राहुल गाँधी का नाम सुनते ही क्यों आता है स्मृति ईरानी को गुस्सा?

राहुल गाँधी का नाम सुनते ही क्यों आता है स्मृति ईरानी को गुस्सा?

अभी हाल ही में भाजपा की पूर्व कार्यकर्ता की एक किताब “I am a Troll” सामने आयी है जिसमे लेखिका ने खुलासा किया है कि कैसे भाजपा ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया साइट्स पर अपनी आर्मी लगा रखी है। यह सोशल मीडिया के ट्रोलर्स अक्सर संगठित तरीके से विपक्ष के लोगों को अपना निशाना बनाते रहे हैं और धर्म, जाती और अन्य पहचान चिन्हों का इस्तेमाल कर देश में एक नफरत का माहौल बनाते रहें हैं। भाजपा इस खेल में अकेली नहीं हैं और भी पार्टिया इसका इस्तेमाल करती आयी है, पर भाजपा का यह पहलु ज़्यादा इसीलिए खटकता है क्योंकि भाजपा की सरकार सत्ता में है और अपनी ही सरकार सत्ता में होने के बाद देश में ऐसा माहौल बनाना समझ से बहार है कि यह किस देश-हित नीति का हिस्सा है?
अब इस बात की गहराई को समझने के लिए एक और उदाहरण सामने हैं जहाँ स्मृति ईरानी जो मोदी सरकार की मंत्री है वह खुद ट्विटर पर राहुल गाँधी को ट्रोल करते हुए पिछले कुछ दिनों में सामने आयी। इस तरह की नीतियां देश के मंत्री के द्वारा, पूरे देश के राजनीती के स्तर को नीचे गिरा देती है। देश प्रेम और देश भक्ति पर अक्सर नसीहत देने वाले भाजपा के मंत्री यह भूल जाते हैं कि ट्विटर जिससे प्लेटफार्म पर हो रही गहमागहमी पूरे देश की छवि अन्य देशों से सामने ख़राब कर देती है। एक तरफ भाजपा के दुसरे मंत्री हैं जैसे सुषमा स्वराज जो अपने काम से ट्विटर पर सुर्खियां बटोर रहे हैं और दुसरे तरफ ऐसे कुछ मंत्री हैं जिनका काम ही उनके मंत्रालय के फेर बदल का कारण बना और अभी भी वह विपक्ष को ट्रोल करने में लगे हैं।अक्सर ऐसा देखा गया है कि एक तरफ तो राहुल गाँधी को गंभीरता से न लेने का दावा भाजपा के लोग करते रहें है, पर दूसरी तरफ जैसे ही राहुल गाँधी का कोई बयान आता है, भाजपा के सारे बड़े बड़े मंत्री तक राहुल गाँधी पर हमला करने के लिए उत्तर जाते हैं। भाजपा के बर्ताव से लगता नहीं कि वह राहुल को हलके में लेते हैं। राहुल ने पिछले एक साल में खुद को एक बड़े नेता की तरह राजनीती में स्थापित किया है। राहुल ने काफी कड़े सवाल प्रधानमंत्री से सामने पिछले कुछ दिनों में रखे जिनसे प्रधानमंत्री बचते हुए नज़र आये।
पर सभी नेताओं की रंजिश एक तरफ है, और स्मृति ईरानी का गुस्सा राहुल गाँधी के लिए एक अलग ही स्तर पर है जो बार नार स्मृति के बर्ताव में झलकता है। ऐसा नहीं है कि एक मंत्री को अधिकार नहीं है किसी पर टिपण्णी करने का। मंत्री भी एक इंसान ही है जिसका पूरा अधिकार है गुस्सा प्रकट करने का, पर जिस तरह स्मृति ट्विटर पर या पहले भी अन्य मामलों में एक तरह से ट्रोल करती नज़र आयी हैं, ऐसा लगता है कि एक मंत्री के लिए अपना कद पूरे विष्व के सामने इतना गिराना थोड़ा अटपटा है। पर फिर भी यह सब करने का उनका अपना अधिकार है और उनका निजी फैसला है।
स्मृति ईरानी की खटास राहुल गाँधी के लिए दरअसल बहुत पुरानी है। 2014 का लोक सभा चुनाव में जब भाजपा ने हर जगह अपना परचम लहराया था और उत्तर प्रदेश को पूरे भगवा रंग में रंग दिया था, वह इतिहास रचने के बाद भी स्मृति ईरानी काफी वोटों से राहुल गाँधी से वह चुनाव हार गई थी। भाजपा की लहर में हारने के बाद भी स्मृतिं ईरानी पर पार्टी ने भरोसा जताया और उन्हें मानव सन्नसाधन विकास मंत्रालय दिया। मंत्रालय सँभालते ही स्मृति ईरानी की क्षमताओं पर काफी सवाल उठे और यहाँ तक उनकी अपनी डिग्री ही सुर्ख़ियों में आ गई। पर यह कोई ज़रूरी नहीं है कि किसी की डिग्री ही उसकी क्षमताओं का प्रमाण हो। बिना डिग्री हासिल किये भी लोग बहुत बेहतरीन काम कर सकते हैं।
पर यह मामला गंभीर तब हुआ जब इतना महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभालने के बाद स्मिर्ति का बर्ताव और उनकी नीतिया विद्यार्थियों के ही खिलाफ लगने लगा। देश की कई बड़े विश्वविद्यालय के छात्र- छात्राये सडकों पर स्मिर्ति के खिलाफ नारे लगाते हुए नज़र आये। स्मिर्ति पर छात्रों ने शिक्षा का निजीकरण करने का गंभीरआरोप लगाया। यह मामला उसी समय का है जब UGC जैसी संस्था जो छात्रों को उच्च शिक्षा देने के लिए काम करती है, उसी संस्था ने स्मृति ईरानी के मंत्रालय सँभालने के साथ ही छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृति को घटाने का फैसला लिया। यह फैसला उन छात्रों के लिए एक बहुत बड़ा झटका था जो दिल्ली और अन्य शहरों में पड़ने आते हैं और उसी पैसे से अपना गुज़ारा करते हैं। वैसे तो माना जाता है कि UGC एक स्वतंत्र संस्था है, पर छात्रों को ऐसा महसूस हुआ कि यह फैसला UGC ने मानव संसाधन मंत्रालय के दबाव में आकर लिया। छात्रों के इसी शांतिपूर्ण धरने के दौरान उन पर काफी लाठी चार्ज भी हुआ। एक मंत्रालय जिसका काम शिक्षा को बढ़ोतरी देना है, उसी के द्वारा ऐसे फैसले और छात्रों को अपराधी के रूप में देखना, देश के सभी छात्रों और देश की बढ़ोतरी के लिए बहुत बड़ा झटका था।
जल्द ही मोदी सरकार को यह बात समझ आ गई और स्मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्रालय से हटा कर उन्हें कपडा मंत्रालय सौंपा गया। काफी लोगों ने इसे पदावनति की तरह देखा। छात्रों में मनु- स्मृति के नाम से चर्चित स्मृति ईरानी की कहानी यहीं नहीं रुकी, कपडा मंत्रालय संभालते ही वह अपनी सेक्रेटरी से उलझ पड़ी और फिर से अपनी निजी इस्तेमाल के लिए खरीदी गई साड़ियों का बिल न देने के सुर्ख़ियों में आयी।
अब यह बात जनता की समझ के बाहर है कि मंत्रालय का काम छोड़ कर क्यों स्मृति ईरानी अक्सर राहुल गाँधी को ट्रोल करती हुई नज़र आती हैं। जब पार्टी के बड़े नेता इस तरह विपक्ष की खिल्ली उड़ाएंगे तो सोचना मुश्किल नहीं है कि पार्टी के द्वारा संचालित ट्रोल आर्मी या सोशल मिडिया टीम के सदस्य किस स्तर पर जायेंगे। अक्सर हमने देखा है कि किस तरह की भाषा का प्रोयोग ट्विटर पर लोगों को टारगेट करने के लिए होता है। यह स्तर आज की राजनीति का हो गया है, जो पार्टिया अपने दफ्तर से और ट्विटर हैंडल से संचालित कर रहीं हैं।

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