दोहरा शतक जड़ते ही डॉन ब्रैडमैन, राहुल द्रविड़ जैसे दिग्‍गजों से भी आगे निकले विराट कोहली

दोहरा शतक जड़ते ही डॉन ब्रैडमैन, राहुल द्रविड़ जैसे दिग्‍गजों से भी आगे निकले विराट कोहली

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने रिकॉर्ड तोड़ने की अविश्वसनीय लय जारी रखते हुए लगातार चार टेस्ट सीरीज में दोहरा शतक जड़ने वाला पहला बल्लेबाज बनकर शुक्रवार (10 फरवरी) को यहां महान सर डोनल्ड ब्रैडमैन और राहुल द्रविड़ को पीछे छोड़ दिया। कोहली ने वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और बांग्लादेश के खिलाफ चार सीरीज में दोहरा शतक जमाया। ब्रैडमैन और द्रविड़ तीन लगातार सीरीज में दोहरा शतक जमा चुके हैं।

कोहली ने पिछले साल जुलाई में नॉर्थ साउंड में अपना पहला दोहरा शतक (200) बनाया था जिसके बाद उन्होंने अक्तूबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ 211 रन बनाये। इसके बाद भारतीय कप्तान ने मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ दिसंबर में अपने कैरियर का सर्वश्रेष्ठ 235 रन का स्कोर खड़ा किया और अब उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 204 रन बनाये। आंकड़ों के हिसाब से कोहली ने ब्रैडमैन और द्रविड़ का रिकॉर्ड तोड़ा है लेकिन डान ब्रैडमैन के आंकड़े देखने के बाद आपको लगेगा कि 1930-31 के दौरान उनके दोहरे शतक शानदार थे।

जून और अगस्त के बीच इंग्लैंड में 1930 एशेज सीरीज में तब 22 वर्षीय ब्रैडमैन ने लॉर्ड्स में 254 रन, लीड्स (हेडिंग्ले) में अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ 334 रन की पारी के बाद ओवल में 232 रन बनाये थे जो एक ही सीरीज में बने थे। इसके बाद जनवरी 1931 में वेस्टइंडीज के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में खेली गयी सीरीज में ब्रैडमैन ने ब्रिसबेन में 223 रन बनाये। अगली सीरीज उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली थी, उन्होंने ब्रिसबेन में 226 रन बनाये थे जिससे वह लगातार तीन श्रृंखलाओं में दोहरा शतक जमाने वाले पहले बल्लेबाज बने थे।

द्रविड़ ने लगातार सीरीज में दोहरे शतकों की हैट्रिक 2003-04 सत्र में लगायी थी। उन्होंने अहमदाबाद (अक्तूबर 2003) में 222 रन के बाद एडिलेड (दिसंबर 2003) में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 233 रन बनाये। इसके बाद उन्होंने अगली सीरीज में पाकिस्तान के खिलाफ अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ 270 रन की पारी खेली थी। कोहली ने अपनी पारी के दौरान जो कई रिकॉर्ड बनाये उनमें एक घरेलू सत्र में सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने का रिकॉर्ड भी शामिल है। उन्होंने वीरेंद्र सहवाग के रिकॉर्ड को तोड़ा।

बांग्लादेश के खिलाफ एकमात्र टेस्ट क्रिकेट मैच का दूसरा दिन कोहली के नाम रहा। जिन्होंने पांच घंटे से भी कम समय में दोहरा शतक जमाया। उन्होंने इस बीच 239 गेंदें खेली तथा 24 चौके लगाये। इस पारी से उन्होंने फिर जतला दिया कि वह किस स्तर के बल्लेबाज है। कोहली ने लंच के बाद अपना दोहरा शतक पूरा किया और फिर स्पिनर ताईजुल इस्लाम की आर्म बाल पर लेट कट करने के प्रयास में पगबाधा आउट हुए। लेकिन तब तक उन्होंने सुनिश्चित कर दिया था कि भारत की इस मैच में दूसरी बार बल्लेबाजी करने की नौबत नहीं आएगी।

भारत की पहली पारी, 6 विकेट 687 रन पर घोषित

भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ एकमात्र टेस्ट क्रिकेट मैच के दूसरे दिन शुक्रवार (10 फरवरी) को अपनी पारी छह विकेट पर 687 रन पर घोषित कर दी। भारत के लिये अच्छी खबर यह रही कि टीम में वापसी करने वाले अजिंक्य रहाणे (82) और विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा (नाबाद 106) खुद पर दिखाये गये भरोसे पर खरे उतरे और उन्होंने उपयोगी योगदान दिया। कोहली और रहाणे ने चौथे विकेट के लिये 222 रन जोड़े। इसके अलावा रविंद्र जडेजा 78 गेंद में 60 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि रविचंद्रन अश्विन ने 45 गेंद में 34 रन की पारी खेली।

अब जबकि पिच से टर्न मिलना शुरू हो गया तब बांग्लादेश के बल्लेबाजों के पास मैच बचाने की मुश्किल चुनौती होगी जो कि अश्विन और जडेजा जैसे स्पिनरों के सामने नामुमकिन लग रहा है। भारत ने सुबह तीन विकेट पर 356 रन से आगे खेलना शुरू किया और बांग्लादेश के गेंदबाजों को गुरुवार (9 फरवरी) की तरह संघर्ष करते रहने के लिये मजबूर किया। सुबह के सत्र में भारत ने रहाणे के रूप में एकमात्र विकेट गंवाया जिन्हें बायें हाथ के स्पिनर ताइजुल इस्लाम की गेंद पर युवा मेहदी हसन मिराज ने कैच किया। रहाणे ने अपनी 133 गेंद की पारी में 11 चौके लगाये।

भारत ने पहले सत्र में 121 रन और दूसरे सत्र में 143 रन जोड़े। बाद में साहा ने आक्रामक रवैया अपनाया। वह अब 155 गेंदों में 106 रन बनाकर नाबाद रहे। इस दौरान उनके बल्ले से सात चौके और दो छक्के निकले। सुबह रहाणे ने अधिक आत्मविश्वास से बल्लेबाजी की जबकि कोहली ने गुरुवार की तरह अपना सदाबहार अंदाज में रन बटोरे। उन्होंने साकिब अल हसन पर फुल टॉस पर चौका जमाकर अपना अर्धशतक पूरा किया। यह उनका 10वां टेस्ट अर्धशतक था। मुंबई का यह खिलाड़ी 62 रन पर आउट हो सकता था जब शब्बीर रहमान डीप थर्ड मैन पर उनका कैच छोड़ दिया।

वहीं कोहली ने बांग्लादेशी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाना जारी रखा, इस दौरान उन्हें डीआरएस की अपील ने बचाया भी। 180 रन के स्कोर पर मैदानी अंपायर ने मिराज की गेंद पर उन्हें पगबाधा आउट किया। भारतीय कप्तान ने अपने साथी खिलाड़ी साहा से सलाह के बाद डीआरएस लेने का फैसला किया और यह उनके हक में रहा।

Courtesy:Jansatta

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