नरेंद्र मोदी जी! हंसना तो देश का हर आदमी होना चाहता है, पर आपके ये नेता हंसने दें तब ना?

नरेंद्र मोदी जी! हंसना तो देश का हर आदमी होना चाहता है, पर आपके ये नेता हंसने दें तब ना?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से जो कहते हैं और उनकी पार्टी के नेता सबके सामने जो करते हैं उसके बीच हमेशा एक फांक रही है। पीएम मोदी ने चुनाव से पहले कहा, विदेशों में जमा कालाधन वापस आ गया तो हर किसी के खाते में 15-15 लाख रुपये तक वापस आ सकते हैं तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष ने चुनाव जीतने के बाद कह दिया कि बैंक खातों में 15 लाख रुपये आने की बात चुनावी जुमला थी। पीएम मोदी ने आम चुनाव के प्रचार के दौरान और उसके बाद भी ‘अच्छे दिन’ आने का वादा किया लेकिन उनके मंत्रिमंडल में शामिल नितिन गडकरी ने ‘अच्छे दिन’ को गले में अटकी हड्डी बता दिया।

पीएम मोदी ने शनिवार (14 जनवरी) को तमिल पत्रिका ‘तुगलक’ के 47वें स्थापना दिवस पर दिए भाषण में सार्वजनिक जीवन में हास्य-व्यंग्य और विनोद की पैरवी करते हुए कहा, “हास्य विनोद तोड़ने के बजाय जोड़ता है और आज हमें इसी की जरूरत है। लोगों के बीच, समुदायों के बीच, समाजों के बीच सेतु बनाना।” आइए एक नजर डालते हैं कि ऐसे पांच बीजेपी नेताओं पर जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में ऐसे बयान दिए जिन्हें समाज को जोड़ने वाला मानना मुश्किल है और उन पर हंसना तो दूर की बात रही। ध्यान रहे पीएम मोदी पर सत्ता में आने के बाद से ही बेलगाम-बड़बोले बीजेपी नेताओं की सार्जवनिक आलोचना करने से बचने के आरोप लगते रहे हैं।

अनिज विज का मोदी ब्रांड- ये महज संयोग ही है कि जब पीएम मोदी हास्य-विनोद की वकालत कर रहे थे तो उस समय मीडिया और सोशल मीडिया में खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडरों पर महात्मा गांधी की जगह पीएम मोदी की तस्वीर के इस्तेमाल को लेकर विवाद हो रहा था। विवाद में दोनों पक्षों के अपने तर्क-वितर्क के बीच हरियाणा की भाजपा सरकार में मंत्री अनिल विज ने यह कहकर देश को “हंसाने” की कोशिश की कि जब से भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपने लगे ही तभी से उसका मूल्य गिर रहा है। विज इतने पर ही नहीं रुके उन्होंने पीएम मोदी को महात्मा गांधी से बड़ा “ब्रांड” बता दिया।

साक्षी महाराज की जनसंख्या ग्रंथि- भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सबसे पुरानी और गहरी ग्रंथियों में से एक है जनसंख्या ग्रंथि। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से लगााय भाजपा सांसद साक्षी महाराज के बयानों को देखकर यही लगता है कि है कि बीजेपी और संघ के नेता नियमित तौर पर गिनती करते रहते हैं कि देश में किसको कितने बच्चे पैदा हो रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि के बहाने अल्पसंख्यक विरोधी बयान देकर बीजेपी नेता विभिन्न समुदायों के बीच सेतु बनाने का काम करते हैं या तोड़ने का ये तो पीएम मोदी ही बेहतर जानते होंगे।

 

Courtesy:Jansatta

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