नोटबंदी के बाद गोल्ड इंपोर्ट में आई भारी गिरावट

नोटबंदी के बाद गोल्ड इंपोर्ट में आई भारी गिरावट

नई दिल्ली
देश में गोल्ड की डिमांड पर केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले का काफी असर हुआ है। दिसंबर और जनवरी में गोल्ड इंपोर्ट में भारी गिरावट आई। दिसंबर में गोल्ड इंपोर्ट घटकर 54.1 टन और जनवरी में 53.2 टन रह गया, जो नवंबर में 119.2 टन था। नवंबर में सरकार ने 500 और 1,000 के पुराने नोटों को अमान्य करने का ऐलान किया था, जिससे 86 प्रतिशत करंसी महज कागज का टुकड़ा बन गई थी।

इस साल जनवरी में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले गोल्ड इंपोर्ट में 43 फीसदी की गिरावट हई। बड़े नोटों को अचानक से बैन करने के फैसले से देश में कैश का भारी संकट खड़ा हो गया था, जिससे गोल्ड समेत कई कमोडिटीज की मांग पर बुरा असर हुआ था।

आरबीआई के असेसमेंट पेपर के मुताबिक, नोटबंदी के बाद गोल्ड (या गोल्ड आइटम्स) की घरेलू मांग में अचानक से जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। दरअसल, खरीदार पुराने नोटों को खत्म करने के लिए बड़े प्रीमियम पर गोल्ड खरीदने को तैयार थे। पेपर में कहा गया, ‘इस घटनाक्रम और सीजनल उछाल के कारण नवंबर में गोल्ड इंपोर्ट की वॉल्यूम में उछाल आया। यहां तक कि अक्टूबर के उच्च स्तर से ज्यादा। हालांकि, दिसंबर 2016 और जनवरी 2017 में गोल्ड इंपोर्ट में तेज गिरावट आई।’

रिजर्व बैंक का कहना था कि भारत में तकरीबन 80 फीसदी जैम्स और जूलरी की खरीदारी कैश में होती है और माना जा रहा है कि कैश की कमी के कारण कन्ज्यूमर डिमांड प्रभावित हुई। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में से एक हैं। इस इंपोर्ट के जरिये मुख्य तौर पर जूलरी इंडस्ट्री की डिमांड को पूरा किया जाता है।

मौजूदा वित्त वर्ष के अप्रैल-जनवरी पीरियड में वॉल्यूम के लिहाज से देश का टोटल गोल्ड इंपोर्ट घटकर 546 टन रह गया, जो एक साल पहले के इसी पीरियड के 892.9 टन से काफी कम है। 2015-16 में कुल गोल्ड इंपोर्ट 968 टन रहा।

Courtesy: NBT
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