यूपी चुनाव 2017: उत्तर प्रदेश के 89 विधानसभाओं ने कभी नहीं जीती भाजपा

लखनऊ   भाजपा ने उप्र की 89 सीटों में कभी चुनाव नहीं जीता। ये इलाके भाजपा के लिए सूखे ही रहे लेकिन, इस बार पार्टी ने यहां कमल खिलाने के लिए जबर्दस्त तैयारी की है। मजबूत उम्मीदवारों के साथ ही बड़ी रणनीति बनाई गयी है। लोकसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रदेश में स्थितियां अनुकूल भले ही बनी हैं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जो उसकी कमजोर कड़ी हैं। यहां का चक्रव्यूह वह कभी भेद नहीं पाई। यहां तक कि राम लहर में भी इन सीटों पर उसे जीत हासिल नहीं हो सकी। इस बार पार्टी की कोशिश हर हाल में यह चक्रव्यूह भेदना चाहती है क्योंकि यहां जीत हासिल किए बिना सूबे की सत्ता हासिल करने के उसके मंसूबे पूरे नहीं होंगे। पार्टी ने इस बार इन क्षेत्रों को लेकर काफी ‘होम वर्क’ किया है और उसे यहां जीत हासिल करने के लिए दूसरे दलों की मदद लेने में भी परहेज नहीं। ऐसी सीटों में कई सुरक्षित हैं जहां वह सपा-बसपा की किलेबंदी को ध्वस्त करना चाहती है।

दूसरे दल के सूरमा पर दांव
जाति और धर्म की गोलबंदी के बावजूद भाजपा के लिए सहारनपुर जिले की नकुड़ विधानसभा सीट कभी अनुकूल नहीं रही। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के धर्म सिंह सैनी ने कांग्रेस के इमरान मसूद को चुनाव हराया था। दिलचस्प यह कि इस सीट पर पांचवें स्थान पर रहे भाजपा के मेला राम को सिर्फ 6606 मत मिले थे। उनसे ज्यादा तो निर्दलीय गोविंद चौधरी को 14207 मत मिले। आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के दाता राम ने यहां खाता खोला। भाजपा को तो यहां हमेशा मुंह की खानी पड़ी। भाजपा ने इस बार धर्म सिंह सैनी पर दांव लगा दिया है। मायावती सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी यहां कई बार चुनाव जीते हैं। भाजपा उनकी बदौलत न केवल यहां अपना खाता खोलना चाहती है, बल्कि उनके जरिए अन्य क्षेत्रों में भी सैनी, शाक्य और कुशवाहा को भी प्रभावित करने का अभियान चला रही है। रणनीतिक तौर पर भाजपा की सह अकेली सीट नहीं है। आजादी के बाद से बोहनी न कर पाने वाली ऐसी 89 सीटों पर भाजपा मजे हुए योद्धाओं का कंधा तलाश चुकी है। दूसरे दलों से आये कद्दावर नेताओं के हाथ में नैया पार लगाने के लिए पतवार थमा चुकी है।
बदले पहलवान
रामपुर विधानसभा सीट अब सपा सरकार के मंत्री मोहम्मद आजम खां की पहचान बन गयी है। यह अलग बात है कि पहले इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता था पर, आजम के उभार के बाद कब्जा उन्हीं का रहा। भाजपा यहां कभी खाता नहीं खोल सकी। अब उनकी राह रोकने के लिए भाजपा ने अपने योद्धा शिव बहादुर सक्सेना को मैदान में उतारा है। स्वार क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके सक्सेना का क्षेत्र बदलकर उन्हें नये अखाड़े में उतार दिया है। भाजपा ने यह प्रयोग और भी इलाकों में किया है। छपरौली में पार्टी कभी नहीं जीती। इस बार वेदपाल की जगह सत्येन्द्र तगाना पर दांव लगा दिया गया है। ऐसे ही बागपत सीट पर भाजपा ने रालोद के पहलवान योगेश धामा को ही मैदान में ला दिया है। जसराना से लेकर मोहनलालगंज तक पार्टी की यही रणनीति दिख रही है।
नाम बदले फिर भी नहीं खुली किस्मत
सूबे में कई सीटें ऐसी हैं जिनके परिसीमन में नाम बदल गये फिर भी वहां भाजपा का खाता नहीं खुला। गोरखपुर जिले की धुरियापार का बड़ा हिस्सा चिल्लूपार में शामिल हो गया। चिल्लूपार पहले से ही अस्तित्व में था। यहां आजादी के बाद से मतदाताओं ने कभी भाजपा को पनपने नहीं दिया। महराजगंज जिले की लक्ष्मीपुर बदलकर अब नौतनवां नाम से जानी जाती है लेकिन यह भी भाजपा के लिए अनुकूल नहीं रही। मऊ जिले की नत्थूपुर बदलकर अब मधुबन हो गयी है। भाजपा के लिए कभी अनुकूल न रहने वाली ऐसी सीटों के लिए भी भाजपा समीकरण तलाश रही है।
सुरक्षित सीटों पर लगी ताकत
अमेठी जिले की जगदीशपुर, सोनभद्र की दुद्धी, कौशांबी की मंझनपुर, गाजीपुर की जखनिया, सीतापुर की मिश्रिख और लखनऊ की मलिहाबाद जैसी सीटों पर भाजपा को हर बार मुंह की खानी पड़ी। भाजपा ने चुनावी तैयारी में बौद्ध धम्म चेतना यात्रा निकालते हुए दलितों को प्रभावित करने की पहल तो की ही, बसपा से आये कई दलित नेताओं को आगे करके उन्हें महत्व भी दिया है। भाजपा इन सीटों पर अपने पक्ष में सवर्णों को आकर्षित करने के लिए उम्मीदवारों के प्रभाव पर भी विशेष ध्यान दिया है।

तोड़ेंगे चक्रव्यूह का हर द्वार
भाजपा इस चक्रव्यूह को लेकर इसलिए भी आशांवित है क्योंकि 2014 में इनमें बहुत से इलाकों में भाजपा विरोधियों को पछाड़ चुकी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में ही उत्तर प्रदेश की जनता ने इतिहास रच दिया। लोकसभा चुनाव में सूबे की 337 विधानसभा सीटों पर भाजपा सबसे आगे थी और इसमें कभी न जीतने वाले इलाके भी थे। केशव का कहना है कि परिवर्तन यात्रा में जनता का यह सकारात्मक रुख देखने को मिला और इसीलिए चक्रव्यूह को हर द्वार को हम तोड़ेंगे।

Courtesy: Jagran.com

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