महंगाई दर बढ़ने से रेट कट की आस टूटी

महंगाई दर बढ़ने से रेट कट की आस टूटी

नई दिल्ली
खाने के सामान और फ्यूल की कीमत बढ़ने से फरवरी में महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई। गर्मियों के मौसम में सब्जियों के दाम बढ़ने की उम्मीद है और ग्लोबल मार्केट में भी कमोडिटीज की कीमत बढ़ रही है। ऐसे में रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में राहत की उम्मीद कमजोर हो गई है।

कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स (कंबाइंड) के आधार पर फरवरी में महंगाई दर 3.65 पर्सेंट रही, जो जनवरी में 3.17 पर्सेंट और साल भर पहले के इसी महीने में 5.26 पर्सेंट थी। स्टैटिस्टिक्स ऑफिस की तरफ से जो डेटा मंगलवार को रिलीज किए गए, उनसे यह जानकारी मिली है। कॉमर्स ऐंड उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए डेटा से पता चलता है कि देश में होलसेल इन्फ्लेशन (थोक मुद्रास्फीति) फरवरी में 39 महीने में सबसे अधिक 6.55 पर्सेंट रही, जो जनवरी में 5.25 पर्सेंट रही थी।

महंगाई बढ़ने से रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ गई है। उसने फरवरी में पिछले मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू में महंगाई का हवाला देकर ब्याज दरों में कटौती नहीं की थी। रिजर्व बैंक की अगली बैठक 5-6 अप्रैल को होने जा रही है।इस बारे में इंडिया रेटिंग्स के चीफ इकनॉमिस्ट देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, ‘सब्जियों की कीमतें कम बनी हुई थीं। लेकिन गर्मियों का सीजन करीब आने के साथ इनके दाम बढ़ने के आसार दिख रहे हैं। ऐसे में रेट कट की संभावना कम हो गई है। कमोडिटी और अनाज की कीमत में बढ़ोतरी भी चिंताजनक है। हालांकि, हमें दाल की कीमतें सितंबर तक कम रहने की उम्मीद है क्योंकि पिछले साल तब तक इसके दाम हायर लेवल पर थे।’

जनवरी में इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन में बढ़ोतरी के बाद महंगाई दर के आंकड़े आए हैं। इससे फाइनैंशल इयर की आखिरी तिमाही की अच्छी शुरुआत हुई है। पहले माना जा रहा था कि नोटबंदी का असर इस महीने में भी औद्योगिक उत्पादन पर दिखेगा। वहीं, सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) ने 2016-17 में जीडीपी ग्रोथ 7.1 पर्सेंट रहने का अनुमान दिया है, जो 2015-16 में 7.9 पर्सेंट था।

नोटबंदी के चलते वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कन्जम्पशन डिमांड कम हो गई थी। इसे देखते हुए CSO ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को कम रखा है। वहीं, जनवरी में कन्ज्यूमर इन्फ्लेशन पिछले पांच साल के लो लेवल पर पहुंच गई थी। ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने 2017 के मध्य में अल नीनो की आशंका जताई है, जिसका असर दुनिया भर में मॉनसून पर पड़ सकता है। भारत के अर्थशास्त्री अपने अनुमान में उसके असर को भी शामिल कर रहे हैं।

क्रिसिल के चीफ इकॉनमिस्ट डी के जोशी ने कहा, ‘ग्लोबल मार्केट में क्रूड और कमोडिटी के दाम में बढ़ोतरी के चलते रेट कट के आसार नहीं दिख रहे हैं। वहीं, जीएसटी से भी महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसके साथ, अल नीनो के चलते मॉनसून के भी सामान्य रहने की उम्मीद नहीं दिख रही है।’

Courtesy: NBT
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