जियो पर 3 साल में आमदनी 64 करोड़ रु. कम दिखाने का आरोप

जियो पर 3 साल में आमदनी 64 करोड़ रु. कम दिखाने का आरोप

नई दिल्ली
रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने कथित तौर पर मार्च 2015 तक पिछले तीन वित्त वर्ष में अपनी आमदनी 63.77 करोड़ रुपये कम दिखाई थी। दरअसल कंपनी ने अपनी आमदनी में भुना लिए गए फॉरेक्स गेंस को नहीं दिखाया था जिसके चलते सरकार को लाइसेंस फी के तौर पर कम रकम मिली थी। इस बात का जिक्र एक ड्राफ्ट ऑडिट रिपोर्ट में है। डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट फॉर पोस्ट ऐंड टेलिकम्युनिकेशंज की पांच पन्ने की रिपोर्ट को उस पर जवाब के लिए मुकेश अंबानी की टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो और डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम के पास भेजा गया है। इकनॉमिक टाइम्स ने 22 फरवरी को जारी इस रिपोर्ट की कॉपी पर गौर किया था।

ड्राफ्ट ऑडिट में लिखा गया है कि कंपनी की तरफ से ऐनुअल रेवेन्यू स्टेटमेंट के साथ जमा किए गए एनुअल फाइनैंशल स्टेटमेंट और रेवेन्यू रिकंसाइलेशन स्टेटमेंट के मुताबिक जियो ने फिस्कल इयर 2012-13 से 2014-15 के बीच 63.77 करोड़ रुपये तक का फॉरेक्स गेंस भुनाया था। कंपनी को फिस्कल ईयर 2013 में 1.29 करोड़, फिस्कल इयर 2013 में 41.67 करोड़ और फिस्कल इयर 2015 में 20.81 करोड़ रुपये का फॉरेक्स गेन हासिल किया था।

ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘लेकिन इन फॉरेक्स गेंस को रेवेन्यू शेयर के लिए जरूरी एजीआर (अजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू) में शामिल नहीं किया गया। इसके चलते लाइसेंस फी कम बनी।’ रिपोर्ट में कहा गया कि एजीआर में फॉरेक्स गेंस को नहीं शामिल किया जाना लाइसेंस के नियम और शर्तों का उल्लंघन है।

इस मामले में कॉमेंट के लिए जियो को भेजे ईमेल का जवाब मंगलवार को खबर छपने तक नहीं मिल पाया था, लेकिन कंपनी के सूत्रों ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि ऑडिटर ने जो शंकाएं जताई हैं, उनको टेलिकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट अपेलट ऐंड ट्राइब्यूनल (TDSAT) पहले अप्रैल 2015 फिर उसी साल 10 दिसंबर को सेटल कर चुका है। एक सूत्र ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, ‘दोनों ही जजमेंट में ट्राब्यूनल ने एजीआर के कंप्यूटेशन में फॉरेक्स गेंस/लॉस के ट्रीटमेंट को लेकर जियो ही नहीं इंडस्ट्री की मेथडॉलजी को साफ तौर पर सही बताया था।’

ड्राफ्ट ऑडिट में इस बात का जिक्र किया गया है कि जियो के मैनेजमेंट ने उस दौरान फॉरेक्स गेंस के ट्रीटमेंट पर सफाई दी थी जिससे ऑडिटर संतुष्ट नहीं हुआ। ड्राफ्ट रिपोर्ट में जियो को टेलिकॉम डिपार्टमेंट के पास नया जवाब भेजने के लिए तीन हफ्ते का वक्त दिया गया है। DoT के पास ड्राफ्ट ऑडिट का जवाब देने के लिए कुल छह हफ्तों का समय है। इनके रेस्पॉन्स को फाइनल ऑडिट रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

जियो ने अपनी सफाई में कहा था कि डॉट ने खुद फॉरेक्स गेंस पर लाइसेंस शुल्क भुगतान करने की मांग की थी, जिसको कंपनी की तरफ से टेलिकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट अपेलट ऐंड ट्राइब्यूनल (TDSAT) में चुनौती दी गई थी।

Courtesy:NBT

Categories: Finance