि ट्रम्प की जीत में रूस का हाथ है। खुफिया एजेंसी ने इसकी जानकारी एक सीक्रेट मीटिंग में कुछ अमेरिकी सांसदों को भी दी है।
कहा गया था कि रूस ने डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी की वेबसाइट्स को हैक करके चुनाव में हस्तक्षेप किया।
इसके बाद अब टिलरसन की राह आसान नहीं मानी जा रही है।

Courtesy: Bhaskar.com

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