विधानसभा चुनाव 2017: बज गया बिगुल, SP को लेना होगा आरपार का फैसला

विधानसभा चुनाव 2017: बज गया बिगुल, SP को लेना होगा आरपार का फैसला

नई दिल्ली  राज्य विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी पर कुनबे की कलह को खत्म करने का दबाव बढ़ गया है। चुनावी चुनौती में बने रहने के लिए पार्टी के दोनों धड़ों को आरपार का फैसला लेना होगा। दोनों पक्षों की ओर से चुनाव आयोग में अपनी लड़ाई को मजबूती से लड़ने की प्रक्रिया जरूर तेज हो गई है। लेकिन दोनों गुटों को आयोग के फैसले इंतजार है। जबकि आयोग ने कहा है ‘उचित समय उचित फैसला लिया जाएगा।’

सपा में अंदरुनी कलह

उत्तर प्रदेश में सपा के मुकाबले अन्य प्रतिद्वंद्वी दलों की तैयारियां तेज हो गई है, जबकि समाजवादी पार्टी अपनी अंदरुनी कलह से नहीं उबर पाई है। आयोग के बाहर समाजवादी पार्टी में मुलायम व अखिलेश गुट के बीच समझौता कराने की कोशिशें अभी तक बंद नहीं हुई हैं। लेकिन इससे समाजवादी पार्टी के समर्थकों में असमंजस और गहरायेगा। इसी के मद्देनजर अखिलेश गुट के प्रमुख नेता प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने आयोग के फैसले पर जताया भरोसा। उनका कहना है कि आयोग के फैसले के तत्काल बाद पार्टी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी। इसमें कोई देर नहीं होगी।

चुनाव आयोग जल्द लेगा फैसला

समाजवादी पार्टी के भीतर मचे घमासान और उस आयोग की राय के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कहा ‘दोनों गुटों की ओर से प्रत्यावेदन प्राप्त हो चुका है। सोमवार को पहले मुलायम सिंह आये और मंगलवार को अखिलेश यादव गुट की ओर से रामगोपाल यादव आये थे।’ उन्होंने विस्तार से अपने पक्ष में दस्तावेजी सबूत पेश किया। जैदी ने कहा ‘चुनाव आयोग निर्धारित प्रक्रिया को अपनाएगा और उचित समय पर उचित निर्णय लेगा।’

 

दोनों धड़ों के समर्थकों के बीच खबर लिखे जाने तक न कोई सुलह हो सकी थी और न ही होने की संभावना है। प्रोफेसर रामगोपाल ने दो टूक कहा कि किसी तरह का कोई समझौता नहीं होने जा रहा है। नेताजी के कैंप से लगातार अफवाहें उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सपा के 90 फीसद कार्यकर्ता व नेता हमारे साथ हैं। इसलिए असली समाजवादी पार्टी ‘हम’ हैं।

Courtesy: Jagran.com

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