मोदी राज में 1 फीसदी लोग 58 फीसदी  दौलत जमा कर रखे है-ये काला  धन नहीं तो  क्या है?

मोदी राज में 1 फीसदी लोग 58 फीसदी  दौलत जमा कर रखे है-ये काला  धन नहीं तो  क्या है?

 

 

भारत वर्ष के 57 परिवार देश के 70 फीसदी  दौलत के मालिक है| आज सुबह जब ऑक्सफेम ने ये रिपोर्ट जारी की तो सभी भौचक्के रह गए| एक तरफ मोदी सरकार नोटबंदी कर काले धन कम करने का ढिढोरा पीट रहा, लेकिन दूसरी  तरफ उनकी नाक के नीचे, गिने चुने आमिर पिछले ३ साल में अपनी अपनी तिजौरी भर रहे है| नमूने के तौर पर- भारत में एक बरी IT कंपनी के सीईओ 416 गुना ज्यादा  तनख्वा  ले रहा है अपने ही कंपनी में एक मेनेजर की तनख्वा से| इससे  भी ज़्यादा  चौकाने की बात है – भारत में अकेले  10 फीसदी अमीर, देश की 80 फीसदी दौलत के मालिक है| यदि हम थोड़ा और तह तक  जाये तो देखेगे की इस 10 फीसदी का 1 फीसदी 58 फीसदी दौलत के मालिक है|

ऑक्सफेम के सर्वे  के अनुसार  1988  से लेकर 2011   तक भारत में दौलत के बटवारे में खाई  बढ़ी है| अमीर और अमीर  हो गए और जो गरीब है वो और गरीब हो गए| इन बीते सालो में 10  फीसदी गरीब  की कमाई  2000  रूपये से बढ़, तक़रीबन १ फीसदी से हर साल| लेकिन इन्ही सालो में सबसे अमीर 10 फीसदी अमीर  की कमाई, 25 फीसदी  सालाना औसत से  40000 रूपये से बढ़ी|

अब सवाल ये उठता है की ये खाई  क्यों बढ़ती जा रही है| अमीर  का पैसा तो बढ़ रहा लेकिन सरकार का टैक्स कम होता जा रहा है| सवाल ये उठता है अमीर कैसे और अमीर  होते जा रहे है और गरीब और गरीब | मुख्यतः इसके दो कारण  है- नेता और आमिर लोगो की मिली भगत  और सरती हुई संस्थाए | इस देश में आप यदि अमीर  है तो आप किसी न किसी नेता से ज़रूर जुड़े होंगे| क्योंकि आकूत पैसा ईमानदारी से नहीं कमाया जा सकता है| दूसरी तरफ यदि आप अमीर  है तो संस्थाए आपके लिए अलग नियम रखेगी और गरीब के लिए अलग| नमूने के तौर पर- आप 100 करोड़ का लोन ले बैंक से , तो आप बैंक पे मेहरबानी करते है| आपको लोन समय पे नहीं देने के बाद, मिन्नत किया जायेगा की आप दे दे दे| यदि समय पे नहीं दे पा रहे तो बैंक आपके लोन के समय में बदलाव ला देगी, फिर भी आप नहीं देते तो आपके लोन को अपनी बही खाते  से हमेसा के लिए हटा देगी |

अब अगर आप एक गरीब किसान है और 5 लाख का के.सी.सी ले रखे है तो क्या मज़ाल आपको बिना मेनेजर साहेब को 10  फीसदी घूस दिए मिल जाए , यदि मिल गया तो भगवान का शुक्र है, इसके बाद वापसी वक़्त पूरा  होने पर आप भारतीय बैंकिंग सेवा की मुस्तैदी देख कर भौचक्के रह जाएंगे| बैंक चिट्ठी पे चिट्ठी, बाद में गुंडे   भी धमकाने  के लिए  आएंगे | और यदि इन सबसे बात नहीं बनी  तब तो कोर्ट कचहरी का ऐसा झमेला लगाया जाता की नानी याद आ जाये| हां एक बात और, इन सबके बीच बैंक का दर सूद का हिसाब घरी की सुई की तरह बिना रुके चलता रहता |

भारत में बढ़ती  हुई खाई एक विनाश की तरफ समाज को ले जा रहा है| राजनेता जो 5  साल में एक बार गरीब के वोट से चुन कर आते वो अगले 5  साल  1 फीसदी अमीर के लिए काम करते है| नोटबंदी  जैसा भद्दा मज़ाक, नेता जनता के आँख में धुल डालने के लिए करते है| अक्सर राष्ट्रीय सत्तर का नेता, भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड की विवेचना करता है| कैसे भारत नवयुवको का देश है और भविष्य उज्जवल है| मुश्किल ये है ये नवयुवक बारूद का ढेर बन रहा है| जिस दिन इसमें आग लगी ये सबको जल के रख कर देगा | इन नवयुवको के पास सपने है लेकिन सपने साकार करने के माध्यम नहीं| इनके पास  डिग्री है नौकरी नहीं | सोच है लेकिन पहुच नहीं | ये जल्दी में है ये रुकेगा नहीं, यदि जल्द ही व्यवस्था में तव्दील नहीं आयी तो ये आने वाले तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी है|

मोदी सरकार  यदि सच में  कुछ करना चाहती है तो इंस्टीट्यूशन्स को मजबूत करे| आज ३ साल होने को है लेकिन आजतक मोदी सर्कार ने लोकपाल की नियुक्ति नहीं की | जिस तरह से नोटबंदी के बाद रिज़र्व बैंक की दुर्दशा हुई है उससे किसी भी यक्ति का रुपया पे से भरोसा उठेगा| समय रहते हुए यदि भारत और इंडिया की खायी को भरा नहीं गया तो हम विनाश के बहुत निकट  है|

 

अबिनाश चौधरी – ये लेखक के निजी  विचार है|

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