IT सेक्टर: खतरे में 14 लाख कर्मचारियों की जॉब!

IT सेक्टर: खतरे में 14 लाख कर्मचारियों की जॉब!

नई दिल्ली/बेंगलुरु
भारतीय आईटी सेक्टर के मिड लेवल एंप्लॉयीज का भविष्य धुंधला नजर आ रहा है क्योंकि इंडस्ट्री खुद को ऑटोमेशन और नई टेक्नॉलजी के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रही है। मिड लेवल पर करीब 14 लाख लोग काम करते हैं। मिड लेवल एंप्लॉयीज वे होते हैं जिनके पास 8-12 साल का अनुभव है और उनका वेतन 12 लाख रुपये से लेकर 18 लाख रुपये सालाना तक है। इंडस्ट्री में अभी जिस रीस्किलिंग और रीस्ट्रक्चरिंग की बात चल रही है, उसके केंद्र में यही लोग हैं।

इन्फोसिस के सीईओ विशाल सिक्का ने इकनॉमिक टाइम्स को पिछले साल दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘हर कंपनी इनोवेशन के लिए कंसल्टेंट्स को करोड़ों डॉलर देती है क्योंकि उन्हें लगता है कि इस लिहाज से उनका साइज बहुत बड़ा है। उसके बाद मैकिंजी जैसी कंपनियां आती हैं तो कहती हैं कि आपका मिडल मैनेजमेंट धराशायी हो चुका है। वे हमेशा मिडल मैनेजमेंट को ही बेकार बताती हैं।’ उन्होंने बताया था, ‘मिडल मैनेजमेंट का सच यह नहीं है। दरअसल, मिड लेवल मैनेजमेंट का बाहरी दुनिया से कोई सरोकार नहीं होता।’

यही समस्या की असली जड़ है। कई साल तक एक्सपर्ट्स कहते रहे कि आईटी सेक्टर में करियर ग्रोथ इससे तय होती है कि एक एंप्लॉयी कितने लोगों को मैनेज कर रहा है। कभी भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया कि उसने कितनी नई तकनीक की जानकारी ली है। भारतीय आईटी सेक्टर में मिडल मैनेजमेंट पारंपरिक तौर पर ‘पीपल मॉडल और एफिशंट डिलीवरी’ पर आधारित रहा।

अर्न्स्ट ऐंड यंग में अडवाइजरी सर्विसेज और टेक्नॉलजी सेक्टर लीडर के पार्टनर मिलन सेठ ने कहा कि कभी भी उनका ध्यान नॉलेज बेस्ड डिलिवरी पर नहीं रहा। उन्होंने बताया कि मिडल मैनेजमेंट सबसे कमजोर कड़ी है। लीडर्स की मुलाकात क्लायंट्स से होती रहती है। इसलिए उन्हें पता होता है कि वे क्या सोच रहे हैं और उनके दिमाग में क्या चल रहा है। निचले रैंक वाले एंप्लॉयीज आसानी से नई चीजें सीखते हैं और खुद को कंपनी के मुताबिक ढाल लेते हैं। उधर, मिडल मैनेजमेंट के लिए बदलाव सबसे मुश्किल होता है।

ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों ने बिजनस करने का सामान्य तरीका बदल दिया है। इसलिए इंडस्ट्री के परंपरागत बिजनस मॉडल पर काफी दबाव है। ये बदलाव स्पष्ट दिख भी रहे हैं। इन्फोसिस एक मशीन लर्निंग प्लैटफॉर्म बना रहा है, जो प्रॉजेक्ट्स मैनेजरों को बताएगा कि किसी प्रॉजेक्ट के लिए कितने लोगों की जरूरत है। इसमें डेडलाइन को देखते हुए तालमेल बिठाया जाएगा। कैपजेमिनाइ आईबीएम के कॉग्निटिव कंसल्टिंग टूल वॉटसन की मदद से प्रॉजेक्ट के लिए एंप्लॉयीज को तैनात कर रहा है। आमतौर पर ये काम 10 साल का तजुर्बा रखने वाले एंप्लॉयीज को दिया जाता है। यहां तक कि मिडल मैनेजमेंट की सैलरी हाइक पर भी दबाव है। टेक महिंद्रा ने उन एंप्लॉयीज का सैलरी रिवीजन रोक दिया है, जो 6 साल से अधिक समय से उसके साथ काम कर रहे हैं। कंपनी ने कहा है कि जब तक मैनेजमेंट इस बारे में कोई नया फैसला नहीं कर लेता, सैलरी नहीं बढ़ेगी।

Courtesy: NBT
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