ब्रिटिश मीडिया ने विराट को ही बता दिया नेगेटिव, कहा- वे तो अश्विन-जडेजा के बूते जीते

ब्रिटिश मीडिया ने विराट को ही बता दिया नेगेटिव, कहा- वे तो अश्विन-जडेजा के बूते जीते

लंदन. भारत ने इंग्लैंड टीम को 4-0 से टेस्ट सीरीज हरा दिया, पर ब्रिटिश मीडिया को यह पच नहीं पा रहा है। ब्रिटिश मीडिया ने अपने एनालिसिस में लिखा कि विराट कोहली स्ट्रैटजी बनाने में कमजोर हैं। वे नेगेटिव अप्रोच रखते हैं। लेकिन इस बारे में किसी ने बात नहीं की क्योंकि रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा उन्हें जीत दिला रहे थे। ये कुछ वैसा ही है जैसे 4 साल पहले इंग्लैंड की टीम से ग्रीम स्वान और मॉन्टी पनेसर खेले थे। इन दोनों स्पिनर्स ने उस वक्त इंग्लैंड की जीत में अहम रोल अदा किया था। इस बार ये दोनों टीम में नहीं थे। आखिरी दिन ब्रिटिश टीम के बस विकेट गिरते रहे

– इंग्लैंड के अखबार ‘द सन’ ने लिखा, “आखिरी टेस्ट के आखिरी दिन यानी 21 दिसंबर को हमारे विकेट धड़ाधड़ गिरते रहे। इंग्लिश टीम के खिलाड़ियों ने खराब शॉट्स खेले। उन्हें शर्म आनी चाहिए।”
– “जिस तरह मोइन अली और बेन स्टोक्स ने भारतीय फील्डरों की तरफ कैच उछाले, उसकी कोई वजह नहीं बताई जा सकती।”
– “ऐसा या तो बहुत दबाव के चलते हुआ होगा या फिर क्रिकेट के बेसिक नियमों को ही भूल गए।”
– “आखिरी दिन इंग्लैंड ने 2 सेशन से भी कम वक्त में 10 विकेट गंवा दिए। शर्मनाक तो ये है कि मैच इनिंग और 75 रन और सीरीज 4-0 से हार गए।”

– ”विराट कोहली टेक्टिक्ट्स के मामले में बेहद कमजोर हैं। वे नेगेटिव स्ट्रैटजी रखते हैं। लेकिन शायद ही कोई इस बारे में बात करेगा क्योंकि रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा उन्हें जीत दिला रहे थे।”

– “ये कुछ वैसा ही था जैसे 4 साल पहले कुक ने ग्रीम स्वान और मॉन्टी पनेसर को चुना था। इन दोनों ने इंग्लैंड की जीत में अहम रोल निभाया था। इस बार ये दोनों ही टीम में नहीं थे।”
– “साफ है कि इंग्लैंड टीम स्वान और पनेसर के बिना खेली और हार गई।”

नाकाम रहे इंग्लैंड के बॉलर्स

– ‘द इंडिपेंडेंट’ में इंग्लैंड के फास्ट बॉलर रहे डेरेक प्रिंगल ने लिखा, ‘भारत का पूरी सीरीज में पहली इनिंग में एवरेज 550 रन का रहा। वहीं पिचों से स्पिनर्स को काफी मदद मिली।’
– ‘मुंबई में विराट, विशाखापट्टनम में मुरली विजय का कैच छोड़ने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। इंग्लैंड में पूरी सीरीज में 20 अहम मौके गंवाए। वहीं भारत के बॉलर्स ने मौकों पर विकेट निकालकर मैच का रुख बदल दिया।’
– ‘इंग्लैंड के बॉलर्स के नाकाम होने की वजह कन्फ्यूजन, गलत रणनीति और लगातार अटैक न कर पाना रहा। राजकोट टेस्ट में उन्होंने रिवर्स स्विंग दिखाई थी लेकिन बाद के टेस्ट में वह भी गायब दिखी।’
– ‘इंग्लैंड के स्पिनर्स भारत में बहुत कमाल नहीं दिखा पाए। लेकिन 4 साल पहले स्वान और पनेसर ने मुंबई भारत को पस्त कर दिया था। इस बार कुक की स्ट्रैटजी साफ नजर नहीं आई। इस बार उनके स्पिनर्स न तो बॉल पर कंट्रोल रख पाए और न ही भारतीय बेट्समैन को गलती करने पर मजबूर कर पाए।’

19 साल के हसीब ने समझी जिम्मेदारी
– अंग्रेजी अखबार में ये भी लिखा गया, “सीरीज में इंग्लिश टीम के जिस खिलाड़ी ने जिम्मेदारी समझी, वो 19 साल का हसीब हमीद है। उसने तीसरे टेस्ट में जेम्स एंडरसन के साथ अच्छी पार्टनरशिप की।”
– “सीरीज के बुरी तरह हारने पर एलिस्टर कुक की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि उनकी रणनीति किसी काम नहीं आई।”
– “इस बीच मैनेजमेंट का भरोसा जो रूट पर बढ़ा है। उनके पास कप्तानी का एक्सपीरियंस कम है और वो जिम्मेदारी उठाने को तैयार भी नहीं हैं। ऐसे में, इंग्लैंड के मौजूदा बेस्ट बेट्समैन को नजरअंदाज करने की रिस्क क्यों ली जा रही है?”
– “भारत में इंग्लिश टीम की कप्तानी काफी खराब रही। चौथे और पांचवें टेस्ट में इनिंग से हार मिली। दोनों बार 400 का आंकड़ा छूकर टीम हार गई। ये सवाल खड़े करता है।”
– इंग्लैंड की बॉलिंग भी काफी खराब रही। कुक कहते हैं, “मैं अपने किसी भी बॉलर, मोइन हों या राशिद, इनकी बेइज्जती नहीं करना चाहता। लेकिन भारतीय पिचों पर अश्विन और जडेजा ने कहर बरपाया। किसी के खिलाफ खराब नहीं लिखा जाना चाहिए। मैं ये भी मानता हूं कि भारत के पास हमसे बेहतर स्पिनर्स थे।”

आखिरी टेस्ट मैच और सीरीज में बने ये बड़े रिकॉर्ड

1# 22 टेस्ट में कप्तानी कर धोनी को पीछे छोड़ा
– चेन्नई टेस्ट से पहले विराट और धोनी के बीच शुरुआती 21 मैच में कप्तानी का एक जैसा रिकॉर्ड था। दोनों को शुरुआती 21 में से 13 टेस्ट में जीत हासिल हुई थी। दो मैच हारे और बाकी 6 टेस्ट ड्रॉ रहे।
– हालांकि, चेन्नई टेस्ट जीतकर विराट ने शुरुआती 22 मैचों में कप्तानी के मामले में धोनी को पीछे छोड़ा। वे अब तक 14 टेस्ट जीत चुके हैं।
– दरअसल, धोनी की कप्तानी में भारत 22वां टेस्ट हार गया था। यह टेस्ट साउथ अफ्रीका के खिलाफ दिसंबर 2010 में सेन्चुरियन में खेला गया था। भारत को एक पारी और 25 रन से हार मिली थी।

2# लगातार 18 टेस्ट नहीं हारने का रिकॉर्ड
(a) कोहली :अगस्त 2015 से दिसंबर 2016 के बीच कोहली की कप्तानी में इंडिया लगातार 18 टेस्ट नहीं हारी। इनमें 14 टेस्ट जीते और 4 ड्रॉ रहे। कोहली का सक्सेस रेट 77% है।
(b) कपिल :सितंबर 1985 से मार्च 1987 के बीच कपिल देव की कप्तानी में भारत लगातार 17 टेस्ट नहीं हारा। हालांकि, इसमें 13 टेस्ट ड्रॉ थे और 4 मैच जीते थे। हालांकि, कपिल का सक्सेस रेट 24% रहा।

3# कोहली बने इस साल के टॉप स्कोरर, जो रूट को पीछे छोड़ा
– कोहली इस साल तीनों फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बैट्समैन बन गए हैं।
– 8 साल बाद भारत से कोई बैट्समैन टॉप स्कोरर बना है। 2008 में सहवाग थे, उनके 2355 रन थे।
– कोहली ने इस साल 2595 रन बनाए हैं। तीनों फॉर्मेट में उन्होंने 37 मैच खेले हैं। 7 सेन्चुरी लगाई हैं। 13 हाफ सेन्चुरी हैं। हाइएस्ट स्कोर 235 का है।
– कोहली के बाद दूसरे नंबर पर हैं इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट। उन्होंने 41 मैच खेलकर 2570 रन बनाए हैं।

4# कोहली ने अजहर के 16 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी की
– जितने टेस्ट अजहर ने 9 साल में जीते, उतने टेस्ट में कोहली ने 2 साल में जीत दिलाई।
– अजहर 1990 से 1999 के बीच कप्तान थे। उन्होंने 47 टेस्ट में कप्तानी की। 14 टेस्ट जीते। 14 हारे।
– कोहली दो साल से टेस्ट में कप्तानी कर रहे हैं। लेकिन इतने कम वक्त में वे 14 टेस्ट जीत चुके हैं।

Courtesy: Bhaskar

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