राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ने को राजी नहीं अखिलेश गुट, समझौते के प्रयास जारी

राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ने को राजी नहीं अखिलेश गुट, समझौते के प्रयास जारी

लखनऊ  समाजवादी कुनबे में सुलह-सफाई का दौर पूरे दिन चलता रहा लेकिन अखिलेश यादव को समर्थन देने वाले 212 विधायक, 56 एमएलसी और 15 सांसदों का समूह अखिलेश को सपा मुखिया मान चुका है। वैसे तो शिवपाल, आजम, अमर सिंह सुबह से शाम तक मुलायम के घर आते-जाते रहे।

मुख्यमंत्री जिस अमर सिंह को बखेड़े की जड़ मानते हैं, उन्होंने आज सपा संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह से तीन बार मुलाकात की। फिर कहा कि वह पिता-पुत्र की एकता के पक्षधर हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी पहुंचे और सुबह शिवपाल भी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पहुंचे मगर पेंच नहीं सुलझे। अखिलेश समर्थक उनके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से कम पर अब कतई राजी नहीं हैं। हालांकि एका प्रयासों में लगे नेताओं को सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।

विवाद के एक केंद्र अमर सिंह और उन्हीं के साथ पूर्व मंत्री शिवपाल यादव ने अपने सभी पद छोडऩे की पेशकश भी मुलायम सिंह से कर दी। सुलह के लिए प्रयासरत आजम खां भी अधिकतर बिंदुओं पर सहमत हो गये। मुलायम की ओर से शाम चार बजे प्रेस कांफ्रेंस की सूचना दी गई लेकिन, इस बीच आजम को मुख्यमंत्री कैम्प से संकेत मिला कि उनके समर्थक नहीं चाहते कि अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अब छोड़ें। वह इस पद पर काम करने के लिए तीन माह चाहते हैं। यह सुनकर आजम तत्काल मुलायम के घर पहुंचे और उसके बाद प्रेस कांफ्रेंस रद हो गई। देर रात तक आजम, मुलायम, शिवपाल और कुछ दूसरे नेताओं के बीच मंथन चलता रहा। मीटिंग में शामिल लोगों की ओर से संकेत दिया जाता रहा कि सब कुछ ठीक होने के करीब पहुंच गया है, मगर परिणाम न निकला।

किनका प्रयास बेकार

राजद प्रमुख लालू यादव ने झगड़ा सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन, नाकाम रहे।

पश्चिमी उप्र के एक इस्लामिक इदारे के उलमा भी नाकाम रहे।

केंद्र में सत्तासीन दल के एक प्रभावशाली नेता ने दो चक्रों में प्रयास किया। मुलायम नरम भी हुए, मगर बात नहीं बनी।

मंत्री आजम ने कई चरणों में प्रयास किया। मुलायम ने कुछ बातें मानीं भी मगर वह अमर सिंह को एकदम से निकाले पर राजी नहीं।

सैफई परिवार के सदस्यों ने दखल दिया, दोनों पक्षों का रुख नरम हुआ मगर परिणाम नहीं आया।

शपथ पत्र की भाषा

अंग्रेजी में भराया गया शपथ पत्र भारत निर्वाचन आयोग, निर्वाचन सदन अशोक रोड दिल्ली को संबोधित है। जिसकी शुरूआत मैं, उम्र…, पुत्र या पत्नी…निवासी से की हुई है। फिर चार बिन्दुओं का पहला बिन्दु कुछ यूं शुरू होता है-

मैं, सत्यनिष्ठा से शपथ पूर्वक कहता हूं कि मैं, समाजवादी पार्टी का सदस्य हूं।

मैने समाजवादी पार्टी का विशेष अधिवेशन बुलाने की मांग की थी।

मैं, उस अधिवेशन का साक्षी था जिसे समाजवादी पार्टी का विशेष अधिवेशन कहा जा रहा है।

एक जनवरी को हुए इस विशेष अधिवेशन में सामूहिक रूप से हाथ उठाकर व आवाज लगाकर अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। मैं, साक्षी के रूप में यहां मौजूद था। अखिलेश यादव को अध्यक्ष चुने जाने के प्रस्ताव का मैंने समर्थन किया।

किन लोगों ने शपथ पत्र भरे

सपा के 229 में से 212 विधायकों, कांग्र्रेस के दो विधायकों ने हस्ताक्षर किये हैं।

विधान परिषद में 68 में से सपा के 56 सदस्यों ने शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं।

राज्यसभा व लोकसभा में सपा के 24 सदस्यों में से 15 ने हस्ताक्षर किये हैं।

अखिलेश खेमे के मुताबि सपा के पांच हजार डेलीगेट्स (प्रतिनिधियों ) का समर्थन उसे हासिल है।

Courtesy: Jagran.com

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