आज अखिलेश-मुलायम के बीच है ‘साइकिल’ पर कब्जे की लड़ाई, दिल्ली पहुंचे अमर सिंह

आज अखिलेश-मुलायम के बीच है ‘साइकिल’ पर कब्जे की लड़ाई, दिल्ली पहुंचे अमर सिंह

लखनऊ/नई दिल्ली : समाजवादी पार्टी पूरी तरह से टूट की कगार पर है. पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल पर मुलायम सिंह और उनके बेटे दोनों दावा कर रहे हैं. मामला चुनाव आयोग पहुंच रहा है. दोनों पक्ष आज चुनाव आयोग में अपना दावा पेश कर सकते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि साइकिल की सवारी कौन करेगा, मुलायम या उनके बेटे अखिलेश.

LIVE UPDATES:

  • चुनाव आयोग ने मुलायम सिंह यादव को मिलने के लिए 4.30 बजे का वक्त दिया
  • शिवपाल यादव ने कहा- मुलायम सिंह यादव अब भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और रहेंगे। मैं अपनी अंतिम सांस तक नेताजी के साथ रहूंगा.  छलका शिवपाल यादव का दर्द, गाया- ‘कसमें, वादे, प्यार, वफा सब बातें हैं..’
  • अमर सिंह दिल्ली पहुंचे चुके हैं और सपा में हो रहे झगड़े पर कहा है- मैं मुलायम जी के साथ था, हूं और रहूंगा. मुलायम सिंह जी ने एक बार कहा था कि अमर सिंह दिल में है, दल में नहीं. अगर मुलायम सिंह जी ने अपने दिल से मुझे निष्काषित कर दें तो मेरे लिए खेद का विषय है और दल का मेरे लिए महत्व नहीं
  • मुलायम सिंह और अमर सिंह दोपहर दो बजे चुनाव आयोग के ऑफिस पहुंचेंगे. लखनऊ एयरपोर्ट पर मुलायम ने कहा- सपा का चुनाव चिह्न मेरा है और वो मेरी दस्तखत पर है.
  • मुलायम सिंह यादव और  अखिलेश यादव ग्रुप ने चुनाव आयोग से मिलने का समय माँगा. दोनों पक्ष समाजवादी पार्टी और चुनाव चिन्ह पर करेंगे दावा. थोड़ी देर में दोनों पक्षों को चुनाव आयोग से मुलाक़ात का समय मिल सकता है.
  • कल रात हाई ब्लड प्रेशर के बाद मुलायम सिंह का हेल्थ चेकअप हुआ था. आज खुद मुलायम सिंह ने एबीपी न्यूज़ से कहा– मैं बीमार नहीं हूं. बिल्कुल स्वस्थ हूं. मीडिया ने हमेशा मेरा साथ दिया है, मैंने कोई भ्रष्टाचार या गलत काम नहीं किया है. इल्जाम लगा भी तो सुप्रीम कोर्ट ने मुझे बरी कर दिया
    • चुनाव आयोग में अपना दावा पेश करने के लिए मुलायम सिंह यादव कुछ आज दिल्ली जाएंगे. शिवपाल यादव पहले ही दिल्ली रवाना हो चुके हैं.
    • यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खान ने कहा- वो एक बार फिर मुलायम सिंह और अखिलेश यादव के बीच सुलह कराने की कोशिश करेंगे.
    • अखिलेश खेमे के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा- अमर सिंह और शिवपाल ने नेताजी पर कब्जा कर लिया है. नेता जी समझ नहीं रहे हैं.

    पांच जनवरी को होने वाला अधिवेशन स्थगित

    इसी बीच मुलायम सिंह ने पांच जनवरी को होने वाला अधिवेशन स्थगित कर दिया है. शिवपाल यादव ने ट्वीट कर ये जानकारी दी है. शिवपाल यादव ने ट्विटर पर लिखा है, ‘नेताजी के आदेशानुसार समाजवादी पार्टी का 5 जनवरी का अधिवेशन फिलहाल स्थगित किया जाता है. सभी नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र मेँ चुनाव की तैयारियोँ मेँ जुटे और जीत हासिल करने के लिए जी-जान से मेहनत करेँ.’

     

    पार्टी को सत्ता की मंजिल तक पहुंचाने में साइकिल ने बड़ी भूमिका निभाई है

    समाजवादी पार्टी को सत्ता की मंजिल तक पहुंचाने में साइकिल ने बड़ी भूमिका निभाई है. कभी साइकिल पर सवार होकर मुलायम सिंह यादव यूपी की सत्ता के शिखर तक पहुंचे तो अखिलेश को भी इसी साइकिल ने सीएम की कुर्सी तक पहुंचाया. अब समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल पर बाप और बेटे के बीच संग्राम छिड़ गया है.

    समाजवादी पार्टी के दो भाग में बंट जाने के बाद अब इस बात की लड़ाई हो रही है कि इस साइकिल की सवारी कौन करेगा. पार्टी में टूट के बाद साइकिल पर कब्जे की लड़ाई अब चुनाव आयोग तक जा पहुंची है. मुलायम सिंह यादव ने चुनाव आयोग को रविवार को हुए अधिवेशन के अवैध और असंवैधानिक होने की जानकारी दी है.

    मुलायम ने कहा है कि अधिवेशन में लिए गए फैसले मान्य नहीं होंगे. मुलायम, शिवपाल और अमर सिंह बैठक करने के बाद चुनाव आयोग में अपना पक्ष रख सकते हैं. अमर सिंह लंदन से दिल्ली आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार अखिलेश यादव गुट आज चुनाव आयोग में राष्ट्रीय अधिवेशन की जानकारी और पार्टी में हुए बदलावों के बारे में बताएगा.

    आशंका जताई जा रही कि विधानसभा चुनाव से पहले उस पर रोक लग सकती है!

    इसके साथ ही अखिलेश गुट पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा पेश करेगा. एसपी के चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ पर अपना-अपना दावा करने के चलते आशंका जताई जा रही कि विधानसभा चुनाव से पहले उस पर रोक लग सकती है. हालांकि माना जा रहा है कि अखिलेश वाले धड़े को चुनाव चिन्ह पर दावा करने के लिए चुनाव आयोग के पास जाना होगा.

    रिकार्ड में मुलायम सिंह यादव और दूसरे पदाधिकारियों का नाम दर्ज हैं

    ऐसा इसलिए क्योंकि आयोग के रिकार्ड में मुलायम सिंह यादव और दूसरे पदाधिकारियों का नाम दर्ज है. यदि समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल पर अखिलेश दावा करते हैं, तो ऐसी स्थिति में आयोग को दूसरे पक्ष को नोटिस देना होगा और इस पर फैसला करने से पहले दोनों पक्षों को सुनना होगा.

    फैसले पर नहीं पहुंच पाता है तो वह इस पर रोक लगा सकता है

    माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति में यदि चुनाव आयोग किसी एक पक्ष को चिन्ह देने के फैसले पर नहीं पहुंच पाता है तो वह इस पर रोक लगा सकता है. ताकि चुनावों के दौरान किसी पक्ष को अतिरिक्त लाभ ना हो. बहरहाल कुनबे की कलह अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है. अब देखना यह है कि आगे क्या फैसला होता है.

    Courtesy: ABP

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