ट्रम्प के ऑर्डर के खिलाफ एकजुट हुए US के 4 राज्य, कानूनी नोटिस भेजा

ट्रम्प के ऑर्डर के खिलाफ एकजुट हुए US के 4 राज्य, कानूनी नोटिस भेजा

वॉशिंगटन. डोनाल्ड ट्रम्प का 7 मुस्लिम देशों के लोगों के यूएस में एंट्री वाले ऑर्डर पर मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। सैन फ्रांसिस्को के बाद अब मैसाच्युसेट्स, न्यूयॉर्क और वर्जीनिया ने ऑर्डर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को लेकर अमेरिका में कई कई प्रदर्शन हो चुके हैं। ऑर्डर अमेरिकी संविधान का वॉयलेशन करता है…

– न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, अमेरिकी संविधान धार्मिक आजादी की गारंटी देता है। इसी को आधार बनाकर ऑर्डर के खिलाफ स्यू नोटिस जारी किया है। ऑर्डर को अमेरिकी कॉन्स्टिट्यूशन का वॉयलेशन करने वाला बताया गया है।
– ट्रम्प के ऑर्डर के खिलाफ खड़ा होने वाला सैन फ्रांसिस्को पहला अमेरिकी राज्य था, जिसने ट्रम्प के ऑर्डर का विरोध किया।
– ट्रम्प के ऑर्डर के खिलाफ अमेरिका के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। लोगों ने इसे भेदभाव करने वाला बताया था।
– हालांकि, सोमवार और मंगलवार को कराए गए एक पोल में 49% लोगों ने ऑर्डर को सपोर्ट और 41% इसके खिलाफ थे।

क्या बोलीं मैसाच्युसेट्स-वर्जीनिया की अटॉर्नी जनरल?
– मॉरा हीली के मुताबिक, “ऑर्डर को एक तरह से आप कॉन्स्टिट्यूशन का वॉयलेशन कह सकते हैं।”
– बोस्टन प्रेस कॉन्फ्रेंस में हीली ने कहा, “ये ऑर्डर लोगों को उनके धर्म के आधार पर बांटता है। जिस धरती पर कोई शख्स पैदा हुआ है, इस बेस पर भी ऑर्डर लोगों को अलग करता है है।”
– हीली ने बताया कि न्यूयॉर्क और वर्जीनिया ने भी अपने फेडरल कोर्ट में ऑर्डर के खिलाफ केस दायर किया है।
– वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल मार्क हेरिंग के मुताबिक, “हमारी कॉलेजों-यूनिवर्सिटीज में बच्चे पढ़ रहे हैं। इसके चलते वे लौट नहीं पाएंगे। हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं।”

ऑर्डर का विरोध करने पर चली गई नौकरी
– ऑर्डर का विरोध करने का खामियाजा ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन की एक्टिंग अटॉर्नी जनरल सैली येट्स को भुगतना पड़ा। उन्हें सोमवार को बर्खास्त कर दिया गया था।
– व्हाइट हाउस ने अपने स्टेटमेंट में कहा, “येट्स ने ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का भरोसा तोड़ा है।”
– येट्स ने जस्टिस डिपार्टमेंट को लिखे लेटर में कहा, “मौजूदा वक्त में मैं न तो इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि एग्जीक्यूटिव ऑर्डर का बचाव कर पाऊंगी और न ही ये लगता है कि इसे कानूनी रूप से जांचकर बनाया गया।”
– येट्स ने लिखा था कि जस्टिस डिपार्टमेंट की हेड होने के नाते उनकी ये ड्यूटी है कि वे किसी भी ऑर्डर को कानून के हिसाब से जांचें-परखें।
– वहीं व्हाइट हाउस ने लिखा, “मिस येट्स, जिन्हें ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन ने अप्वाइंट किया है, वे बॉर्डर्स से जुड़े मुद्दों पर कमजोर और इलीगल इमीग्रेशन पर तो बेहद कमजोर हैं।”
– “ये वक्त देश की सिक्युरिटी को लेकर गंभीर फैसले लेने का है। इसी के चलते 7 खतरनाक देशों से लोगों के अमेरिका आने पर बैन लगाया गया। यह सही है और देश को बचाने के लिए जरूरी।”

ट्रम्प ने 7 मुस्लिम देशों के लोगों के इमिग्रेशन पर बैन लगाया
– ट्रम्प ने जिन 7 मुस्लिम देशों के लोगों के इमिग्रेशन पर बैन लगाया था, उनमें इराक, ईरान, लीबिया, सूडान, सीरिया, सोमालिया और यमन हैं।
– व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ द स्टाफ रींस प्रीबस ने कहा, “हमने इन 7 देशों को चुना तो इसकी एक खास वजह है।”
– “कांग्रेस और ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन, दोनों ने इन 7 देशों की पहचान कर रखी थी कि वहां खतरनाक आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।”
– प्रीबस ने कहा, “अब आप कुछ अन्य ऐसे देशों की ओर भी इशारा कर सकते हैं जहां एक तरह की समस्याएं हैं, जैसे कि पाकिस्तान और कुछ अन्य देश।”
– “शायद हमें इसे और आगे ले जाने की जरूरत है। फिलहाल इन देशों में जाने और वहां से आने वाले लोगों की गंभीरता से जांच-पड़ताल की जाएगी।”

120 दिन तक अमेरिका नहीं आ सकेंगे रिफ्यूजी
– यूएस रिफ्यूजी एडमिशन्स प्रोग्राम को 120 दिन के लिए बंद कर दिया गया है। ये तभी शुरू किया जाएगा जब ट्रम्प कैबिनेट के मेंबर्स उसकी अच्छी तरह जांच कर लेंगे।
– ऑर्डर के मुताबिक, इराक, ईरान, सीरिया, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन के लोग भी 90 दिन तक अमेरिका में एंट्री नहीं ले सकेंगे। उन्हें वीजा नहीं मिलेगा।

Courtesy: Bhaskar.com

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