दागी कंपनी, ब्रिटिश नोट प्रिंटर पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, वित्त मंत्रालय ने दी सफाई

दागी कंपनी, ब्रिटिश नोट प्रिंटर पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, वित्त मंत्रालय ने दी सफाई

नई दिल्ली
केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने मंगलवार कहा कि वह काली सूची में डाली गई नोट छापने वाली ब्रिटिश कंपनी डे ला रू के साथ साझेदारी कर रही है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओमन चांडी ने कहा, ‘डे ला रू को भारत में प्लास्टिक के नोट छापने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है, जबकि यह कंपनी काली सूची में है। यह उच्चस्तर पर मिलीभगत को दिखाता है।’ इसपर वित्त मंत्रालय ने भी जवाब देते हुए कहा कि उक्त कंपनी 2010 तक नोटों की सप्लाई करती रही है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि मीडिया में इस तरह की खबरें आई हैं कि सरकार ने यूके की कंपनी के साथ नोट प्रिंटिंग के काम में राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता किया है। सफाई में आगे कहा गया कि 2013 में लिए गए एक निर्णय के मुताबिक ब्रिटिश कंपनी को दिसंबर 2015 तक नोटों के सिक्यॉरिटी फीचर्स की सप्लाई का आदेश मिला था।

वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि पिछले तीन सालों के दौरान सरकार की तरफ से इस कंपनी को कोई नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘इस कंपनी की सुरक्षा मंजूरी पर वित्त मंत्रालय की तरफ से रोक लगाई गई है और इस वजह से 2014 के बाद से इसे कोई नया आदेश नहीं दिया गया है।’ वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस कंपनी ने भारत में फैक्ट्री लगाने के लिए आवेदन किया था, पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

इससे पहले कांग्रेस ने मंगलवार को इस मसले पर केंद्र सरकार पर हमला किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता ओमन चांडी ने कहा, ‘साल 2011 में तत्कालीन वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा ने राज्यसभा में नोटों की छपाई की सुरक्षा से जुड़े एक सवाल के जबाव में कहा था कि अनुबंध में निर्धारित विनिर्देशों के पालन में असफल रहने के कारण डे ला रू को काली सूची में डाल दिया गया है।’

इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में चांडी ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से तीन कंपनियों को नोटों की छपाई के लिए चुने जाने की बात कहते हुए संबंधित मंत्रालय से उन कंपनियों की सूची प्रकाशित करने को कहा था, जिन्हें शॉर्टलिस्ट किया गया है या चुना गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश कंपनी को 2011 में सुरक्षा मंजूरी नहीं दी गई थी, इसलिए सरकार को वर्तमान में उठाए गए कदम का खुलासा करना चाहिए।

वहीं, ब्रिटिश कंपनी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए नौ दिसंबर को एक बयान जारी कर कहा था, ‘डे ला रू स्पष्ट रूप से भारतीय मीडिया में प्रकाशित अपने व्यापार के बारे में अपमानसूचक और दुर्भावनापूर्ण आरोपों का खंडन करती है।’ बयान में आगे कहा गया था, ‘डे ला रू भारतीय मुद्रा की छपाई के लिए कागज की आपूर्ति नहीं कर रही है और हम किसी भी रूप में वर्तमान में भारत में मुद्रा के मुद्रण से संबद्ध नहीं हैं। डे ला रू को न तो कोई नोटिस मिला है और न ही हम जानते हैं कि हमें भारत में काली सूची में डाला गया है।’

Courtesy: NBT

Categories: India

Related Articles