पी वी नरसिम्हा राव की डाली नींव पर महल बना रहे मोदी?

पी वी नरसिम्हा राव की डाली नींव पर महल बना रहे मोदी?

पी वी नरसिम्हा राव ने जब इंडियन इकॉनमी के दरवाजे खोलने शुरू किए थे, तो गठबंधन की राजनीति और उनकी पार्टी के कई लोगों ने रोड़े अटकाए थे। राव के कदमों ने उद्यमिता की जो लहर पैदा की थी, उनका असर नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं तक में दिख रहा है। मनमोहन सिंह सरकार ने डिजिटल टेक्नॉलजी और लोगों के लिए यूनीक आइडेंटिफिकेशन की दिशा में कदम बढ़ाए थे और मोदी सरकार ने इस आइडिया को तेज रफ्तार दी है। अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, जन धन खातों, अटल पेंशन योजना या किसानों के लिए बीमा कवरेज के विस्तार में टेक्नॉलजी का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल हो रहा है।

अर्थशास्त्री और आरबीआई बोर्ड की मेंबर रहीं इंदिरा राजारमन ने कहा, ‘यूपीए ने जो शुरू किया था, मोदी सरकार उसे आगे ले जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘इस सरकार ने फाइनैंशल इन्क्लूजन, एलपीजी और जन धन खातों के जरिए बीमा और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर को बढ़ावा दिया है। स्वच्छ भारत जैसी कुछ योजनाएं बिखर गई हैं, लेकिन जन धन से जुड़ी योजनाओं का प्रदर्शन अच्छा रहा है।’

साल 2015-16 में बीमा इंडस्ट्री ने पर्सनल ऐक्सिडेंट इंश्योरेंस के तहत 44.73 करोड़ लोगों को कवर किया था, जिनमें 25.75 करोड़ लोग प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत कवर्ड थे। सालाना 330 रुपये के प्रीमियम पर 2 लाख रुपये तक का लाइफ कवर देने वाली जीवन ज्योति बीमा योजना भी तेजी से बढ़ रही है। पिछले दो वषों में तीन करोड़ लोगों ने बीमा पॉलिसियां खरीदी हैं। इसी तरह 12 रुपये सालाना के कवर पर 2 लाख रुपये तक के पर्सनल ऐक्सिडेंट कवर को लेने वालों की संख्या 3.07 करोड़ हो चुकी है। 2015 में जब यह शुरू हुई थी तो उस साल 1.92 करोड़ लोगों ने यह कवर लिया था।

एलआईसी के पूर्व चेयरमैन एस बी माथुर ने कहा, ‘सोशल सिक्यॉरिटी नेट के तहत लोगों को कवर मुहैया कराने का यह संगठित प्रयास है। प्योर रिस्क कवर को कभी भी इस तरह लोकप्रिय बनाने का कदम नहीं उठाया गया था।’ आजीविका पर बीमा से भी खेती-बाड़ी पर निर्भर देश की लगभग आधी आबादी के जीवन पर फर्क पड़ रहा है। सरकार के सपॉर्ट से फार्म इंश्योरेंस में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है। नैशनल ऐग्रि इंश्योरेंस स्कीम के तहत खरीफ फसलों की कवरेज तेजी से बढ़ी है। 2012 के खरीफ सीजन में लगभग 1.06 करोड़ किसानों को 27.199 करोड़ रुपये के सम एश्योर्ड के साथ कवर किया गया था।

इंडियन काउंसिल ऑफ फूड ऐंड ऐग्रिकल्चर के आंकड़े बताते हैं कि खरीफ सीजन 2015 में यह संख्या लगभग दोगुनी होकर 2 करोड़ किसानों तक पहुंच गई और सम एश्योर्ड था 51,848 करोड़ रुपये। इनमें से कई कदम आधार यानी यूनीक आइडेंटिफिकेशन स्कीम में तेजी लाए बगैर नहीं उठाए जा सकते थे। अनुमान है कि देश की 92% आबादी को आधार कार्ड दे दिए गए हैं।

आदित्य बिड़ला ग्रुप के चीफ इकॉनमिस्ट अजित रानाडे ने कहा, ‘भारत में 90% वर्कफोर्स असंगठित क्षेत्र में है और उसे पेंशन, मेडिकल लाइफ या अनएंप्लॉयमेंट इंश्योरेंस जैसी सोशल सिक्यॉरिटी नहीं मिलती है। विकसित देश बनने की ओर भारत बढ़ रहा है। ऐसे में हमें गरीबों, बेरोजगारों, बूढ़ों और डिजएबल्ड लोगों को ज्यादा सोशल सिक्यॉरिटी मुहैया करानी होगी।’ एचडीएफसी बैंक के इकॉनमिस्ट अभीक बरुआ ने कहा, ‘भारत कैपिटलिज्म के यूरोपियन मॉडल के करीब जा रहा है। सरकार ने सोशल सिक्यॉरिटी नेट बढ़ाने का कदम उठाया है। विकास के इस चरण में कल्याणकारी योजनाओं की रफ्तार बढ़ाना जरूरी है।’

Courtesy: NBT

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