इसरो चेयरमैन, अगले वर्ष चंद्रमा पर भारत की दूसरी छलांग

इसरो चेयरमैन, अगले वर्ष चंद्रमा पर भारत की दूसरी छलांग
बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) दूसरी बार चंाद और मंगल पर मिशन की तैयारी मेें है। इसरो के पहले अंतरग्रहीय मिशन के तहत भेजे गए चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी तो चंद्रयान-2 चंद्रमा के नए आयामों की खोज करेगा। इसरो की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार से विशेष बातचीत।
104 उपग्रहों के रिकॉर्ड प्रक्षेपण कर कैसा लगता है?
विक्रम साराभाई ने कहा था कि तकनीक उपयोग के लिए हमें अपनी क्षमता बढ़ानी चाहिए। आज हम इतनी क्षमता विकसित कर पाए हैं कि दूरसंचार से लेकर आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष तकनीक का अधिकतम उपयोग हो रहा है।
अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर होने के कितने करीब हैंं?
हमने पीएसएलवी के लगातार 38 सफल मिशन पूरे किए हैं और पिछले तीन-चार वर्षों से इसकी प्रक्षेपण क्षमता में काफी बढ़ोतरी की है। वहीं, जीएसएलवी मार्क-2 के लिए हमने पूर्ण स्वदेशी तकनीक से क्रायोजेनिक चरण तैयार किया और इसके तीन सफल प्रक्षेपण हो चुके हैं। हमारी कोशिश है कि इसके हर साल दो प्रक्षेपण हों।
चंद्रयान-2 की तैयारी कहां तक पहुंची है?
चंद्रयान-1 के साथ जो मून इम्पेक्ट प्रोब भेजा गया, वह जाकर चांद की धरती से टकरा गया था। मगर चंद्रयान-2 में हम एक लैंडर और रोवर भी भेज रहे हैं। लैंडर चांद की धरती पर नियंत्रित और सहज लैंडिंग करेगा और उसमें से रोवर निकलकर चांद की धरती पर कई प्रयोगों को अंजाम देगा। प्रयास है कि चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण वर्ष 2018 की पहली तिमाही में हो जाए।
बच्चों-युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
आने वाली पीढ़ी का यही प्रयास होना चाहिए कि कैसे हम अपने विज्ञान के ज्ञान को आगे बढ़ाएं। हम अपने विज्ञान से ऐसी तकनीक विकसित करने का प्रयास करें जिससे समाज में जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। अगर इस दिशा में प्रयास होगा तो कोई भी हमारे हिंदुस्तान की तरक्की रोक नहीं सकता।
इस साल कौन से प्रक्षेपण की योजना है?
मार्च में ही जीएसएलवी मार्क-2 का प्रक्षेपण होगा। अप्रेल में जीएसएलवी मार्क-3 का पहला प्रक्षेपण है जिसके साथ जीसैट-19 उपग्रह छोड़ा जाएगा। इसके अलावा हम एरियन प्रक्षेपण यान से जीसैट-11 का प्रक्षेपण फ्रेंच गुएना के कौरू प्रक्षेपण स्थल से करेंगे। जीसैट-11 में 32 स्पॉट बीम होंगे जो पूरे देश को कवर करेंगे और संचार सेवाओं को नया आयाम देंगे। जीसैट-19 जिसे हम जीएसएलवी मार्क-3 से लांच करने वाले हैं उसमें भी जीसैट-11 का इंजीनियरिंग मॉडल उपयोग में ला रहे हैं। इसके अलावा कार्टोसैट श्रृंखला का एक और उपग्रह इस साल हम लांच करने वाले हैं।
Courtesy: Patrika
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