गुजरात क्रिकेट असोसिएशन के पास नहीं है चैंपियंस का स्वागत करने का भी वक्त

गुजरात क्रिकेट असोसिएशन के पास नहीं है चैंपियंस का स्वागत करने का भी वक्त

अहमदाबाद
गुजरात ने इस साल रणजी ट्रोफी जीतकर इतिहास रच दिया। वर्ष 1934 से खेले जा रहे इस प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नमेंट में पहली बार गुजरात विजेता बनी। ऐसे में जब यह टीम घर पहुंची तो उसे बड़े स्वागत की उम्मीद करना बेमानी नहीं है। टीम ने न केवल राज्य के लिए खिताब जीता बल्कि फाइनल में 41 बार चैंपियन दिग्गज टीम मुंबई को हराया।

गुजरात के मुख्य कोच विजय पटेल ने सफर के दौरान ही हमारे सहयोगी अखबार अहमदाबाद मिरर को बताया, ‘मुंबई जैसी टीम को हराना हमारे लिए काफी मायने रखता है। वह चैंपियन टीम है और घरेलू क्रिकेट में उनका काफी दबदबा है।’ उन्होंने आगे बताया, ‘इसके साथ ही उनके खिलाफ हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है।’ इस शानदार जीत के बाद मिरर को यह देखकर काफी हैरानी हुई कि रविवार को जब टीम एयरपोर्ट पहुंची तो गुजरात क्रिकेट असोसिएशन का कोई अधिकारी उनका स्वागत करने के लिए वहां मौजूद नहीं था। टीम के स्वागत के लिए कुछ करीबी लोगों के अलावा चंद प्रशंसक फूल माला और गुलदस्तों के साथ मौजूद थे।

जीसीए के सचिव राजेश पटेल ने कहा, ‘मैं टीम के साथ नहीं आया लेकिन मैं अधिकारियों को टीम के आने की सूचना दे दी थी।’ उन्होंने कहा, ‘हमने सोमवार को टीम को सम्मानित करने का कार्यक्रम रखा है। जीसीए के अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही टीम की जीत पर 3 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा कर रखी है।

जब हमने अधिकारियों से इस बारे में बात करनी चाहिए तो उन्होंने केवल बहाने की बनाए। जीसीए के कोषाध्यक्ष धीरज जोगानी ने कहा कि उन्हें टीम के कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी। संयुक्त सचिव भारत दुधिया ने कहा कि उनकी उम्र बहुत ज्यादा है इसलिए इतनी सुबह जा पाने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे उपाध्यक्ष परिमल नाथवानी, सचिव राजेश पटेल और संयुक्त सचिव जय शाह टीम के साथ थे।’

जोगानी ने कहा कि मुझे इससे जुड़े किसी मुद्दे पर कोई जानकारी नहीं है। दुधिया ने कहा, ‘राजेशभाई ने मुझे टीम के आने की जानकारी दी थी लेकिन पिछले तीन दिन से मेरी तबीयत खराब है। साथ ही इस उम्र में मेरे लिए सर्दी की सुबह में बाहर जाना संभव नहीं।’ गुजरात टीम के कोच हितेश मजूमदार इस मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं देते। वह कहते हैं, ‘हमारे उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव इंदौर में मौजूद थे। हमने वहां अपनी जीत का जश्न मनाया। मुझे पात चला है कि असोसिएशन ने सोमवार को कार्यक्रम रखा है। इसके साथ ही हमें अपने परिवार से मिलने और वासी उत्तरायण का जश्न मनाने की भी जल्दी थी। तो मुझे नहीं लगता कि यह कोई बड़ी बात थी।’

इन तमाम बातों के बीच खेल से जुड़े लोग खिलाड़ियों के प्रति जीसीए के रवैये से खुश नहीं हैं। एक स्थानीय कोच दीपक रावत ने कहा, ‘मुझे यह जानकार काफी दुख हुआ कि जीसीए की ओर से कोई भी खिलाड़ियों के स्वागत के लिए मौजूद नहीं था। ये वे खिलाड़ी हैं जिन्होंने हमें इतना गर्व का अहसास कराया है। इससे पहले कोई दूसरी टीम खिताब को नहीं जीत पाई है। असोसिएशन को इन खिलाड़ियों का ख्याल रखना चाहिए था। वहीं एक अन्य कोच देवल लथिगरा ने भी अपनी नाराजगी जतायी।

लथिगरा ने कहा, ‘मुझे याद है कि जब अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने के बाद समित पटेल और रश कलारिया लौटे थे तब उनका शानदार स्वागत किया गया था। मुझे हैरानी है कि रविवार को वहां कोई मौजूद नहीं था। मुझे लगता है कि इस जीत का जश्न बड़ा होना चाहिए था। असोसिएशन के रवैये से मैं हैरान हूं।’

Courtesy: NBT

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