…तो क्‍या व‍िपक्षी सांसद होने के चलते ई अहमद के ल‍िए स्‍थग‍ित नहीं हुआ सदन?

…तो क्‍या व‍िपक्षी सांसद होने के चलते ई अहमद के ल‍िए स्‍थग‍ित नहीं हुआ सदन?

शुक्रवार (तीन फरवरी) को लोक सभा की कार्यवाही शुरू होते ही इस बात पर हंगामा शुरू हो गया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सांसद ई अहमद के निधन के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित न करके एक वरिष्ठ सांसद का अपमान किया। संसद के बजट सत्र के पहले ही दिन इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सांसद ई अहमद की तबीयत बिगड़ गयी। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक फरवरी को रात के दो बजे के करीब उनका देहांत हो गया। अहमद जीते जी शायद ही कभी किसी विवाद की वजह से  नेशनल मीडिया की सुर्खियों में आए हों लेकिन मृत्यु के बाद से ही उनके लेकर विवाद थम नहीं रहा।

अहमद की मृत्यु उस दिन हुयी जिस दिन नरेंद्र मोदी सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली नोटबंदी के बाद और पांच राज्यों में विधान सभा चुनावों से पहले देश का आम बजट पेश करने वाले थे। संसद की अघोषित परंपरा रही है कि किसी सदस्य के निधन के बाद दिवंगत सांसद को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाती है। विपक्षी दल चाहते थे कि अहमद के निधन के बाद सरकार बजट को टाल दे। इससे पहले विपक्षी दल विधान सभा चुनावों के बाद बजट पेश करने की मांग कर रहे थे। मोदी सरकार ने न पहले उनकी बात सुनी, न इस बार।

एक फरवरी को सुबह कुछ देर तक असमंजस की स्थिति बनी रही कि वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट पेश करेंगे कि नहीं। जेटली ने करीब  सवा दस बजे ट्वीट करके निर्धारित समय पर ही बजट पेश करने की पुष्टि की। इस मामले में लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की भूमिका निर्णायक थी। स्पीकर भले ही सत्ताधारी दल के सहयोग से चुना जाता है लेकिन उसे दलगत भावनाओं से ऊपर माना जाता है। महाजन शायद पार्टीगत भावनाओं से ज्यादा ऊपर नहीं उठ सकीं। संभवतः सांसदों के निधन के बाद कार्यवाही स्थगित किए जाने की आम परंपरा को उन्होंने संसदीय इतिहास के दो अपवादों से काटना उचित समझा।

Courtesy:Jansatta

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