एग्जिट पोल एक भद्दा मजाक है|

एग्जिट पोल एक भद्दा मजाक है|

 

कल शाम जैसे ही टीवी पर न्यूज़ चैनल देखा, लगा मानो सब के सब कल के चुनाव के नतीजे पहले से ही जानते है| वरनाइतना आश्वस्त तो उन पार्टी के नेता भी नहीं दीखते जितना ये लोग उनके जीतने के प्रति थे| वरना बनारस में अंतिम चरण के चुनाव के दौरान भला प्रधानमंत्री क्यों ३ दिन तक गलियों में घूमते रहते | या फिर अखिलेश यादव या राहुल गांधी रोड शो कर जनता तक अपनी बात पहुचने की कोशिश करते |

स्टूडियो में बैठ उपस्थित सज्जन ऐसे बोल रहे थे जैसे सामाजिक ज्ञान का वरदान उन्हें तपोवन में प्राप्त हुआ हो| येअलग बात है उसमे से ज़्यादातर सज्जन दिल्ली के खान मार्किट से निकल कर लखनऊ तक भी नहीं पहुँच पाते है|यहाँ ये बतलाना ज़रूरी है की उनके आओ भाव से आप नहीं डरे क्योंकि उनको इसके लिए काफी मोटी रकम मिलती है|दुसरे शब्दो में कहे तो वो चुनाव के चीयर लीडर्स होते है|

बात अभी ज़्यादा पुरानी नहीं है| बिहार के चुनाव के नतीजे आने शुरू ही हुए थे कि NDTV इंडिया के मालिक प्रणव रॉयने घोषणा कर दी की ये मोदी जी की जीत और नितीश के बिहार के युवा के नब्ज नहीं समझने की हार है| और अगले३० मिनट तक बिना रुके उन्होंने अपने पत्रकारिकता के जीवन का पूरा निचोड़ डाल कर, दर्शको को बताया की कैसे उन्होंने बिहार के चुनाव के दौरान ही बता दिया था की नितीश कुमार अपनी सबसे बड़े हार की तरफ अग्रसर है| बिहारचुनाव के नतीजे ठीक उसके विपरीत आए|

चलिए वो दो साल पहले की बात थी कल शाम की ही बात कीजिए | सभी चैनल के प्रमुख पत्रकार अपनी बात शुरू करनेसे पहले, एक मगर बड़ा “अगर” लगाकर सवाल पूछते नज़र आए | अगर ये एग्जिट पोल सही है तो आप क्या करेगे ? अब भला ये बताये की अपने ही चैनेल द्वारा किये गए एग्जिट पोल परप त्रकार को भरोसा नहीं है और वो जनता से उसे देख कर सोचने के लिए कहते है|

जाने माने पत्रकार राजदीप सरदेसाई कल शाम ५ बजे से इंडिया टुडे के इंग्लिश चैनल पर डटे हुए थे, सोचा की रात में आराम फरमाएंगे लेकिन हुआ उसका विपरीत, अपने ही कंपनी के हिंदी चैनल “आज तक” पर जा कर उन्हें अपनी राय देनी पड़ी एग्जिट पोल् के ऊपर| मैंने सोचा इतनी बेवाक और सहज तरीके से बोल रहे है तो क्या पता इन लोगो नेपूरी कोशिश की हो एक सर्वे करने की, सुन लेता हूँ| लेकि रात आते आते उनके ट्विटर के टाइम लाइन परनज़र गई,उन्होंने लिखा है- ” काश ये एग्जिट पोल में नंबर नहीं देना होता और उससे भी ज़्यादा उसपर इतनी गंभीरता से चर्चा नहीं करनी पड़ती ” (Confession time: wish we didn’t have to give exit poll nos with such finality and then discuss with even greater authority| #ExitPoll2017) शायद इससे आगे और लिखने की ज़रुरत नहीं पत्रकारऔर एग्जिट पोल के रिस्ते पर|

चलिए बात करते है अब एग्जिट पोल के आंकड़े की| मिसाल के तौर पर उत्तर प्रदेश के लिए दिखाए गए विभिन्न आंकड़ो की- ६ बड़े सर्वे न्यूज़ चैनल और रिसर्च एजेंसी मिल के किये है उत्तर प्रदेश में| ६ पोल का यदि मीडियन निकाल ले तो१२४ सीट का फर्क आ रहा है | यदि आप गौर से देखे तो टुडे -चाणक्य जहा बीजेपी को 285+ दे रहा वही सी-वोटर 161कोई भी 12 वीं कक्षा का विद्यार्थी जिसे थोड़ा भी सांख्यिकी की समझ है बता देगा ये संभव नहीं है| फिर स्टूडियो में उपस्थित ये राजनीति के विशेषज्ञ क्या चर्चा कर रहे थे ?

Sources: Scroll

वक़्त आ गया है की डेमोक्रेसी की चौथी स्तम्भ कहे जाने वाली मीडिया कुछ अपने अंदर झाँक के देखे| वो कहाँ आ गएहै| जनता ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं, सच पर आधारित और आगे का रास्ता दिखने वाली न्यूज़ खोजती है | जिस तरह से इसचुनाव में प्रिंट मीडिया की इज़्ज़त भी तार तार हुई है वो एक शर्म की बात है| कैसे एक जाने माने दैनिक ने अपने प्रमुख पेज पर एक सर्वे को छाप दिया किसी दल विशेष की जीत को लेकत उत्तर प्रदेश में| बाद में चुनाव आयोग की नोटिस आयी तो बता दिया ये तो विज्ञापन था| यदि यही हाल रहा तो फोर्थ एस्टेट और जैसा लगने लगेगा| उम्मीद है कल के चुनाव के नतीजे आने पर जिस चैनेल ने गलत एग्जिट पोल किया है वो माफ़ी मांगे और पूरी कवरेज के दौरान अपनी गलती को मानें।

Categories: Opinion

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