फिर से चुराई मोदी सरकार ने UPA सरकार की पुरानी योजना- UPA के समय भी मिलते थे गर्भवती महिला को 6000 रूपये

फिर से चुराई मोदी सरकार ने UPA सरकार की पुरानी योजना- UPA के समय भी मिलते थे गर्भवती महिला को 6000 रूपये

31 दिसम्बर 2016 को जब पूरा देश इंतज़ार कर रहा था कि प्रधानमंत्री आज पूरे देश को हिसाब देंगे कि काला धन कितना वापस आयाऔर नोटबंदी से कितना फायदा हुआ, उस दिन प्रधानमंत्री ने पूरे देश को लाइव भाषण तो दिया पर नोटबंदी के हिसाब पर एक शब्द नहींबोले। मोदी टीवी पर आये और आने वाले बजट की कुछ झलकियां देकर चले गए। उन्ही कुछ झलकियों में से एक झलकी थी गर्भवतीमहिला को 6000 रूपये की आर्थिक मदद देना। प्रधानमंत्री ने इस योजना को नोटबंदी की उपलब्धि की तरह गिनवाया। पर थोड़ी हीपड़ताल से हमे यह समझ आ गया कि यह योजना एक बार फिर से UPA के समय की योजना की नयी पैकिंग है।  क्या इसका मतलब यहहै कि  नोटबंदी से सही माईने में कुछ हासिल ही नहीं हुआ?

प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि अब से हर गर्भवती महिला जो हॉस्पिटल में डिलीवरी करवाये या बच्चे का टीकाकरण करवाए उसके खाते मेंसीधे 6000 रूपये दाल दिए जायेंगे। हालाँकि सच्चाई यह है कि National Food Security ACT, 2013 (NFSA) जो UPA के समयलाया गया था उसमे पहले से यह प्रबंध किया है हुआ है। इस ACT का स्पेशल फोकस है जच्चा और बच्चा दोनों को अच्छा पोषण मिलेताकि दोनों में से कोई भी कुपोषित न रहे। इसके साथ साथ NFSA यह भी सुनिश्चित करता है कि बच्चे के जन्म के 6  माह बाद भी महिलाइस योजना का फायदा उठा सके। इस योजना के द्वारा मिला हुआ सहयोग 6000 रूपये की कीमत से कम नहीं है।

इसी के साथ साथ एक और योजना भी UPA के समय में आयी थी जिसका नाम है इंद्रा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना।यह योजना जो 2010 में लागू की गयी थी यह नियमों के आधार पर गर्भवती महिला के खाते में पहले दो बच्चों के लिए 6000 रूपए ट्रांसफर करती है। यह योजना UPA के समय से ही देश के 52 जिलों में पहले से लागू है।

किसी भी अच्छी योजना को पिछली सरकार से सीख के तौर पर लेकर लागू करने में कुछ गलत नहीं है।  पर बात गंभीर इसीलिए लगती है क्योंकि मोदी सरकार बनने के बाद UPA की इस योजना पर पूरी तरह अल्पविराम लगाने की साज़िश की जा रही थी। इस योजना के पास होने के तीन साल बाद तक केवल तामील नाडु में इस योजना को पूणर्ता लागू किया गया। लगभग 60 से ज़्यादा एक्टिविस्ट ने प्रधानमंत्री मोदी को नवंबर 2016 में यह पत्र लिखा कि यह योजना का लागू न किया जाना संविधान के खिलाफ है। कोई योजना जब एक ACT का रूप ले लेती है तो वह संविधान का हिस्सा हो जाती है और लोगों का अधिकार हो जाता है उसके लाभ उठाना।

पर जब प्रधानमंत्री पत्र मिलने के एक महीने के बाद जनता के बीच अए तो अपनी इस गलती को दबाते हुए इस योजना को अपनी नयी योजना की तरह पेश किया और साथ ही में इसे नोटेबन्दी के फायदे में जोड़ दिया । ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, माना जाता है कि मोदी सरकार की ज़्यादातर सभी योजनाये चाहे वह आधार हो या चाहे स्वच्छ भारत अभियान, यह सभी योजनाएं UPA के समय आई योजना के नए नाम और नए रूप हैं।

 

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