पत्नी समेत मंच पर थिरके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

पत्नी समेत मंच पर थिरके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी पत्‍नी साधना सिंह के साथ एक समारोह में थिरकते नजर आए। भोपाल के कोलार में एक सप्‍ताह तक चलने वाले श्रीमद भागवत कथा समारोह का आयोजन किया गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पत्नी समेत श्रीमद भागवत कथा सुनी। दरअसल, गुरुवार की रात श्रीमद भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि का विवाह प्रसंग विशेष था। रुक्मणि विवाह की मंच पर सजीव झांकी पेश की गई थी। आचार्यश्री ने मंत्रोच्चार के साथ ‘रुक्मणि-कृष्ण’ का विवाह सम्पन्न कराया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह ने विवाह से जुड़ी सारी रस्में निभाईं। चौहान ने कहा कि कथा के जिस आनंद को मैं यहां देख रहा हूं, ऐसी ही जनता को अपने जीवन में अनूभूति हो इसीलिए आनंद विभाग बनाया है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने श्रद्धालु बहनों को अगले साल से एक राखी पेड़ों को बाँधने का संकल्प दिलाया। उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि नदियों को बचाने के लिये पर्यावरण की सुरक्षा जरूरी है। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जनता की प्रसन्नता और आनंद के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग हैं – ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग और कर्म मार्ग। उन्होंने कहा कि नर्मदा की कृपा से प्रदेश में समृद्धि आई है, इसलिए नर्मदा की सेवा करना जरुरी है । नर्मदा को शुद्ध रखने के लिए नर्मदा सेवा यात्रा चल रही है। उन्होंने कोलारवासियों को नदियों की सेवा यात्रा से जुड़ने और नशे से दूर रहने का संकल्प दिलाया।

कथावाचक एवं वेद मर्मज्ञ मृदुल कृष्ण शास्त्री महाराज ने मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी, कन्या विवाह योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना और नर्मदा सेवा यात्रा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नदियों को पवित्र और शुद्ध रखने के लिये सभी श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया गया है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री चौहान के मार्गदर्शन में कोलार के हर घर को पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश आज तेजी से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

कथा में मृदुलजी ने इंद्र अभिमान भंग, महारास, कंस वध, उद्धव चरित्र, रुक्मणि मंगल की कथा का वर्णन किया।  उन्होंने कहा कि जो जीव को परमात्मा से मिला दे वही ‘महारास’ है। जहां एक रस अनेक रसों में प्रकट हुआ हो उसे कहते हैं महारास। जो हमें भगवान में लीन करे, उसे कहते हैं लीला। भक्ति में आनंद की प्रधानता होती है।

Courtesy:Jansatta 
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