क्या कांग्रेस ही पंजाब में एक मात्र विकल्प है?

क्या कांग्रेस ही पंजाब में एक मात्र विकल्प है?

 

 

पंजाब का नाम सुनते ही एक समय पर वहाँ के लहलहाते खेतों का दृश्य सामने आता था। पंजाब का नाम उसकी हरित क्रांति के लिए भी बहुत मशहूरहुआ। पर आज जब हम देखते हैं तो वहां हर तरफ हमे एक तरह का मातम दिखाई देता है। पंजाब का युवा आज ड्रग्स के नशे में डूब हुआ है। अकालीऔर भाजपा ने मिलकर जितना नुक्सान पंजाब का किया है उसका खामियाज़ा न जाने कितने परिवार आज उठा रहे हैं और ना जाने कितने सालोंतक पंजाब और वहां के लोगों को उठाना पड़ेगा।

जिस प्रान्त का युवा ही खतरे में हो उस प्रान्त का भविष्य कितना अन्धकार में होगा यह समझना बहुत कठिन नहीं है। यह बहुत दुःख की बात है किसर्कार के द्वारा उठे कदम भी उतने गंभीर नहीं थे। केंद्र में सरकार बनाने के बाद भी पंजाब में उसका कोई सकारत्मक बदलाव नहीं दिखा। माना तोयह भी जाता है कि पंजाब के बड़े नेता ही ड्रग्स के व्यापर को बढ़ावा देते हैं।

अगर कानून बनाने वाले ही इस तरह के व्यापर को बढ़ावा देंगे तो क्या कभी शशक्त क़ानून बन पायेगा? पंजाब की इस दशा को देखते हुए अब वहांके लोग भी समझ गए हैं कि केवल सत्ता का फेर बदल ही पंजाब को इस नशे से आज़ादी दिला सकता है। बिना सत्ताधारियों की मदद से इतना बड़ाव्यापर चल सकता है क्या?

तो अब सवाल यह उठता है कि पंजाब के लोगों के पास विकल्प क्या है? एक तरफ कांग्रेस पार्टी है और दूसरी तरफ पहली बार चुनाव में उत्तर रहीआम आदमी पार्टी। आम आदमी पार्टी को पंजाब में चुनाव लड़ने का फायदा तो ज़रूर होगा क्योंकि उसके पास खोने को कुछ नहीं है। पर AAP केलिए वहां सर्कार बनाना काफी मुश्किल लग रहा है। AAP पिछले कुछ दिनों में खालिस्तानियों से चन्दा लेने कि वजह से सुर्ख़ियों में रही है, ऐसे मेंपंजाब की जनता इतना बड़ा खामियाज़ा बदलाव के नाम पर उठाना नहीं चाहेगी। AAP  ने अपने आप को दिल्ली में भी पूर्ण बहुमत आने के बाद भीढंग से साबित नहीं किया है। बिना वहां पर खुद को साबित किये AAP के लिए खुद को नए  प्रदेश में स्थापित करना आसान नहीं होगा। और फिरअभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा भी घोषित नहीं हुआ है। AAP  ने भले ही पंजाब में लोक सभा चुनाव के दौरान 4 सीट हासिल की थी पर उनके सांसदभगवंत मान खुद नशे में धुत रहने के कारण समय समय पर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। जनता को यह समझ नहीं आ रहा कि जिस पार्टी का सांसद खुदनशे में धुत रहता है वह पार्टी क्या किसी को नाशा मुक्त करेगी? उसके साथ साथ यह बात भी चर्चा में है कि पिछले साल AAP  ने दिल्ली में लगभग 400 शराब के ठेके खोले हैं। यह बहुत आश्चर्यजनक बात है। एक तरफ नशा मुक्ति का अभियान चलाने वाली सर्कार दूसरी तरफ शराब के ठेकेइतनी तेज़ी से क्यों बढ़ाती जा रही है?

कांग्रेस ने समय से पहले ही अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया था। पंजाब में अमिंदर सिंह की काफी फोल्लोविंग है और काम करने काअनुभव भी। साथ ही में नवजोत सिंह सिधु के कांग्रेस से जुड़ने के बाद पार्टी और ज़्यादा मज़बूत नज़र आ रही है।

हालहीं में इंडिया टुडे एक्सिस ग्रुप का प्रीपोल सर्वे सामने आया है जिसमे कांग्रेस को 60 – 65, AAP को 41 – 44 और SAD- बीजेपी को केवल 11 – 15 सीट मिलती हुई नज़र आ रही है। अगर इसी की छवि 4 तारीक को होने वाले मतदान पर पड़ी तो भाजपा के लिए आने वाला समय बहुत कठिनहोगा और एक बार फिर से प्रधानमंत्री जो भाजपा के स्टार कंपैनर रहते हैं, उनका कद और छोटा हो जायगा।

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