Election 2017: सीटों के मोलभाव में उलझा गठबंधन, नहीं जारी हो सकी सपा की सूची

लखनऊ परिवार की झंझट खत्म हुई तो समाजवादी पार्टी (सपा) का नेतृत्व गठबंधन के घटक दल कांग्रेस, रालोद के लिए सीटें छोडऩे पर उलझ गया है। आज प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होनी थी, मगर तीनों दल सीटों के मोलभाव में उलझे रहे। सपा कांग्रेस को 85 और रालोद को 20 से अधिक सीट नहीं देना चाहती है, जबकि दोनों दल अधिक सीटें चाहते हैं। अब नए सिरे से फार्मूला तैयार हो रहा है।

सपा-कांग्रेस गठबंधन बनाकर विधानसभा चुनाव में उतरेगी, कई दिनों से यह बात सामने आ रही थी। दो दिन पहले अखिलेश को साइकिल चिह्न मिलने के बाद कांग्रेस के उत्तर प्रदेश के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने अखिलेश के नेतृत्व में चुनाव लडऩे की बात स्वीकारी। शीला दीक्षित ने मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी छोडऩे की बात कही। सपा ने भी इस पर मुहर लगाते हुए जल्द प्रत्याशी घोषित करने का संकेत दिया।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने रणनीतिकारों के साथ दो दिनों तक अपने प्रत्याशियों, कांग्रेस व रालोद के लिए सीटें छोडऩे पर मंथन किया। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी की जीती हुई दस सीटों समेत तकरीबन सौ सीटें चाहती है और रालोद भी सपा की तीन जीती सीटों समेत 30 सीटें चाहती है, मगर सपा इसके लिए फिलहाल तैयार नहीं है। वह अमेठी, रायबरेली जिले की जीती हुई कुछ सीटें छोडऩे को तैयार है, मगर कांग्रेस के लिए 85-90 से अधिक सीटें छोडऩे को तैयार नहीं है। ऐसे ही सपा के साथ मिलकर चुनाव लडऩे को तैयार खड़ी रालोद ने पहले 30 सीटें मांगी, फिर घटकर 28 पर आ गई। वह जाट बहुल सिवालखास, खतौली, बुढ़ाना विधानसभा सीट भी अपने हिस्से में चाहती है। इनमें से दो सीटें सपा के पास हैं।

सूत्रों का कहना है कि सपा अपनी ये दोनों सीटें छोडऩे का मन तो बना रही है मगर वह रालोद को 20 से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 18 जनवरी की शाम गठबंधन, चुनाव बाद परिस्थितियों व भविष्य की उम्मीदों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, राज्यसभा सदस्य किरनमय नंदा, प्रो.राम गोपाल यादव व युवा टीम के सदस्यों को साथ लंबी चर्चा की। इसमें किन्ही कारणों से गठबंधन से किसी एक दल के बाहर होने की स्थिति पर भी बात होने की चर्चा है। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई।

कांग्रेस से लड़ा सकती सपा प्रत्याशी

मुख्यमंत्री के रणनीतिकारों में शुमार एक एमएलसी का कहना है कि कांग्रेस के लिए छोड़ी जा रही सीटों में से तकरीबन एक दर्जन पर समाजवादी पार्टी का नेतृत्व सुझाएगा। इसमें रायबरेली, बाराबंकी, अमेठी, हमीरपुर, लखनऊ व पश्चिमी यूपी के जिलों की सीटें है। इस एमएलसी का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व भी राजी है कि मुख्यमंत्री जिन लोगों का नाम देंगे, उन्हे कांग्रेस अपना सिंबल प्रदान कर देगी। ऐसे लोगों में मुलायम सिंह यादव की ओर से दी गई 38 लोगों की सूची के भी कुछ नाम हो सकते है।

सुरक्षित सीटों के विधायकों के कटेंगे टिकट

अखिलेश यादव व प्रो.राम गोपाल यादव के नेतृत्व में प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा के बाद सुरक्षित सीटों के आधा दर्जन विधायकों के टिकट काटने पर सहमति बनी है। सूत्रों का कहना है कि रामगोपाल ने सर्वे को आधार बनाकर सुरक्षित सीटों के 20 विधायकों का टिकट काटने का प्रस्ताव रखा था, मगर मुख्यमंत्री ने ज्यादातर को फिर मैदान में उतारने की बात कही, बावजूद इसके आधा दर्जन विधायकों का टिकट कटना तय है। इन विधायकों के स्थान पर अनुसूचित जाति के युवा चेहरों पर दांव लगाए जाने की संभावना है।

कांग्रेस नेताओं से फोन पर बात

काग्रेस की ओर से गठबंधन की पैरवी कर रहे गुलाम नबी आजाद व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच फोन पर चर्चा होने की बात भी कही जा रही है। बताया गया है कि पहले गुलाम नबी को लखनऊ आना था, मगर दिल्ली में होने वाली पार्टी की बैठक के चलते नहीं आ पाए। माना जा रहा है कि अगले कुछ घंटों के अंदर गठबंधन की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी हो सकती है।

नामांकन की तैयारी को कहा गया

पहले चरण की नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने और दूसरे चरण की अधिसूचना जारी होने का समय कम होने के चलते समाजवादी पार्टी की ओर से संभावित प्रत्याशियों की तैयारी करने का निर्देश दिया गया है। पहले चरण में जिन 73 सीटों पर मतदान होना है, वहां के तकरीबन दो दर्जन दावेदारों को पार्टी की ओर से फोन कर कहा गया कि वह अपने मुर्हूत के मुताबिक नामांकन करें, समय से फार्म ए व बी भेजा जाएगा। इसके अलावा कुछ दावेदारों को लखनऊ पहुंचने का भी निर्देश दिया गया है जिनकी गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात संभावित है।

Courtesy: Jagran.com

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