‘फर्जी राष्ट्रवादी RSS की सरकार ने भारत का हबीबगंज रेलवे स्टेशन बेच डाला’

‘फर्जी राष्ट्रवादी RSS की सरकार ने भारत का हबीबगंज रेलवे स्टेशन बेच डाला’

नई दिल्ली। रेल बजट में कटौती के बाद केंद्र सरकार ने रेलवे को बेचना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार ने रेलवे को निजी कंपनियों को बेचने की और कदम बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश के हबीबगंज रेलवे स्टेशन को देश का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन बन दिया है। भोपाल की एक प्राइवेट कंपनी ‘बंसल पाथवे’ को इस रेलवे स्टेशन का संचालन सौंपा गया है। रेलवे ने जुलाई 2016 में पीपीपी मॉडल के तहत बंसल ग्रुप के साथ करार किया था, जिसको सोमवार से कंपनी के हाथों सौंप दिया गया है।
बंसल पाथवे जहां रेलवे स्टेशन का संचालन करेगी, वहीं भारतीय रेलवे गाड़ियों का संचालन करेगी। हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर पॉर्किंग से लेकर खानपान तक बंसल ग्रुप के अधीन होगा तथा इससे होने वाली आय भी इसी कंपनी को मिलेगी। इससे रेलवे को 2 करोड़ रुपये सालाना राजस्व की हानि भी होगी। इस स्टेशन पर एस्केलेटर, शॉपिंग के लिए दुकानें, फूड कोर्ट और अन्य सुविधाओं का विस्तार बंसल पाथवे द्वारा किया जाएगा।

सरकार के इस कदम का लोगों ने विरोध करना भी शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इस कदम का विरोध कर रहे हैं-
इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मण्डल लिखते हैं-
रेलवे देश की सबसे बड़ी एंप्लायर है। सबसे ज़्यादा नौकरियां वहीं होती हैं। ऐसे में हबीबगंज रेलवे स्टेशन को बेचे जाने की खबर मुझे चिंतित करती है।
ज़ाहिर है, ख़रीदने वाली कंपनी OBC-SC-ST को रिज़र्वेशन नहीं देगी।
यह रेलवे की नौकरियों में आरक्षण के अंत की शुरूआत है।
जिन लोगों ने मोदी जी को इस उम्मीद में वोट दिया था कि वे कोटा ख़त्म कर देंगे, वे ख़ुश हो सकते हैं।
लेकिन भारत और भारतवासियों के लिए यह बुरी खबर है। इससे राष्ट्रीय एकता कमज़ोर होगी।

 

आशुतोष आर्यन लिखते हैं-
रेलवे ने हबीबगंज स्टेशन को बंसल के हाथों बेचा! तब तक आप देशभक्ति वाला चूर्ण खाइये!

 

बबीता बीता लिखती हैं-
फर्जी राष्ट्रवादी RSS की सरकार ने भारत का हबीबगंज रेलवे स्टेशन बेच डाला !
गिरीश मालवीय लिखते हैं-
आख़िरकार भोपाल का हबीबगंज स्टेशन को निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया गया, इस खबर के मायने क्या हैं यह बहुत से लोगों को आज समझ में नही आएंगे, सच कहूं तो लोगो को अब यह महसूस करा दिया गया है कि निजीकरण बहुत ही अच्छी चीज है, क्योकि सरकार अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाती है, इसलिए यह सबसे आसान है कि किसी भी सर्विस सेक्टर को उठाकर निजी हाथों मे दे दिया जाये, बहुत से लोग इसके लिए सहर्ष स्वीकृति दे देंगे।
लोग कहंगे क़ि हमे विश्वस्तरीय सुविधाएं अपने रेलवे स्टेशन पर चाहिए तो यह तो होना ही चाहिए,
पर जरा रुकिये भारतीय रेलवे के बारे मे कुछ मूलभूत जानकारी आपको होनी चाहिए
यह विशाल सरकारी कंपनी जिसे हम भारतीय रेलवे कहते है ‘राज्य के अंदर एक राज्य जैसा’ है… रेलवे के अपने स्कूल, अस्पताल और पुलिस बल है. इसमें कुल 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं और इस लिहाज से यह दुनिया की सातवां सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाली कंपनी है.. हजारो किलोमीटर लम्बी रेलवे लाइन और करीब 8000 स्टेशनों के साथ भारतीय रेल अमेरिका, रूस एवं चीन के बाद चौथे स्थान पर है
भारतीय रेल नेटवर्क के पास लगभग 9,000 इंजन हैं जिनमें 43 अभी भी भाप से चलने वाले हैं. इंजनों का यह विशाल बेड़ा क़रीब पांच लाख माल ढोने वाले डिब्बों और 60,000 से अधिक यात्री कोचों को 1 लाख 15 हज़ार किलोमीटर लंबे ट्रैक पर खींचते हैं. रेलवे 12,000 से अधिक ट्रेनों का संचालन करता है, जिसमें 2 करोड़ 30 लाख यात्री रोज़ यात्रा करते हैं, यानि क़ि भारतीय रेलवे एक ऑस्ट्रेलिया’ को रोज़ ढोती है,
और हबीबगंज रेलवे स्टेशन को इस प्रकार किसी कम्पनी को बेच दिया जाना भारत मे रेलवे के निजीकरण की नींव का पहला पत्थर रख देना है।
राजू रंजन यादव लिखते हैं-
हबीबगंज-भोपाल देश का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन बना।
रेलवे बिकना चालू हो गया है जिसकी शुरुआत रेलवे स्टेशन से हो चुका है।
मज़हर हुसैन लिखते हैं-
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगे हबीबगंज रेलवे स्टेशन को निजी कम्पनी को सौंपने का मतलब साफ़ है की जो काम यह खुले से नहीं कर सके उसे पिछवाड़े से करना शुरू कर दिया। RSS के कई बड़े नेता समय समय पर भारतीय पिछड़े दलित और वंचित वर्ग के आरक्षण को समाप्त करने के बयानात दे चुके हैं।
अब बॉस के हुक्म के पालन के लिए इन्होंने निजीकरण का सहारा ले लिया है।
हबीबगंज रेलवे स्टेशन को जिस निजी कंपनी को बेचा गया है क्या वो दलित और पिछड़ों को आरक्षण देगी नहीं न बिलकुल नहीं।
तो यही तरीका ईजाद किया है माननीय मोदी जी आरक्षण को समाप्त करने का।
भारतीय रेलवे विश्व के सर्वाधिक रोज़गार देने वाली संस्था है और इनका इरादा धीरे धीरे पूरे रेलवे को निजी हाथों में सौंपने का है जिसका ज़िक्र रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा भी कर चुके हैं।
भाईयों यह PPP मॉडल कुछ नहीं सिर्फ निजीकरण को जायज़ ठहराने का साधन मात्र है। समय है इनकी कुटिल चाल को समझने का और जवाब देने का इन आरक्षण विरोधी भाजपाईयों को.!
रिया चौहान लिखती हैं-
हबीबगंज रेलवे स्टेशन बेचने बाले मोदी जी देश को बेंच देंगे यह हिंदुस्तान का पहला रेलवे स्टेशन है जिसे मोदी सरकार ने बेच दिया है। अब से ये प्राइवेट स्टेशन है। रेलवे ने गुरुवार को अपने समस्त अधिकार प्राइवेट कंपनी बंसल हाथवे प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिए। अब केवल गाड़ी संचालन का जिम्मा ही रेलवे को होगा।
मौर्य प्रिंस गौतम लिखते हैं-
जिसका डर था वही हुआ ब्राह्मण सरकार ने भोपाल का हबीबगंज रेलवे स्टेशन ब्राह्मण बनिया उद्योगपतियों को बेच दिया ताकि रेलवे को निजी हाथों में बेचकर रेलवे में OBC SC ST के आरक्षण (भागीदारी) को खत्म किया जा सके ।
शुभषेख सिंह यादव लिखते हैं-
मुबारक हो देशवासियों, मोदी सरकार ने भोपाल का हबीबगंज रेलवे स्टेशन बंसल हाथवे प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया हैं, अंग्रेजी हुकूमत ने शुरू शुरू में रेलवे अपने कारखानों के माल ढोने के लिए लगाई थी,
अब देशी हुकूमत ने रेलवे को उन्हीं कारखानों के मालिकों को बेचना शुरू कर दिया हैं और नाम विकास का दिया हैं ,
मोदी जी देश की सम्पत्ति को बेचना विकास नहीं देश को गुलामी की तरफ ढकेलना हैं,
नहीं चाहिए हमें दुबारा गुलामी, देश का विकास नहीं कर सकते तो कुर्सी किसी और काबिल नेता के लिए छोड़ दो मगर देश को अमीरों के हाथ तो मत बेंचो, जय हिंद।

 

प्रशांत राही लिखते हैं-
भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन को सरकार ने बंसल प्राईवेट लिमिटेड को बेचा।
सरकार के चापलूसों के अनूसार हबीबगंज रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और पुनर्वास के लिए उसका निजीकरण किया गया गया है।
हाँ भाई सरकार तो अबोध बालक है न! उससे कुछ तो होने वाला नहीं है, एक स्टेशन संभालने कि भी औकात नहीं है उसकी। क्योंकि उसे चुनाव प्रचार से तो फुर्सत ही नहीं मिलता। हबीबगंज स्टेशन से सरकार को 4 करोड़ का सालाना मुनाफा होता था वो अब सीधे बंसल के जेब में जाएगी। आज आधुनिकीकरण के नाम पर स्टेशन बेच रहे हो, कल स्मार्ट सिटी के नाम पर शहरों को बेचोगे और फिर एक दिन डिजीटलाईजेशन के नाम पर पूरा देश बेच देना।
भक्तों बजाओ ताली!
संतोष यादव लिखते हैं-
मोदी सरकार ने भोपाल का हबीबगंज रेलवे स्टेशन बंसल हाथवे प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया हैं।
थोड़ा मौका और दे दिजिये फिर ये पूरा देश बेच देंगे।
पॉलिटिकल स्पीक्स ने लिखा-
विकास एक ऐसा शब्द है जिसको बोलकर आप कुछ भी कर सकते हैं किसी को बेघर कर सकते हैं, किसी सरकारी सम्पदा को बेच सकते हैं, किसानों पर गोलियाँ चलवा सकते हैं। जैसे “राष्ट्रवाद” के नाम पर आप कुछ भी कर सकते हैं किसी को मार सकते हैं, गालियां दे सकते हैं, छात्राओं को रेप की धमकियां दे सकते हैं और फिर भी राष्ट्रवादी बने रहेंगे। असल मुद्दे पर आते हैं।
भोपाल में एक रेलवे स्टेशन है हबीबगंज। छ: प्लेटफोर्म का स्टेशन है। भोपाल जंक्शन से सात किलोमीटर और भोपाल सेंट्रल से दस किलोमीटर की दूरी पर ही। यह हिंदुस्तान का पहला रेलवे स्टेशन है जिसे मोदी सरकार ने बेच दिया है। अब से ये प्राइवेट स्टेशन है। रेलवे ने गुरुवार को अपने समस्त अधिकार  प्राइवेट कंपनी बंसल हाथवे प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिए। अब केवल गाड़ी संचालन का जिम्मा ही रेलवे को होगा।
इस स्टेशन से रेलवे को करीब दो करोड़ का सलाना राजस्व मिलता रहा है जो अब नहीं। मिलेगा क्योंकि अब स्टेशन के अंदर सभी प्रकार की सुविधा जैसे की पार्किंग, खानपान आदि पर बंसल कंपनी का अधिकार होगा और इससे होने वाली आय भी कंपनी ही लेगी।
ये सब हो रहा है विकास के नाम पर। हबीबगंज को वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के नाम पर। अभी तो ये शुरूआत है धीरे धीरे मोदी सरकार रेलवे को ही बेच देगी और एक शब्द के सहारे इसे जायज़ ठहरा दिया जायेगा। देखते हैं कब तक ये “विकास” चलता है।

Courtesy: nationaldastak.

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