रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों में 6 साल की सर्वाधिक कटौती कर सकता है? : 10 बातें

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरों में 6 साल की सर्वाधिक कटौती कर सकता है? : 10 बातें

नई दिल्ली: आज आपको सस्ते लोन का तोहफा मिल सकता है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) आज चालू वित्त वर्ष की आखिरी मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करने जा रहा है. नवंबर में नोटबंदी (Demonetisation) के बाद आरबीआई दूसरी बार ब्याज दरों की समीक्षा कर रहा है. कुछ विशेषज्ञों की राय है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर की अगुवाई वाली समिति आर्थिक वृद्धि को बूस्ट देने के लिए ब्याज दर में कटौती की सिफारिश कर सकती है. ऐसे में ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की कटौती की उम्मीद जता रहे हैं. अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए रॉयटर्स के पोल के मुताबिक, सरकार ने बजट में राजकोषीय घाटे को लेकर जो विवेकपूर्ण कदम उठाया है, उससे आज दरों में कटौती की उम्मीद बनती है. वहीं, अटकलें और गुणाभाग का एक पहलू यह भी है कि आरबीआई रेट कट को अप्रैल तक के लिए टाल  सकता है.

आरबीआई द्वारा रेट कट को लेकर ली जाने वाली कॉल से जुड़ी 10 खास बातें

  1. आज दोपहर ढाई बजे के करीब आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू को लेकर ऐलान करेगा. यदि आरबीआई 25 बेसिस पॉइंट यानी 5 फीसदी की कटौती करता है तो यह नवंबर 2010 के बाद से सर्वाधिक कटौती होगी.
  2. आम बजट 2017 में सरकार ने राजकोषीय घाटे को लेकर बेहद सतर्कतापूर्ण और विवेकपूर्ण कहा जाने वाला कदम उठाया और आागामी वित्तीय वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.2 फीसदी रखा.  जबकि, ऐनालिस्ट कयास लगा रहे थे कि यह 3.3 से लेकर 3.5 फीसदी तक रखा जा सकता है. सरकार का यह कदम एक ट्रैक की ओर इंगित करता है और उम्मीद जगाता है कि ब्याज दरों को कम किया जा सकता है.
  3. उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई दर दो साल के निचले स्तर पर है और यह दिसंबर में 3.41 फीसदी है. यह आरबीआई तय किए लक्ष्य से काफी कम है. आरबीआई द्वारा इस वित्तीय वर्ष के अंत तक 5 फीसदी तक का टारगेट रखा गया था जबकि मिडिल टर्म टारगेट 4 फीसदी रखा गया था.
  4. जानकारों को लगता है कि नोटबंदी के बाद लड़खड़ा रही इकॉनमी को संभालने के लिए रेपो रेट कट देकर केंद्रीय बैंक एक सहारा लगा सकता है.
  5. कुछ जानकार ब्याज दरों में किसी भी परिवर्तन की संभावना नहीं देख रहे हैं. बैंकों में तरलता काफी ज्यादा है क्योंकि नोटबंदी के कारण बैंक जमा में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद ब्याज दरों में एक फीसदी तक की गिरावट पहले ही हो चुकी है. जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में जब मुद्रास्फीति में उतार-चढ़ाव कायम है, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, केंद्रीय बैंक यह जोखिम नहीं लेना चाहेगा.
  6. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने दिसंबर में एक आश्चर्यजनक कदम में अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान बैंकों के लिए पुनर्खरीद दर यानी कि अल्पकालिक उधारी दर को 6.25 फीसदी पर बरकरार रखा था.
  7. बैंक और उद्योग प्रमुख नीतिगत दर (रेपो रेट) में कटौती की वकालत कर रहे हैं. पीएनबी (PNB) की प्रबंध निदेशक उषा अनंतसुब्रमणियम के अनुसार, ब्याज दर में हर तरफ से 0.25 प्रतिशत की कटौती की उम्मीद की जा रही है. उन्होंने कहा- अधिकतर बैंक पहले ही ब्याज दर में कटौती कर चुके हैं और अगर जरूरत पड़ी तो आगे और कटौती की जाएगी.
  8. सिटीबैंक (CitiBank) की एक रिपोर्ट में कहा गया- नोटंबदी के बाद पुनर्मुद्रीकरण की प्रक्रिया के कारण आरबीआई अभी ब्याज दरों में कटौती नहीं कर सकती है, क्योंकि पुनर्मुद्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंकों के उधार देने योग्य संसाधनों में स्पष्टता आएगी.
  9. सिंगापुर में डीबीएस (DBS) बैंक  की मुख्य अर्थशास्त्री राधिका राव के मुताबिक, अप्रैल की बजाय फरवरी में रेट कट का कदम सरकार के ऐहतियाती कदमों की बानगी देता है.  लेकिन कुछ जानकारों को लगता है कि आरबीआई मुद्रास्फीति की अस्थिरता को लेकर सतर्कता बरत सकता है.
  10. आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति कच्चे तेल के दाम में वृद्धि और डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद संरक्षणवादी रूख के जोर पकड़ने को देखते हुए सतर्क रुख भी अपना सकती है.

Courtesy: NDTV India

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