यूपी विधानसभा चुनावः अब चक्रव्यूह का चौथा द्वार भेदने निकला सियासी कारवां

यूपी विधानसभा चुनावः अब चक्रव्यूह का चौथा द्वार भेदने निकला सियासी कारवां

लखनऊ तीसरे चरण का मतदान समाप्त होने के बाद राजनीतिक दलों का जोर चौथे चरण पर है। बुंदेलखंड राजनीतिक दलों के एजेंडे का हिस्सा है और यह संयोग है कि चौथे चरण में वीरों की यह भूमि भी मुकाबले में है। बुंदेलखंड के सात जिलों समेत कुल 12 जिलों की 53 विधानसभा सीटों पर 23 फरवरी को मतदान होना है। नेहरू-गांधी परिवार के इस गढ़ में दांव पर यूपी के दो लड़कों की दोस्ती भी लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यूपी को माई-बाप का दर्जा देकर खुद को गोद लिया बेटा बताए जाने के बाद इन अंचलों में रिश्तों की जंग तेज हो गयी है।

गंगा, यमुना, बेतवा, केन और सई जैसी नदियों की परिधि में चौथे चरण का इलाका बसा है। बुंदेलखंड के अलावा रायबरेली, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी और इलाहाबाद इसके हिस्से हैं इसलिए आमजन के सिर पर भी सियासत चढ़कर बोलती है। अभी हाल ही में रायबरेली पहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बाहरी बताकर रिश्तों की एक नई जंग छेड़ दी है। हालांकि, उसके पहले ही गोद लिया बेटा बनकर मोदी भावनाओं की नई लहर चला चुके हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने करीब-करीब यहां की आधी सीटें अपने नाम करा ली थीं, लेकिन बसपा ने भी खूब पीछा किया। कांगे्रस तीसरे नंबर पर थी। भाजपा के लिए यह क्षेत्र कम उपजाऊ था इसलिए भाजपा ने अपना पूरा जोर यहां लगा दिया है।

खासकर बुंदेलखंड के झांसी में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने अपनी पहली कार्यसमिति की और वहीं पर परिवर्तन का नारा गूंजा। भाजपा ने दूसरे चरण की परिवर्तन यात्रा भी झांसी से शुरू की इसलिए जंग में अब चौतरफा रार छिड़ी है। इसी गढ़ में समाजवादी सरकार के मंत्री मनोज पाण्डेय और शिवाकांत ओझा की परीक्षा होनी है तो पांच बार से चुनाव जीत रहे बाहुबली रघुराज प्रताप सिंह फिर जनता की अदालत में हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के पुत्र भी यहां से चुनाव मैदान में हैं। रामपुर खास में कांग्रेस के टिकट पर नौ बार चुनाव जीतकर रिकार्ड बनाने वाले प्रमोद तिवारी की पुत्री आराधना मिश्रा भी यहां के समर में मुकाबिल हैं।
रायबरेली में दोस्ती के नए समीकरण
इस बार के चुनाव में रायबरेली का पूरा समीकरण बदल गया है। यहां की कुल सात सीटों में पिछली बार पांच सीटें सपा ने जीती थीं। एक कांग्रेस और एक पीस पार्टी के हिस्से में गयी। इस बार तिलोई सीट अमेठी में चली गयी है। कांग्रेस और सपा की दोस्ती के बाद चुनावी पैरोकारों के दिल और जुबान दोनों बदली है। पिछली बार पीस पार्टी से चुनाव जीतने वाले अखिलेश सिंह ने अपनी बेटी अदिति सिंह को कांगे्रस के टिकट पर मैदान में उतारा है। वह पिछली बार सपा और कांग्रेस दोनों पर हमलावर थे लेकिन अबकी बार इन दोनों दलों के प्रति वह कृतज्ञ हैं। इसी जिले की ऊंचाहार सीट सपा सरकार के मंत्री मनोज पाण्डेय की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। यहां सपा और कांग्रेस दोनों दल मुकाबिल हैं और इससे भी खास बात यह है कि मनोज पाण्डेय के मुकाबले भाजपा ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के पुत्र उत्कृष्ट मौर्य को मैदान में उतारा है। स्वामी भी मनोज के साथ ही अपनी ताकत आजमा रहे हैं। यहां पर पिछले चुनाव के मुकाबले बहुतों के सुर बदल गए हैं।

उमा भारती के लिए चुनौती

केंद्रीय मंत्री उमा भारती 2012 के चुनाव महोबा के चरखारी से चुनाव जीती थीं लेकिन झांसी से सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में उनकी चरखारी सीट भाजपा के हाथ से फिसल गयी। इस बार बदले माहौल में उमा के लिए बुंदेलखंड सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि कई सीटों पर उनकी प्रतिष्ठा लगी है। झांसी जिले में कुल चार सीटें हैं जिनमें पिछली दफा दो सपा, एक भाजपा और एक बसपा ने जीती थीं। झांसी और आसपास के जिलों में उमा के लिए कठिन परीक्षा की घड़ी है क्योंकि भाजपा ने अपने कई अभियान झांसी से ही शुरू किया था।

बसपा की लगी प्रतिष्ठा
बांदा जिला बसपा के लिए कई मायनों में अहम है। बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी का यह गृह जिला है। चार सीट वाले इस जिले में पिछली बार दो कांग्रेस, एक सपा और एक बसपा को मिली थी। इस चुनाव में जहां बसपा छोड़कर भाजपा में गए पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य की वजह से एक चुनौती है तो वहीं बांदा की नरैनी सीट पर गयाचरण दिनकर मैदान में हैं। दरअसल, स्वामी के हटने के बाद बसपा ने गयाचरण दिनकर को ही नेता प्रतिपक्ष बनाया है। यही वजह है कि बसपा ने गयाचरण के लिए पूरी ताकत लगाई है।
कसौटी पर प्रमोद और रघुराज
प्रतापगढ़ जिले की सात सीटों में यूं तो कई दिग्गज हैं। प्रदेश सरकार के मंत्री प्रोफेसर शिवाकांत ओझा रानीगंज क्षेत्र से तकदीर आजमा रहे हैं जबकि अपनी परंपरागत सीट कुंडा पर काबिज होने के लिए रघुराज प्रताप सिंह भी फिर निर्दल ही जोर आजमाइश कर रहे हैं। रामपुर खास में नौ बार विधायक रहे प्रमोद तिवारी ने पिछले उपचुनाव में अपनी बेटी आराधना मिश्रा उर्फ मोना को यह सीट देकर विरासत को आगे बढ़ा दिया है। पर, अबकी उसी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। प्रतापगढ़ में 2012 में सात सीटों में चार सपा के हिस्से थी जबकि दो उसके समर्थन से निर्दल और एक कांग्रेस के खाते में रही।
इलाहाबाद में बड़ी लड़ाई
इलाहाबाद में अजब सा मंजर है। कई पत्नियों के हाथों में पतवार है। इस जिले में कुल 12 विधानसभा क्षेत्र है। पिछली बार आठ सीटें सपा ने जीती थीं। तीन बसपा और एक कांग्रेस के खाते में गयी। अबकी बार पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी की पत्नी प्रमिला अपना दल से हंडिया से, उदयभान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया भाजपा से मेजा से तकदीर आजमा रही हैं। विधायक जवाहर पंडित और राजू पाल की हत्या के बाद उनकी पत्नियों ने विधानसभा का सफर तय किया। जवाहर की पत्नी बिजमा यादव और राजू पाल की पत्नी पूजा पाल अपनी सीट बचाने के लिए क्रमश: सपा और बसपा के टिकट से जूझ रही हैं। छात्र राजनीति से उभरे इलाहाबाद उत्तरी के कांग्रेस विधायक अनुग्रह नारायण सिंह भी ताल ठोंक रहे हैं। सपा के दर्जा मंत्री उज्ज्वल रमण सिंह अपने पिता की परंपरागत सीट करछना को एक बार फिर अपने नाम दर्ज कराने के लिए जूझ रहे हैं लेकिन उनकी राह में भी कम रोड़े नहीं हैं।
बुंदेलखंड के इन हिस्सों में भी जंग
झांसी और बांदा के अलावा बुंदेलखंड के जालौन की तीन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट की दो-दो सीटों पर मुकाबला है। पाठा के बीहड़ों में दस्युओं की आहट से थर्रा जाने वाले लोगों के सामने इन दिनों हाथ बांधे याचक की भूमिका में खड़े उम्मीदवार पसीने-पसीने नजर आ रहे हैं। पानी के लिए जंग लडऩे वाले इस इलाके में वादे भी खूब हो रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने में भाजपा, बसपा, कांग्रेस और सपा कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।

दो प्रदेश अध्यक्षों की परीक्षा
कौशांबी की तीन और फतेहपुर की छह सीटों पर सभी दल जूझ रहे हैं लेकिन असली प्रतिष्ठा भाजपा और सपा के प्रदेश अध्यक्षों की होनी है। कौशांबी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का जिला है जबकि फतेहपुर सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल का। दोनों की सियासी पारी भी अपने-अपने गृह जिलों से ही शुरू हुई थी। फतेहपुर में बसपा और भाजपा भी ताकत लगा रही हैं जबकि कौशांबी में भी गैर भाजपाई दल पूरी तैयारी से जुटे हैं।

चौथा चरण
कुल सीटें – 53
मतदान – 23 फरवरी
कुल जिले -12
कुल मतदाता – एक करोड़ 84 लाख

2012 के चुनाव पर एक नजर
कुल सीटें : 54
किसको कितनी मिली
सपा – 24
भाजपा- 05
बसपा – 15
कांग्रेस – 07
पीस पार्टी -01
निर्दल – 02

Courtesy: Jagran.com

 

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